नीरज सिसौदिया, बरेली
राजनीति में अक्सर नेता अपने समर्थकों और अपनी विचारधारा से जुड़े चेहरों को ही आगे रखते दिखाई देते हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और फरीदपुर विधानसभा सीट से 2027 के संभावित दावेदार चंद्रसेन सागर ने इससे अलग एक ऐसी पहल की है, जिसने समाजवादी संदेश यात्रा को महज एक राजनीतिक यात्रा के बजाय इतिहास, विचारधारा और राजनीतिक विरासत को एक साथ प्रदर्शित करने वाला अभियान बना दिया है। संदेश यात्रा के लिए तैयार किए गए रथ पर जहां देश के अलग-अलग वर्गों और समुदायों के महापुरुषों को स्थान दिया गया है, वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश और बरेली के स्थानीय नेताओं तक को तस्वीरों के माध्यम से सम्मान दिया गया है।

चंद्रसेन सागर की इस पहल की खासियत यही है कि उन्होंने रथ को केवल चुनावी प्रचार का माध्यम नहीं रहने दिया। इस रथ पर एक तरफ डॉ. भीमराव आंबेडकर, डॉ. राम मनोहर लोहिया और मुलायम सिंह यादव जैसे प्रमुख विचारकों और समाजवादी राजनीति के स्तंभों के चित्र हैं, तो दूसरी तरफ महर्षि वाल्मीकि, महर्षि कश्यप, भगवान परशुराम, महाराणा प्रताप, महाराजा दक्ष प्रजापति, भगवान विश्वकर्मा, महारानी अवंतीबाई, महारानी होल्कर, माता कर्माबाई, सरदार वल्लभभाई पटेल, महाराजा अग्रसेन, सम्राट अशोक, महात्मा बुद्ध, गुरु नानक देव, ईसा मसीह, महात्मा गाडगे और कर्पूरी ठाकुर जैसे अलग-अलग सामाजिक वर्गों और परंपराओं के महापुरुषों को स्थान दिया गया है।
इस पूरी पहल का संदेश स्पष्ट है- राजनीतिक विचारधारा अपनी जगह है, लेकिन समाज और देश के निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुष किसी एक जाति, वर्ग या दल की विरासत नहीं होते।
चंद्रसेन सागर के संदेश रथ की एक बड़ी विशेषता समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को दिया गया स्थान है। रथ पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ-साथ राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव, प्रो. रामगोपाल यादव, रामजी लाल सुमन, किरणमय नंदा, डिंपल यादव, आदित्य यादव, वीरपाल सिंह यादव समेत पार्टी के कई प्रमुख चेहरों के चित्र लगाए गए हैं।

ये तस्वीरें केवल नेताओं के प्रति सम्मान का प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि समाजवादी पार्टी के संगठन और उसके शीर्ष नेतृत्व के साथ फरीदपुर की राजनीतिक कड़ी को भी प्रदर्शित करती हैं। इस यात्रा का शुभारंभ स्वयं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने 31 अगस्त को किया था। ऐसे में रथ पर शिवपाल सिंह यादव समेत राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रमुख चेहरों को स्थान दिए जाने का राजनीतिक और संगठनात्मक महत्व भी है।
प्रदेश स्तर के नेताओं को भी मिला पूरा सम्मान
रथ पर प्रदेश स्तर के समाजवादी नेताओं को भी प्रमुखता दी गई है। श्याम लाल पाल, राजपाल कश्यप, धर्मेंद्र सिंह यादव, अता उर रहमान, शहजिल इस्लाम और भगवत सरन गंगवार समेत कई नेताओं को तस्वीरों के माध्यम से स्थान दिया गया है।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी राजनीतिक दल का वास्तविक विस्तार केवल राष्ट्रीय नेतृत्व से नहीं होता। प्रदेश और विधानसभा स्तर पर सक्रिय नेताओं की भूमिका भी संगठन को जमीन पर मजबूत करने में अहम होती है। चंद्रसेन सागर ने राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व के साथ-साथ इन नेताओं को भी एक ही मंच पर जगह देकर समाजवादी पार्टी के व्यापक संगठनात्मक स्वरूप को सामने रखने की कोशिश की है।

स्थानीय नेताओं को भी पूरा सम्मान
इस पहल का शायद सबसे भावनात्मक हिस्सा बरेली के स्थानीय समाजवादी नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों को दिया गया स्थान है। रथ पर पूर्व विधायक पंडित आरके शर्मा, पूर्व विधायक सुल्तान बेग, पूर्व विधायक महिपाल सिंह यादव, पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर, डॉ. विजय सिंह यादव, जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव, बरेली महानगर अध्यक्ष शमीम खान सुल्तानी और महिला जिला अध्यक्ष स्मिता यादव जैसे स्थानीय चेहरों के चित्र लगाए गए हैं।
इसके अलावा समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष शिवचरण कश्यप, डॉ. राजेश्वर सिंह यादव, राज बाबू, नरेंद्र प्रताप सिंह यादव, आदेश सिंह यादव गुड्डू, राकेश्वर सिंह यादव, अरविंद सिंह यादव, संजीव यादव, सूरज यादव, रविंद्र सिंह यादव और कमल साहू जैसे पार्टी से जुड़े पुराने और सक्रिय नेताओं को भी स्थान दिया गया है।
यही वह पहलू है जो इस रथ को सामान्य राजनीतिक प्रचार वाहनों से अलग बनाता है। आम तौर पर चुनावी दौर में नेताओं के पोस्टर पर वर्तमान नेतृत्व और संभावित प्रत्याशी ही दिखाई देते हैं, लेकिन चंद्रसेन सागर ने पार्टी की राजनीतिक यात्रा में योगदान देने वाले पुराने चेहरों को भी तस्वीरों के जरिए सम्मान दिया है।
महापुरुषों और नेताओं को एक साथ रखने का संदेश
रथ पर महापुरुषों और राजनीतिक नेताओं की तस्वीरों को एक साथ स्थान देने के पीछे एक व्यापक सामाजिक संदेश भी देखा जा सकता है। महर्षि वाल्मीकि से लेकर महर्षि कश्यप, भगवान परशुराम से महाराणा प्रताप, सम्राट अशोक से महात्मा बुद्ध और महारानी अवंतीबाई से माता कर्माबाई तक अलग-अलग सामाजिक समूहों से जुड़े महापुरुषों को शामिल किया गया है।

इसके साथ ही मुस्लिम समाज से जुड़े धार्मिक व्यक्तित्व आला हजरत और सूफी संत मन्ने मियां, सिख समाज के गुरु नानक देव और ईसाई समुदाय के ईसा मसीह को भी स्थान दिया गया है।
इस तरह रथ पर तस्वीरों की पूरी संरचना सामाजिक विविधता और सम्मान की राजनीति का संदेश देती है। यह बताने का प्रयास है कि राजनीतिक यात्रा केवल एक समुदाय या एक वर्ग की नहीं बल्कि पूरे समाज को साथ लेकर चलने की कल्पना पर आधारित है।
सिर्फ बड़े नाम नहीं, जमीनी कार्यकर्ताओं की भी तस्वीर
चंद्रसेन सागर की पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उन्होंने केवल राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले बड़े नेताओं को ही महत्व नहीं दिया। स्थानीय स्तर पर पार्टी के लिए काम करने वाले नेताओं और पुराने पदाधिकारियों को भी रथ पर जगह मिली है।
यह राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण संदेश है। किसी भी पार्टी के लिए उसके पुराने कार्यकर्ता और स्थानीय नेता उसकी जमीनी ताकत होते हैं। जब ऐसे नेताओं की तस्वीरों को किसी बड़े राजनीतिक अभियान में जगह मिलती है तो उन्हें यह संदेश जाता है कि पार्टी के इतिहास और संगठन में उनके योगदान को भुलाया नहीं गया है।

यही कारण है कि इस रथ को केवल ‘चंद्रसेन सागर की राजनीतिक यात्रा’ के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। यह समाजवादी पार्टी की कई पीढ़ियों के नेताओं, विचारकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं को एक साथ जोड़ने की कोशिश भी दिखाई देती है।
रविवार को जब समाजवादी संदेश यात्रा फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में पहुंचेगी तो रथ पर लगी इन तस्वीरों का लोगों के बीच राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी देखने को मिलेगा। फरीदपुर की जनता के सामने एक ऐसा रथ होगा, जिसमें एक ही स्थान पर समाजवादी विचारधारा के प्रमुख चेहरे, राष्ट्रीय नेतृत्व, प्रदेश के नेता, बरेली के स्थानीय समाजवादी और विभिन्न सामाजिक वर्गों के महापुरुष नजर आएंगे।
चंद्रसेन सागर की इस पहल को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है क्योंकि राजनीतिक पोस्टर और बैनर अक्सर तत्कालीन चुनावी समीकरणों तक सीमित रह जाते हैं, जबकि इस रथ को उन्होंने राजनीतिक स्मृति और सामाजिक सम्मान का माध्यम बनाने की कोशिश की है।
एक तरफ मुलायम सिंह यादव, डॉ. आंबेडकर और डॉ. लोहिया जैसे समाजवादी राजनीति के प्रमुख स्तंभ हैं, तो दूसरी तरफ अलग-अलग जातियों और समुदायों के महापुरुष हैं। इसके साथ अखिलेश यादव से लेकर शिवपाल सिंह यादव तक राष्ट्रीय नेतृत्व, प्रदेश के नेता और बरेली के स्थानीय समाजवादी चेहरे हैं।
यानी एक अर्थ में यह रथ समाजवादी पार्टी की विचारधारा, उसके राष्ट्रीय नेतृत्व, प्रदेश संगठन, बरेली की स्थानीय राजनीतिक विरासत और सामाजिक विविधता—इन सभी को एक ही फ्रेम में समेटने की कोशिश है।
चंद्रसेन सागर की इस पहल का राजनीतिक परिणाम क्या होगा, यह तो 2027 के चुनाव में ही स्पष्ट होगा, लेकिन इतना जरूर है कि संदेश यात्रा के रथ पर तस्वीरों का यह प्रयोग सामान्य राजनीतिक प्रचार से अलग दिखाई देता है। महापुरुषों को सम्मान देने के साथ-साथ राष्ट्रीय, प्रदेश और स्थानीय स्तर के नेताओं को स्थान देकर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि राजनीति केवल वर्तमान का संघर्ष नहीं, बल्कि विचारधारा, विरासत और समाज के लिए योगदान देने वाले लोगों को याद रखने का भी नाम है।
यही वजह है कि फरीदपुर पहुंचने से पहले ही समाजवादी संदेश यात्रा का यह रथ चर्चा में आ गया है। अब देखने वाली बात होगी कि चंद्रसेन सागर की यह ऐतिहासिक पहल जनता के बीच किस तरह का राजनीतिक और सामाजिक संदेश स्थापित करती है।




