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ये तो राजेश अग्रवाल ही कर सकते हैं, संघ के स्कूल में पहुंचे सपा नेता और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी, कराया शिक्षक-बेटियों का सम्मान, पढ़ें कैसे भेद रहे हैं भाजपा का किला?

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नीरज सिसौदिया, बरेली

राजनीति में कुछ तस्वीरें सिर्फ एक कार्यक्रम की तस्वीरें नहीं होतीं, बल्कि अपने पीछे एक लंबी राजनीतिक यात्रा और सामाजिक स्वीकार्यता का संदेश भी छोड़ जाती हैं। बरेली कैंट विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट के दावेदार राजेश अग्रवाल का संत रविदास सरस्वती शिशु मंदिर, भीम नगर गंगापुर में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित कराना ऐसी ही तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विद्या भारती के स्कूल में पहुंचकर शिक्षकों और बेटियों का सम्मान करना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आम तौर पर समाजवादी पार्टी के नेताओं की ऐसे संस्थानों में राजनीतिक-सामाजिक मौजूदगी सहज नहीं मानी जाती।

राजेश अग्रवाल यहां केवल पहुंचे ही नहीं, बल्कि शिक्षकों और बेटियों के सम्मान का आयोजन भी किया। कार्यक्रम के बाद उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य सुखनंदन प्रसाद और उप प्रधानाचार्य राज किशोर के साथ विद्यालय के पूरे स्टाफ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह विद्यालय आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा का माध्यम है और ऐसे संस्थान में शिक्षकों तथा बेटियों का सम्मान उनके लिए महत्वपूर्ण है।

राजेश अग्रवाल के इस कार्यक्रम को उनकी पिछले कई सप्ताह से चल रही शिक्षक सम्मान मुहिम की अगली कड़ी के तौर पर भी देखा जा रहा है। वह एक दिन के औपचारिक शिक्षक सम्मान कार्यक्रम तक सीमित रहने के बजाय कैंट विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग स्कूलों तक पहुंचकर शिक्षकों से संवाद और सम्मान का अभियान चला चुके हैं। अब संघ से जुड़े विद्यालय में पहुंचकर कार्यक्रम करना इस अभियान को एक अलग राजनीतिक-सामाजिक आयाम देता दिखाई दे रहा है।

राजेश अग्रवाल बरेली शहर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी रह चुके हैं और वर्तमान में नगर निगम के पार्षद हैं। वह आगामी विधानसभा चुनाव में बरेली कैंट सीट से सपा टिकट के दावेदारों में शामिल हैं। कैंट से टिकट के लिए डॉक्टर अनीस बेग, इंजीनियर अनीस अहमद खां समेत कई अन्य नाम भी चर्चा में हैं। ऐसे में प्रत्येक दावेदार अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक संपर्कों को मजबूत करने में जुटा है। इसी प्रतिस्पर्धा के बीच संघ से जुड़े विद्यालय में राजेश अग्रवाल की पहुंच को उनके समर्थक उनकी व्यक्तिगत स्वीकार्यता और लंबे सामाजिक संपर्कों का परिणाम बता रहे हैं।

राजेश अग्रवाल की राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह खुद को केवल पार्टी के पारंपरिक राजनीतिक दायरे तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग सामाजिक वर्गों और संस्थाओं के बीच सक्रिय उपस्थिति बनाने की कोशिश करते रहे हैं। उनके समर्थकों के अनुसार, करीब तीन दशक से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण उनके व्यक्तिगत संबंधों का दायरा पार्टी की सीमाओं से बाहर तक फैला हुआ है। संत रविदास सरस्वती शिशु मंदिर में हुआ कार्यक्रम इसी दावे को सार्वजनिक रूप से सामने लाने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है।

खास बात यह भी रही कि कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों के साथ बेटियों का भी सम्मान किया गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का माध्यम बने इस विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का संदेश केवल सम्मान तक सीमित नहीं रहा। इसके जरिए राजेश अग्रवाल ने उस सामाजिक तबके तक पहुंच बनाने की कोशिश की, जो किसी भी विधानसभा क्षेत्र की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम में राजेश अग्रवाल के साथ दिनेश यादव, रागिनी अग्रवाल, महेंद्र विक्रम, अरविंद राजपूत और पंकज मुखिया भी मौजूद रहे। राजेश अग्रवाल ने विद्यालय के प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य और स्टाफ के प्रति विशेष आभार जताते हुए कहा कि विद्यालय परिवार ने उनका सुंदर स्वागत किया।

कैंट की राजनीति के लिहाज से देखें तो यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां मुकाबला केवल पार्टी के टिकट तक सीमित नहीं है। टिकट के दावेदारों के सामने अपनी व्यक्तिगत पहचान, संगठनात्मक सक्रियता और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच स्वीकार्यता साबित करने की चुनौती भी है। राजेश अग्रवाल का संघ से जुड़े विद्यालय में पहुंचना इसी व्यापक राजनीतिक कवायद में एक अलग तरह का संकेत देता है।

समाजवादी पार्टी के भीतर कैंट सीट के संभावित दावेदारों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। डॉक्टर अनीस बेग पार्टी के मेडिकल सेल से जुड़े होने के साथ लंबे समय से अपने सामाजिक अभियानों के जरिए सक्रिय हैं। इंजीनियर अनीस अहमद खां भी पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ में अपनी भूमिका के साथ क्षेत्र में संपर्क अभियान चला रहे हैं। ऐसे में राजेश अग्रवाल का अलग-अलग सामाजिक और संस्थागत दायरों में पहुंच बनाने का तरीका उन्हें बाकी दावेदारों से अलग राजनीतिक पहचान देने की कोशिश करता दिखाई देता है।

यही वजह है कि संत रविदास सरस्वती शिशु मंदिर में हुआ यह आयोजन राजेश अग्रवाल के लिए महज शिक्षक सम्मान समारोह नहीं माना जा रहा। यह उस राजनीति का प्रदर्शन भी है जिसमें किसी नेता की पहुंच को पार्टी की विचारधारा की सीमाओं से बाहर सामाजिक रिश्तों के स्तर पर परखा जाता है। संघ से जुड़े विद्यालय में समाजवादी पार्टी के एक संभावित प्रत्याशी का इतना बड़ा आयोजन कर पाना निश्चित तौर पर राजनीतिक चर्चा का विषय बना है।

राजेश अग्रवाल के समर्थक इसे उनकी तीन दशक लंबी सामाजिक सक्रियता का परिणाम बता रहे हैं। उनका तर्क है कि किसी राजनीतिक दल के नेता के लिए ऐसे संस्थान में पहुंच बनाना तभी संभव होता है जब व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान और सामाजिक रिश्ते पार्टी की पहचान से आगे जाकर भी काम करते हों। हालांकि इस एक कार्यक्रम से चुनावी परिणाम का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है, लेकिन कैंट की टिकट की दौड़ में यह घटनाक्रम राजेश अग्रवाल की राजनीतिक रणनीति और पहुंच का एक नया उदाहरण जरूर सामने रखता है।

यानी कैंट की सियासत में राजेश अग्रवाल का यह कदम साफ तौर पर यह संदेश देता है कि वह केवल सपा के पारंपरिक समर्थक वर्ग तक अपनी पहुंच सीमित नहीं रखना चाहते। शिक्षक सम्मान से लेकर अलग-अलग सामाजिक समूहों तक संपर्क और अब संघ से जुड़े विद्यालय में आयोजन—राजेश अग्रवाल अपनी राजनीति का दायरा कितना बड़ा रखना चाहते हैं, इसकी एक झलक इस कार्यक्रम में दिखाई देती है।

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