नीरज सिसौदिया, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बरेली की सियासत में नया मोड़ आ गया है। आंवला से भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप मंगलवार को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में उन्हें सदस्यता दिलाई। धर्मेंद्र कश्यप के पाला बदलने से बरेली जिले में सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, कश्यप समुदाय से आने वाली सपा नेता कीर्ति कश्यप की राजनीतिक भूमिका और जिले में पार्टी की रणनीति पर भी निगाहें रहेंगी।
धर्मेंद्र कश्यप 2014 और 2019 में आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। मई 2013 में सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए धर्मेंद्र कश्यप अब फिर सपा में लौट आए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, उन्हें राज्यसभा का टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन भाजपा ने बरेली जिले से धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया। दोनों निर्विरोध निर्वाचित हो गए। इसके बाद धर्मेंद्र कश्यप के सपा में लौटने की अटकलें तेज हुई थीं। सात अक्टूबर को उनकी ओर से समुद्र किनारे सूर्यास्त की तस्वीर के साथ ‘टाटा बाय-बाय’ लिखे जाने को भी इन अटकलों से जोड़कर देखा गया था।

सपा में शामिल होने के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और बुलडोजर की कार्रवाई में गरीबों को निशाना बनाया जाता है। अखिलेश यादव ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से पार्टी मजबूत होगी।
कीर्ति कश्यप की भूमिका पर भी निगाहें
धर्मेंद्र कश्यप की सपा में वापसी के बाद बरेली में कश्यप समाज की राजनीति को लेकर भी चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। कीर्ति कश्यप जिले में सपा की राजनीति से जुड़ा नाम हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर सामाजिक प्रतिनिधित्व, संगठनात्मक जिम्मेदारियों और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति के संदर्भ में दोनों नेताओं की भूमिका पर नजर रहेगी। हालांकि, धर्मेंद्र कश्यप के पार्टी में आने से कीर्ति कश्यप की राजनीतिक भूमिका में किसी बदलाव को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

अखिलेश ने मतदाता सूची पर उठाए सवाल
धर्मेंद्र कश्यप के सपा में शामिल होने के दौरान अखिलेश यादव ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी भाजपा और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने मतदाता सूची को आधार से जोड़ने और बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था लागू करने की मांग की।
अखिलेश ने विधान परिषद चुनावों की मतगणना के दौरान मतपेटियों में बिना मुड़े मतपत्र मिलने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है और विपक्ष को चुनावी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखनी होगी।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले धर्मेंद्र कश्यप की वापसी और अखिलेश यादव की मतदाता सूची को लेकर उठाई गई मांगों ने बरेली सहित प्रदेश की सियासत में नए मुद्दे जोड़ दिए हैं।




