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गृह कर ब्याज माफी योजना में गड़बड़ी पर राजेश अग्रवाल ने उठाई आवाज, महापौर से की मुलाकात, पढ़ें क्या-क्या हुआ मुलाकात के दौरान?

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नीरज सिसौदिया, बरेली

नगर निगम की गृह कर ब्याज माफी योजना को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और बरेली कैंट विधानसभा सीट से 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा टिकट के प्रबल दावेदार राजेश अग्रवाल ने करदाताओं की समस्या को लेकर आवाज उठाई है। उन्होंने महापौर डॉ. उमेश गौतम से मुलाकात कर प्रस्तावित ब्याज माफी योजना में सामने आ रही विसंगतियों पर विस्तार से चर्चा की और योजना को करदाताओं के हित में सरल बनाने की मांग की।

राजेश अग्रवाल ने महापौर को अवगत कराया कि नगर निगम द्वारा गृह कर पर ब्याज माफी का लाभ देने के लिए जिस व्यवस्था की बात सामने आ रही है, उससे बड़ी संख्या में करदाता योजना के वास्तविक लाभ से वंचित हो सकते हैं। उनका कहना है कि योजना के तहत यदि करदाता के वर्तमान में लागू गृह कर को वर्ष 2014 से ही आधार मानकर पुराने वर्षों का कर निर्धारित किया जाता है, तो इससे करदाताओं पर राहत मिलने के बजाय अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में अधिकांश संपत्तियों पर निर्धारित गृह कर वर्तमान गृह कर की तुलना में कम था। ऐसे में यदि किसी करदाता से वर्ष 2014 के लिए वर्तमान में लागू अधिक गृह कर के आधार पर बकाया राशि तय की जाती है और फिर उसी बढ़ी हुई राशि पर ब्याज में छूट दी जाती है, तो यह व्यवस्था व्यवहारिक रूप से करदाता के लिए राहतकारी साबित नहीं होगी।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि ब्याज माफी का उद्देश्य करदाताओं को राहत देना और नगर निगम का बकाया राजस्व वसूल करना होना चाहिए, न कि ऐसी प्रक्रिया तैयार करना जिससे पुराने कर को ही बढ़ाकर देय राशि अधिक हो जाए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि व्यवस्था को स्पष्ट और सरल नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में लोग वन टाइम सेटलमेंट स्कीम का लाभ लेने से पीछे हट सकते हैं।

उन्होंने महापौर के सामने यह भी मुद्दा रखा कि यदि किसी करदाता ने वर्ष 2014 में जिस गृह कर के आधार पर नगर निगम को कर जमा किया था, उसी को आधार मानकर ब्याज माफी का लाभ दिया जाए तो यह व्यवस्था ज्यादा न्यायसंगत होगी। उनका कहना था कि पुराने कर को वर्तमान दरों के आधार पर अनावश्यक रूप से बढ़ाने से योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा।

राजेश अग्रवाल ने मांग की कि वर्ष 2014 में करदाता जिस गृह कर का भुगतान कर रहा था, उसी को आधार मानते हुए ब्याज माफी योजना का लाभ दिया जाए। इससे करदाताओं को वास्तविक राहत मिलेगी और नगर निगम को भी पुराने बकाये की वसूली के रूप में अपेक्षित राजस्व प्राप्त हो सकेगा।

चारों जोन में विशेष काउंटर बनाने का सुझाव

राजेश अग्रवाल ने गृह करदाताओं की सुविधा के लिए नगर निगम के सभी चारों जोन में विशेष काउंटर स्थापित करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इन काउंटरों पर करदाता अपने गृह कर से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के साथ ही ब्याज माफी योजना के लिए आवेदन जमा कर सकें।

उन्होंने कहा कि अक्सर योजनाओं की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने के कारण आम करदाता नगर निगम के चक्कर काटने को मजबूर होता है। ऐसे में यदि प्रत्येक जोन में विशेष काउंटर बनाया जाए और वहां कर्मचारियों को योजना से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए तो करदाताओं को काफी राहत मिल सकती है।

उन्होंने सुझाव दिया कि विशेष काउंटर पर करदाताओं को यह भी बताया जाए कि उनके ऊपर वर्ष 2014 से अब तक कितना गृह कर बकाया है, कितना ब्याज लगा है और ब्याज माफी के बाद उन्हें वास्तविक रूप से कितनी राशि जमा करनी होगी। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और करदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति भी खत्म होगी।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि नगर निगम और करदाता दोनों के हित में ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें करदाता को सरल तरीके से अपनी देनदारी समझ में आए और नगर निगम को भी बकाया गृह कर की अधिक से अधिक वसूली हो सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि महापौर इस विषय को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे।

राजेश अग्रवाल लंबे समय से शहर से जुड़े जनहित के मुद्दों को उठाते रहे हैं। वह नगर निगम के पार्षद होने के साथ बरेली विकास प्राधिकरण के सदस्य भी हैं। वह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और पूर्व में बरेली शहर विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी रह चुके हैं। वर्तमान में उनका नाम बरेली कैंट विधानसभा सीट से 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा के टिकट के प्रमुख दावेदारों में लिया जा रहा है।

गृह कर ब्याज माफी योजना को लेकर महापौर से उनकी मुलाकात को भी इसी क्रम में देखा जा रहा है। राजेश अग्रवाल का कहना है कि शहर के आम करदाताओं को किसी भी ऐसी योजना का लाभ मिलना चाहिए, जिसका उद्देश्य वास्तव में आर्थिक राहत देना और लंबित राजस्व की वसूली करना हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि योजना की मौजूदा व्यवस्था में जरूरी सुधार कर दिए जाएं तो इससे करदाताओं के साथ-साथ नगर निगम दोनों को फायदा हो सकता है।

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