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भाजपा से राज्यसभा का टिकट पाने वाली प्रियंका रावत का बरेली से रहा है गहरा नाता,  जाटवपुरा में रहते थे प्रियंका की नानी के पिता और दलित नेता चौधरी दीनदयाल सरन, भुता के बीडीओ रह चुके हैं प्रियंका के पिता, पढ़ें प्रियंका रावत का पूरा बरेली कनेक्शन

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नीरज सिसौदिया, बरेली

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इनमें पूर्व सांसद और भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका सिंह रावत का नाम भी शामिल है। प्रियंका सिंह रावत की राजनीतिक पहचान भले ही बाराबंकी से बनी, लेकिन उनके जीवन की जड़ें बरेली से गहराई से जुड़ी हैं। उनका जन्म बरेली में हुआ, उच्च शिक्षा भी यहीं से हासिल की और उनके नाना रूकुम सिंह बरेली के जाटवपुरा में रहते थे। वहीं प्रियंका के पिता फरीदपुर तहसील के भुता ब्लॉक के बीडीओ भी रह चुके हैं।

प्रियंका सिंह रावत की बरेली से जुड़ी कहानी केवल जन्म और शिक्षा तक सीमित नहीं है। उनके नाना रूकुम सिंह उप निबंधक रहे और जाटवपुरा में रहते थे। उनकी नानी फूलमती बरेली के पुराने चर्चित दलित जाटव नेता चौधरी दीन दयाल सरन की बेटी थीं। इस तरह प्रियंका का ननिहाल बरेली के पुराने जाटव सामाजिक और राजनीतिक परिवेश से जुड़ा रहा है।

उनके पिता उत्तम राम सिंह सेवानिवृत्त जिला विकास अधिकारी हैं और मां प्रभा सिंह हैं। परिवार की एक तरफ प्रशासनिक सेवा की पृष्ठभूमि रही तो दूसरी तरफ बरेली के पुराने दलित-जाटव सामाजिक नेतृत्व से रिश्ता रहा। यही वजह है कि प्रियंका सिंह रावत का बरेली कनेक्शन सिर्फ जन्मस्थली का नहीं बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जुड़ाव का भी है।

प्रियंका ने अपनी उच्च शिक्षा महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय से हासिल की। उन्होंने राजनीति विज्ञान में एमए किया और बाद में मास कम्युनिकेशन एवं इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। 2014 में लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचने के बाद राष्ट्रीय मीडिया ने भी उनके बरेली में जन्म और उनके पिता के सेवानिवृत्त PCS अधिकारी होने का उल्लेख किया था।

हालांकि प्रियंका की राष्ट्रीय राजनीतिक पहचान बाराबंकी से बनी। उन्होंने जून 2013 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें बाराबंकी सुरक्षित सीट से उम्मीदवार बनाया। पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ते हुए उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन सांसद पीएल पुनिया को 2,11,878 वोटों के बड़े अंतर से हराया। प्रियंका को 4,54,214 वोट मिले, जबकि पुनिया को 2,42,336 वोट मिले।

इस जीत ने प्रियंका को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित कर दिया। वह 16वीं लोकसभा में बाराबंकी से भाजपा सांसद बनीं। संसद में उन्होंने विभिन्न समितियों में काम किया। PRS India के अनुसार 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 83 प्रतिशत रही और उन्होंने 34 बहसों में हिस्सा लिया।

प्रियंका सिंह रावत की पारिवारिक पृष्ठभूमि का एक और सिरा प्रशासनिक सेवा से जुड़ता है। उनकी शादी आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रघुनाथ रावत से हुई। रघुनाथ रावत इससे पहले शाहजहांपुर में जिला समाज कल्याण अधिकारी भी रहे। प्रियंका के मौसा धर्मवीर सिंह समाज कल्याण विभाग में रहे। धर्मवीर सिंह की बेटी मीनाक्षी सिंह वर्तमान में खुर्जा से भाजपा विधायक हैं।

प्रियंका के राजनीतिक सफर में 2013-14 का दौर निर्णायक रहा। उनके पति की नागपुर में तैनाती के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों से संपर्क बना और इसी दौर में भाजपा संगठन के साथ उनकी सक्रियता बढ़ी। इसके बाद भाजपा ने उन्हें बाराबंकी से टिकट दिया और वह पहली ही कोशिश में लोकसभा पहुंच गईं।

2019 में भाजपा ने बाराबंकी से उपेंद्र सिंह रावत को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद प्रियंका सिंह रावत ने संगठन में अपनी सक्रियता जारी रखी और भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। अब पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाकर उनके राजनीतिक सफर को नया विस्तार दिया है।

प्रियंका सिंह रावत के राज्यसभा उम्मीदवार बनने के साथ बरेली में उनके पुराने पारिवारिक रिश्ते फिर चर्चा में हैं। जाटवपुरा में रहने वाले नाना रूकुम सिंह, बरेली के पुराने जाटव नेता चौधरी दीन दयाल सरन से जुड़ा ननिहाल, बरेली में जन्म और रुहेलखंड विश्वविद्यालय से शिक्षा—ये सभी कड़ियां उनके जीवन में बरेली की भूमिका को खास बनाती हैं।

बाराबंकी ने प्रियंका को चुनावी पहचान दी, भाजपा संगठन ने उन्हें प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारी दी और अब राज्यसभा की उम्मीदवारी उन्हें उच्च सदन तक ले जाने वाली है। लेकिन इस पूरे सफर की शुरुआती कड़ी बरेली से जुड़ी है। जाटवपुरा से शुरू हुआ पारिवारिक रिश्ता अब राज्यसभा तक पहुंचने जा रहा है।

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