नीरज सिसौदिया, बरेली
राजनीति के शोर-शराबे और चुनावी वादों के बीच अगर कोई पहल सीधे समाज की जड़ों को मजबूत करने की बात करती है, तो वह अलग नजर आती है। समाजवादी पार्टी बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव, पूर्व ब्लॉक प्रमुख और फरीदपुर विधानसभा सीट से सपा के प्रबल दावेदार चंद्रसेन सागर ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी ही एक अनोखी ऐतिहासिक और सराहनीय पहल की शुरुआत की है। उन्होंने तय किया है कि इस बार दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा पास करने वाले हर विद्यार्थी को सम्मानित किया जाएगा-चाहे वह टॉपर हो या औसत अंक लाने वाला छात्र।
आमतौर पर देखने में आता है कि सम्मान समारोहों में सिर्फ टॉप करने वाले बच्चों को बुलाकर सम्मानित कर दिया जाता है। मंच पर कुछ चुनिंदा चेहरे होते हैं, तालियां बजती हैं और कार्यक्रम खत्म हो जाता है। लेकिन इस परंपरा के पीछे एक सच्चाई यह भी है कि जो बच्चे कड़ी मेहनत के बावजूद टॉपर्स की सूची में नहीं आ पाते, उनके मन में कहीं न कहीं हीन भावना घर कर जाती है। चंद्रसेन सागर ने इसी सोच को बदलने की ठानी है।
उनका मानना है कि बोर्ड परीक्षा पास करना ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। हर वह बच्चा जिसने साल भर मेहनत की, चुनौतियों का सामना किया और परीक्षा में सफल हुआ, वह सम्मान का हकदार है। इसी सोच के तहत उन्होंने फैसला किया है कि फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र का कोई भी बच्चा, जिसने इस बार बोर्ड परीक्षा पास की है, वह सम्मान से वंचित नहीं रहेगा।
इस पहल के तहत विद्यार्थियों को मेडल, प्रशस्ति पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया जाएगा। खास बात यह है कि इसमें सरकारी स्कूल और प्राइवेट स्कूल का कोई भेदभाव नहीं होगा। गांव के स्कूल का छात्र हो या शहर के बड़े स्कूल का, सभी को एक समान मंच पर सम्मान मिलेगा। इसी तरह बेटा-बेटी में भी कोई अंतर नहीं रखा जाएगा। हर छात्र-छात्रा को बराबरी का दर्जा देते हुए सम्मानित किया जाएगा।
चंद्रसेन सागर कहते हैं कि किसी भी विद्यार्थी की मेहनत का मूल्यांकन सिर्फ अंकों के आधार पर नहीं किया जा सकता। कई बार परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि बच्चा अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पाता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसकी मेहनत कम है। ऐसे में अगर उसे समाज से सम्मान मिले, तो उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है और वह आगे बेहतर करने के लिए प्रेरित होता है।
उनकी यह सोच केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन में भी इसका साफ असर दिखाई देता है। दलित समाज से आने वाले चंद्रसेन सागर पिछले करीब चार दशकों से राजनीति के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ समाज में शिक्षा का संदेश दिया, बल्कि अपने घर से इसकी शुरुआत भी की। उन्होंने अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाई, जिसके परिणामस्वरूप आज उनकी एक बेटी आईएएस अधिकारी है और दो बेटियां आईआरएस अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रही हैं। इसके अलावा उनकी दो बेटियां फैशन इंडस्ट्री में भी अपनी पहचान बना रही हैं।
यह उदाहरण खुद बताता है कि सागर केवल बातें नहीं करते, बल्कि अपने जीवन में भी शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। यही वजह है कि उनकी इस पहल को समाज में गंभीरता से देखा जा रहा है।
फरीदपुर में वह एक स्कूल भी संचालित कर रहे हैं, जहां हर वर्ग और समुदाय के बच्चों को शिक्षा दी जाती है। उनका मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे समाज में बराबरी लाई जा सकती है और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में जोड़ा जा सकता है।

फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की पहल पहली बार देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि गांव-गांव जाकर हर पास छात्र को सम्मानित किया जाए। आमतौर पर कार्यक्रम शहरों या कस्बों तक सीमित रहते हैं, लेकिन सागर का प्रयास है कि हर गांव तक पहुंचा जाए और हर बच्चे को यह एहसास दिलाया जाए कि उसकी मेहनत की कद्र की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत गुरुवार से की जाएगी। अलग-अलग गांवों और क्षेत्रों में सम्मान समारोह आयोजित होंगे और यह सिलसिला तब तक चलता रहेगा, जब तक फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र का हर पात्र विद्यार्थी सम्मानित नहीं हो जाता। यानी यह एक-दो दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक अभियान के रूप में चलाया जाएगा।
इस पहल के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं, क्योंकि चंद्रसेन सागर फरीदपुर सीट से सपा के टिकट के दावेदार हैं। लेकिन इससे अलग हटकर देखें तो यह कदम समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है। अगर इस तरह की पहलें बढ़ती हैं, तो निश्चित रूप से इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।

फरीदपुर के अभिभावकों और छात्रों में इस पहल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई लोग इसे एक नई शुरुआत मान रहे हैं, जहां बच्चों को सिर्फ अंकों के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और प्रयास के लिए सराहा जाएगा।
कुल मिलाकर, चंद्रसेन सागर की यह पहल सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि सोच में बदलाव की कोशिश है- एक ऐसी सोच, जो हर बच्चे को आगे बढ़ने का हौसला देती है और यह संदेश देती है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।





