नीरज सिसौदिया, बरेली
भाजपा संगठन में करीब तीन दशक तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने वाले हर्षवर्धन अब बरेली कैंट विधानसभा सीट पर टिकट की चर्चा के केंद्र में हैं। मंडल स्तर से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष, पांचाल क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष और ब्रज क्षेत्र के उपाध्यक्ष तक पहुंचा तो पार्टी ने उन्हें अलग-अलग समय में कई जिलों की संगठनात्मक जिम्मेदारी भी सौंपी। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में प्रभारी की भूमिका निभाने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई रैलियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हर्षवर्धन को हाल ही में भाजपा ने पीलीभीत जिले का प्रभारी बनाया है। संगठन के भरोसेमंद चेहरों में गिने जाने वाले हर्षवर्धन की यही लंबी संगठनात्मक पारी अब बरेली कैंट विधानसभा सीट से 2027 के टिकट की दावेदारी को नई धार देती दिखाई दे रही है।
हर्षवर्धन की राजनीतिक यात्रा सीधे चुनावी मैदान से नहीं, बल्कि संगठन के जमीनी काम से शुरू हुई। वर्ष 1998-99 के आसपास भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हुए और बाद में टीबरीनाथ मंडल में युवा मोर्चा के मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद महानगर संगठन में विभिन्न भूमिकाएं निभाईं और प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य भी रहे। वर्ष 2010 में उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का बरेली जिलाध्यक्ष बनाया गया। यह जिम्मेदारी उनके संगठनात्मक सफर में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
इसके बाद उनका दायरा बरेली से बाहर बढ़ा। वर्ष 2013 से 2016 तक उन्होंने पांचाल क्षेत्र युवा मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में काम किया। वर्ष 2016 में संगठनात्मक पुनर्गठन के बाद उन्हें भाजपा ब्रज क्षेत्र का उपाध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर रहते हुए ब्रज क्षेत्र के विभिन्न जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके पास रही। उन्हें लगातार तीन बार ब्रज क्षेत्र में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने की बात भी सामने आती रही है।
सितंबर 2026 में भाजपा की नई ब्रज क्षेत्रीय कार्यकारिणी घोषित हुई तो उनका नाम उपाध्यक्षों की सूची में नहीं था, लेकिन संगठन में उनकी सक्रियता कम होने के बजाय उन्हें नई जिम्मेदारी मिल गई। पार्टी ने उन्हें पीलीभीत जिले का प्रभारी नियुक्त किया। जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने पीलीभीत भाजपा कार्यालय पहुंचकर जिलाध्यक्ष और पदाधिकारियों के साथ बैठक की तथा संगठन की आगामी गतिविधियों और तैयारियों पर चर्चा की।
हर्षवर्धन की राजनीतिक पहचान केवल संगठनात्मक पदों तक सीमित नहीं है। अलग-अलग चुनावों में पार्टी ने उन्हें मैदान में उतारने के बजाय संगठन संभालने और चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र का संगठनात्मक प्रभार संभाला। इसी वर्ष निकाय चुनाव में उन्हें पीलीभीत जिले की जिम्मेदारी दी गई।
वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव उनके राजनीतिक सफर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय रहा। उन्हें बदायूं लोकसभा सीट का प्रभारी बनाया गया। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहराइच, आजमगढ़ और मऊ में आयोजित रैलियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की रैलियों को जमीन पर सफल बनाने से लेकर लोकसभा क्षेत्र के संगठनात्मक प्रबंधन तक काम करने का अनुभव उनके राजनीतिक प्रोफाइल को अलग आयाम देता है।
इसी वर्ष उन्हें ब्रज क्षेत्र का सदस्यता प्रमुख भी बनाया गया। नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में भाजपा के अभियान में उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर जिम्मेदारी निभाई। भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की आगरा रैली के प्रबंधन में भी उनकी भूमिका रही। यानी पार्टी के बड़े अभियानों से लेकर बूथ और जिला स्तर के संगठन तक उनकी सक्रियता का दायरा लगातार बना रहा।
वर्ष 2021 से 2023 तक उन्होंने कासगंज जिले के प्रभारी के रूप में काम किया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कासगंज के संगठनात्मक काम के साथ वाराणसी दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभाली। वर्ष 2023 में उन्हें एटा जिले का प्रभारी बनाया गया। लोकसभा चुनाव के दौरान एटा लोकसभा क्षेत्र में प्रवासी के रूप में काम करने के अलावा चुनाव के अंतिम चरण में वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के बूथ प्रबंधन और सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के चुनाव प्रबंधन में भी उनकी भूमिका रही।
इस पूरे सफर में एक बात लगातार दिखाई देती है—पार्टी ने उन्हें केवल बरेली तक सीमित नहीं रखा बल्कि अलग-अलग जिलों और चुनावी परिस्थितियों में संगठन संभालने की जिम्मेदारी दी। पीलीभीत, बदायूं, कासगंज, एटा और वाराणसी जैसे अलग-अलग राजनीतिक-सामाजिक समीकरण वाले क्षेत्रों में काम करने का अनुभव उनके संगठनात्मक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
बरेली कैंट से टिकट की उनकी दावेदारी भी नई नहीं है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कैंट सीट से टिकट के लिए प्रयास किया था, हालांकि पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया। वर्ष 2022 में बरेली-रामपुर स्थानीय निकाय सीट से टिकट की चर्चा में भी उनका नाम आया था। इससे पहले वर्ष 2000 में वार्ड सभासद के टिकट के लिए प्रयास और वर्ष 2016 में बरेली महानगर अध्यक्ष पद की दौड़ में भी उनका नाम सामने आया था।
लेकिन इन राजनीतिक प्रयासों के बीच उन्होंने संगठन से दूरी नहीं बनाई। बल्कि टिकट न मिलने के बाद भी पार्टी की ओर से मिलने वाली जिम्मेदारियों को लगातार निभाते रहे। यही पहलू उनकी मौजूदा दावेदारी को अलग संदर्भ देता है। 2027 में कैंट सीट के लिए उनका नाम सामने आने के पीछे केवल स्थानीय सक्रियता नहीं बल्कि लंबे समय तक संगठन में काम करने और पार्टी की ओर से लगातार अलग-अलग जिम्मेदारियां दिए जाने का रिकॉर्ड भी चर्चा में है।
कैंट विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरण भी संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में महत्वपूर्ण हैं। हर्षवर्धन वैश्य समाज से आते हैं और लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय हैं। हालांकि भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अभी कैंट सीट पर किसी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है, इसलिए मौजूदा समय में उनकी स्थिति को संभावित और मजबूत दावेदार के रूप में ही देखा जा रहा है।
सितंबर 2026 में जन्माष्टमी के अवसर पर उनके सोशल मीडिया पोस्टर में ‘125 बरेली कैंट विधानसभा’ का उल्लेख भी सामने आया। पोस्टर में भाजपा सरकार के तीसरी बार बनने, सेवा, सुशासन और विकास जैसे संदेशों के साथ उनका नाम कैंट विधानसभा क्षेत्र से जोड़ा गया। यह पोस्टर उस समय सामने आया जब भाजपा की नई ब्रज क्षेत्रीय टीम की घोषणा हो चुकी थी और हर्षवर्धन को उसमें उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी नहीं मिली थी।
इसके बाद पीलीभीत जिले का प्रभारी बनाया जाना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर वह पीलीभीत में संगठन को संभालने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं और दूसरी ओर बरेली कैंट में उनकी राजनीतिक सक्रियता चर्चा में है। ऐसे में पार्टी के भीतर उनकी भूमिका और 2027 के लिए उनकी संभावित चुनावी दावेदारी को अलग-अलग घटनाओं के बजाय उनके लंबे संगठनात्मक सफर की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
कैंट सीट पर भाजपा के संभावित चेहरों की चर्चा में मौजूदा विधायक संजीव अग्रवाल का नाम स्वाभाविक रूप से शामिल है। मेयर उमेश गौतम का नाम भी लंबे समय से संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में रहा है। दोनों की आपसी प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। ऐसे माहौल में हर्षवर्धन का नाम एक ऐसे संगठनात्मक चेहरे के रूप में सामने आता है, जिसने चुनाव लड़ने से ज्यादा समय पार्टी संगठन को मजबूत करने में लगाया है।
मंडल स्तर से शुरू हुई यात्रा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष, ब्रज क्षेत्र उपाध्यक्ष, विभिन्न जिलों के प्रभारी और बड़े चुनावों के प्रबंधन तक पहुंची। प्रधानमंत्री की रैलियों से लेकर लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बूथ प्रबंधन तक मिली जिम्मेदारियों ने उनके राजनीतिक अनुभव का दायरा बढ़ाया। अब पीलीभीत जिले के प्रभारी की नई जिम्मेदारी उनके खाते में जुड़ चुकी है।
यही वजह है कि बरेली कैंट में 2027 के टिकट की चर्चा के बीच हर्षवर्धन का नाम केवल एक और दावेदार के रूप में नहीं, बल्कि लंबे समय से संगठन के भरोसे पर खरे उतरते आए ऐसे चेहरे के रूप में चर्चा में है, जिसे पार्टी ने समय-समय पर अलग-अलग कठिन संगठनात्मक और चुनावी जिम्मेदारियां सौंपी हैं। अब सवाल यह है कि करीब तीन दशक की संगठन साधना के बाद भाजपा उन्हें पहली बार विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारती है या संगठन में ही कोई बड़ी जिम्मेदारी आगे भी उनके राजनीतिक सफर की दिशा तय करती है।




