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बरेली से अब तक कोई भाजपा नेता नहीं पहुंचा राज्यसभा, न इस बार जाएगा, धर्मेंद्र कश्यप और राजेश अग्रवाल से नाम 25 संभावित उम्मीदवारों के पैनल में नहीं किए गए शामिल, बड़े नामों के बीच बीएल वर्मा की वापसी पर भी संशय

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नीरज सिसौदिया, बरेली

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही बरेली भाजपा में भी राज्यसभा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिले के कुछ वरिष्ठ नेताओं को उम्मीद है कि इस बार पार्टी उन्हें संसद के उच्च सदन तक पहुंचा सकती है, लेकिन भाजपा की ओर से केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए संभावित नामों के पैनल ने फिलहाल बरेली के इन दावेदारों की उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 29 सितंबर को नामांकन शुरू हुआ है और अंतिम नाम अभी भाजपा ने घोषित नहीं किए हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश भाजपा की ओर से केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए 25 संभावित नामों की सूची सामने आ गई है, जिसमें बरेली के पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल और आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप का नाम नहीं है, जबकि बदायूं के बीएल वर्मा का नाम शामिल है।

राजेश अग्रवाल, पूर्व मंत्री

यही अंतर बरेली की मौजूदा चर्चा को दिलचस्प बना रहा है। एक तरफ राजेश अग्रवाल जैसे लंबे समय तक बरेली भाजपा की राजनीति के प्रमुख केंद्र रहे नेता का नाम राजनीतिक गलियारों में चल रहा है, दूसरी तरफ केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची संभावित सूची में उनका नाम दिखाई नहीं देता। धर्मेंद्र कश्यप को लेकर भी अटकलें हैं, लेकिन उनके लिए भी फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं दिख रहा है। इसके उलट बीएल वर्मा का नाम संभावित पैनल में होना उनकी स्थिति को बाकी दोनों नेताओं से अलग करता है।

राजेश अग्रवाल का नाम चर्चा में आने की एक वजह भाजपा के संगठन में हालिया बदलाव भी है। लंबे समय तक पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे राजेश अग्रवाल को इस बार नई राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली। उनकी जगह पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया। इससे बरेली में यह चर्चा शुरू हुई कि संगठन में जिम्मेदारी से बाहर होने के बाद पार्टी उन्हें राज्यसभा के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में कोई नई भूमिका दे सकती है।

राजेश अग्रवाल बरेली की राजनीति के उन नेताओं में रहे हैं जिनका प्रभाव विधानसभा से लेकर प्रदेश सरकार और भाजपा के केंद्रीय संगठन तक रहा है। वह बरेली और बाद में बरेली कैंट से कई बार विधायक रहे तथा योगी सरकार में वित्त मंत्री भी रहे। 2022 में उनकी जगह संजीव अग्रवाल को बरेली कैंट से भाजपा का टिकट मिला और वह चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। राजेश अग्रवाल की उम्र भी अब भाजपा के भीतर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर होने वाली चर्चाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2022 में टिकट बदलने के समय भी उनकी उम्र को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा हुई थी।

इसके बाद राजेश अग्रवाल के परिवार की राजनीतिक विरासत को लेकर भी अलग-अलग राय सामने आती रही है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि परिवार की अगली पीढ़ी उनकी राजनीतिक विरासत को उसी स्तर पर आगे नहीं बढ़ा सकी। खास तौर पर 2022 में बरेली कैंट की पारंपरिक सीट हाथ से निकलने को इस बदलाव से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, राजेश अग्रवाल के समर्थक अब भी मानते हैं कि उनकी सक्रिय राजनीति को केवल चुनावी टिकट या किसी एक पद से नहीं आंका जा सकता। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में पुराने संपर्कों के कारण राज्यसभा की चर्चा को पूरी तरह खारिज करना भी जल्दबाजी होगी।

दूसरी ओर आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप का नाम भी राज्यसभा की चर्चाओं में है। वह 2014 और 2019 में आंवला से भाजपा के लोकसभा सांसद रहे और 2024 में भी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े। हाल के समय में अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताने के बाद उनके सपा में जाने की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ा है। हालांकि, सपा में शामिल होने को लेकर उनकी ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

धर्मेंद्र कश्यप

भाजपा के भीतर चर्चा रखने वाले कुछ नेताओं का मानना है कि धर्मेंद्र कश्यप को राज्यसभा की उम्मीद हो सकती है और यही वजह है कि उन्होंने अभी तक पार्टी से दूरी नहीं बनाई है। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए 25 नामों के जिस पैनल की जानकारी सामने आई है, उसमें धर्मेंद्र कश्यप का नाम नहीं है। इसलिए फिलहाल राज्यसभा के रास्ते उन्हें भाजपा की ओर से कोई स्पष्ट संकेत मिलने की बात कहना मुश्किल है।

बीएल वर्मा को लेकर तस्वीर अलग

बीएल वर्मा का मामला यहां अलग है और इसे बरेली से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। वह बदायूं जिले से ताल्लुक रखते हैं। राज्यसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उनका स्थायी पता उझानी, बदायूं है और वह नवंबर 2020 में पहली बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।

बीएल वर्मा

वर्तमान में उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने वाले सदस्यों में शामिल है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान होना है और इनमें बीएल वर्मा की सीट भी शामिल है।

अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 29 सितंबर को एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित  रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश भाजपा द्वारा केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए 25 संभावित नामों के पैनल में बीएल वर्मा का नाम शामिल बताया गया है। उसी रिपोर्ट में स्मृति ईरानी, हरदीप सिंह पुरी, हरीश द्विवेदी, कुमार विश्वास, राजवीर सिंह, संजीव बालियान, सत्यपाल सिंह, बृजलाल और बीएल वर्मा समेत कई नामों का उल्लेख है।

इसलिए बीएल वर्मा को लेकर यह कहना कि उनका राज्यसभा का सपना टूटता दिखाई दे रहा है, फिलहाल उपलब्ध जानकारी से पुष्ट नहीं होता। हां, पैनल में नाम होना भी दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की गारंटी नहीं है। अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

बरेली से भाजपा का राज्यसभा इतिहास क्या कहता है?

यही सवाल इस पूरी चर्चा का सबसे अहम हिस्सा है। उपलब्ध संसदीय रिकॉर्ड को देखने पर बरेली जिले से भाजपा के किसी नेता के राज्यसभा सदस्य बनने का स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आता। बरेली के सबसे बड़े भाजपा नेताओं में रहे संतोष गंगवार का संसदीय सफर लोकसभा के जरिए रहा। डिजिटल संसद के रिकॉर्ड में उनका निर्वाचन क्षेत्र बरेली दर्ज है और वह आठ बार लोकसभा सदस्य रहे।

बीएल वर्मा को इस सूची में इसलिए शामिल नहीं किया जा सकता क्योंकि वह बदायूं के हैं। इसी तरह राजेश अग्रवाल विधानसभा और प्रदेश सरकार की राजनीति में बड़े पदों पर रहे, लेकिन वह भी राज्यसभा सदस्य नहीं रहे।

यानी यदि इस बार भाजपा बरेली जिले के किसी नेता को राज्यसभा भेजती है तो यह जिले की भाजपा राजनीति के लिए एक नया राजनीतिक अध्याय होगा।

सपा ने वीरपाल सिंह को भेजा था राज्यसभा

समाजवादी पार्टी के मामले में तस्वीर अलग है। बरेली के वरिष्ठ नेता वीरपाल सिंह यादव राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। वीरपाल सिंह यादव का राज्यसभा कार्यकाल 3 अप्रैल 2006 से 2 अप्रैल 2012 तक रहा।

इस तरह बरेली की राज्यसभा राजनीति का इतिहास फिलहाल एक दिलचस्प तस्वीर देता है—सपा के वीरपाल सिंह यादव राज्यसभा तक पहुंचे, जबकि बरेली से भाजपा के किसी नेता का राज्यसभा पहुंचने का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिलता। अब 2026 का चुनाव इस पुराने राजनीतिक अंतर को बदलता है या नहीं, इस पर बरेली की निगाहें टिकी हैं।

फिलहाल तस्वीर इतनी ही साफ है कि राजेश अग्रवाल और धर्मेंद्र कश्यप के नाम राजनीतिक चर्चा में जरूर हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए 25 नामों के सामने आए पैनल में दोनों के नाम नहीं हैं। दूसरी तरफ बीएल वर्मा का नाम पैनल में है, लेकिन वह बरेली नहीं बल्कि बदायूं के नेता हैं। अंतिम उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही यह तय होगा कि भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किन चेहरों के जरिए राज्यसभा का नया समीकरण बनाती है।

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