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 बेग परिवार में किसके सिर सजेगा सियासी ताज, सुल्तान बेग या डॉ. अनीस बेग? भोजीपुरा और कैंट की दावेदारी ने बढ़ाई सपा की उलझन, अखिलेश यादव के रामपुर दौरे के बाद बेग परिवार के टिकट पर निगाहें, एक ही जिले में दो भाइयों को मौका मिलने की संभावना पर सवाल; सुल्तान का लंबा राजनीतिक अनुभव बनाम अनीस की नई सियासी जमीन

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नीरज सिसौदिया, बरेली

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के साथ बरेली की सियासत में टिकटों को लेकर नई सरगर्मी दिखाई देने लगी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रामपुर दौरे के बाद बेग परिवार की राजनीतिक भूमिका और भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि मीरगंज के पूर्व विधायक सुल्तान बेग को भोजीपुरा से टिकट मिलेगा या डॉ. अनीस बेग बरेली कैंट से अपनी चुनावी पारी शुरू करेंगे। असली सवाल यह है कि समाजवादी पार्टी एक ही परिवार के दो दावेदारों के बीच फैसला कैसे करेगी और अगर दोनों में से किसी एक को ही मौका मिला तो दूसरा क्या रुख अपनाएगा?

सुल्तान बेग और उनके छोटे भाई डॉ. अनीस बेग, दोनों अपनी-अपनी विधानसभा सीटों पर राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटे हैं। सुल्तान बेग के पास विधायक रहने का अनुभव, लंबा राजनीतिक सफर और वरिष्ठ सपा नेता आजम खां से नजदीकी जैसे पहलू हैं। दूसरी ओर, डॉ. अनीस बेग पिछले दो विधानसभा चुनावों के दौरान की गई राजनीतिक मेहनत और समाजसेवा के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह बेग परिवार के भीतर एक तरफ पुराना राजनीतिक अनुभव है तो दूसरी तरफ नए चेहरे को आगे बढ़ाने की संभावना।

## तीन चुनावी हार के बाद सुल्तान बेग के सामने नई चुनौती

सुल्तान बेग के लिए भोजीपुरा की दावेदारी केवल सीट बदलने का मामला नहीं है। यह उनके राजनीतिक भविष्य से जुड़ा सवाल भी बन गई है। मीरगंज की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद अब नई विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की उनकी तैयारी के सामने कई चुनौतियां हैं। लगातार तीन चुनावी हार उनके राजनीतिक सफर का ऐसा पहलू है, जिसे टिकट के फैसले के दौरान नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

बरेली के कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मीरगंज से बाहर निकलकर भोजीपुरा में अपनी पकड़ बनाना सुल्तान बेग के लिए आसान नहीं होगा। जिस क्षेत्र में उन्होंने लंबे समय तक राजनीति की, वहां के मतदाताओं, स्थानीय समीकरणों और संगठन के साथ उनका पुराना जुड़ाव रहा है। नई सीट पर उन्हें नए सिरे से राजनीतिक संपर्क और समर्थन जुटाना होगा।

आजम खां के साथ सुल्तान बेग।

भोजीपुरा में मौजूदा विधायक शहजिल इस्लाम की मौजूदगी भी इस समीकरण को जटिल बनाती है। ऐसे में सुल्तान बेग को टिकट मिलने की स्थिति में पार्टी के भीतर सहमति, स्थानीय नेतृत्व की भूमिका और मौजूदा विधायक से जुड़े राजनीतिक समीकरण अहम हो सकते हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सपा भोजीपुरा में उम्मीदवार को लेकर क्या रणनीति अपनाएगी।

सुल्तान बेग के पक्ष में उनका राजनीतिक अनुभव और वरिष्ठ नेताओं से संबंध गिनाए जा रहे हैं। उनके समर्थकों को उम्मीद है कि पार्टी नेतृत्व इन पहलुओं को महत्व देगा। कुछ स्थानीय नेताओं का दावा है कि आजम खां की पैरवी उनके लिए मददगार हो सकती है। लेकिन अंतिम फैसला अखिलेश यादव और पार्टी नेतृत्व को ही करना है।

डॉ. अनीस बेग

डॉ. अनीस बेग के लिए कैंट में मौका बनाने की चुनौती

दूसरी ओर, डॉ. अनीस बेग बरेली कैंट विधानसभा सीट से चुनावी राजनीति में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनाव लड़ने के अनुभव की कमी है, लेकिन उनके समर्थक इसे नए चेहरे के रूप में उनकी संभावना से जोड़कर देखते हैं। उनका कहना है कि पिछले दो विधानसभा चुनावों के दौरान क्षेत्र में किए गए काम और लोगों के बीच लगातार संपर्क ने अनीस बेग को अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर दिया है।

अनीस बेग की दावेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वह पहले अपने बड़े भाई सुल्तान बेग के राजनीतिक हित में पीछे हट चुके हैं। बताया जाता है कि पिछले चुनावों में उन्होंने सुल्तान बेग के लिए अपना चुनाव चिह्न वापस कर दिया था। अब उनके समर्थक इसे परिवार के भीतर त्याग और राजनीतिक अवसर के सवाल से जोड़कर देख रहे हैं। उनके मुताबिक, यदि अनीस बेग को टिकट मिलता है तो उन्हें अपनी मेहनत को चुनावी मुकाबले में बदलने का अवसर मिलेगा।

हालांकि, समाजसेवा और जनसंपर्क अपने आप में चुनावी जीत की गारंटी नहीं हैं। कैंट में उम्मीदवार का चयन करते समय सपा को स्थानीय संगठन, मतदाताओं के समीकरण, दूसरे दावेदारों और भाजपा के मुकाबले की स्थिति जैसे पहलुओं पर भी विचार करना होगा। अनीस बेग के सामने अपनी दावेदारी को पार्टी नेतृत्व के सामने प्रभावी ढंग से रखने के साथ-साथ यह साबित करने की चुनौती भी है कि उनकी स्थानीय सक्रियता चुनावी अभियान में तब्दील हो सकती है।

एक जिले में दो टिकट, सपा के सामने संगठनात्मक सवाल

बेग परिवार के टिकट विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि क्या सपा एक ही जिले में एक परिवार के दो सदस्यों को अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ाने का जोखिम उठाएगी? बरेली के कुछ वरिष्ठ समाजवादी नेताओं का मानना है कि पार्टी ऐसा करने से बच सकती है। उनके मुताबिक, जिले में पहले से ही कई नेता टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में एक ही परिवार को दो सीटें देने से दूसरे दावेदारों की नाराजगी बढ़ सकती है और संगठन के भीतर असंतोष पैदा हो सकता है।

सुल्तान बेग

इस दलील के उलट, दोनों भाइयों के समर्थकों की अपनी-अपनी अपेक्षाएं हैं। सुल्तान बेग के समर्थक उनके अनुभव और पुराने राजनीतिक संबंधों को आधार बना रहे हैं, जबकि अनीस बेग के समर्थक क्षेत्र में उनकी हालिया सक्रियता और नए नेतृत्व की संभावना पर जोर दे रहे हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती केवल एक उम्मीदवार चुनने की नहीं, बल्कि दूसरे दावेदार और उसके समर्थकों को साथ बनाए रखने की भी होगी।

राजनीतिक सूत्रों के हवाले से यह चर्चा भी है कि अखिलेश यादव दोनों भाइयों से अपनी स्थिति आपस में स्पष्ट करने को कह चुके हैं। हालांकि, इस बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल दोनों में से किसी ने भी सार्वजनिक रूप से पीछे हटने का फैसला नहीं किया है। बताया जाता है कि सुल्तान बेग अपने समर्थकों के बीच चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं। यदि वह सपा से टिकट नहीं मिलने की स्थिति में किसी दूसरे विकल्प पर विचार करते हैं, तो पार्टी के लिए यह एक अलग राजनीतिक चुनौती बन सकती है। लेकिन उनके अगले कदम को लेकर अभी कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।

फैसला दीपावली के बाद, तब तक जारी रहेगा सियासी इंतजार

फिलहाल बेग परिवार की दावेदारी का अंतिम फैसला होना बाकी है। दीपावली के बाद टिकटों को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद जताई जा रही है। तब तक भोजीपुरा और कैंट की सीटों पर सुल्तान बेग तथा डॉ. अनीस बेग की दावेदारी को लेकर चर्चाएं जारी रहेंगी।

सपा के लिए यह मामला परिवार के दो सदस्यों में से किसी एक को चुनने भर का नहीं है। उसे यह भी देखना होगा कि किस सीट पर किस तरह का उम्मीदवार संगठन और स्थानीय समीकरणों के लिहाज से उपयुक्त बैठता है और टिकट न मिलने वाले दावेदार को किस तरह साथ रखा जा सकता है। सुल्तान बेग का राजनीतिक अनुभव और अनीस बेग की हालिया सक्रियता, दोनों अलग-अलग आधार पर पार्टी के सामने मौजूद हैं।

आखिरकार, बेग परिवार से अगला विधायक कौन होगा—सुल्तान बेग, डॉ. अनीस बेग या फिर टिकट का समीकरण किसी और दिशा में जाएगा? इसका जवाब पार्टी नेतृत्व के फैसले से ही मिलेगा। फिलहाल इतना तय है कि दोनों भाइयों की दावेदारी ने बरेली में सपा के टिकट समीकरण को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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