नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बरेली कैंट विधानसभा सीट पर कांग्रेस की गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। पार्टी के दिग्गज नेता और कैंट से टिकट के प्रमुख दावेदार नवाब मुजाहिद हसन खां ने दशहरा और दीपावली की शुभकामनाओं वाले होर्डिंग, बैनर और पोस्टर लगाकर क्षेत्र में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है। शहर के हिंदू बहुल इलाकों में बड़ी संख्या में लगाए गए इन प्रचार माध्यमों को उनकी चुनावी तैयारी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस की रणनीति पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

नवाब मुजाहिद हसन खां के शुभकामना संदेश कैंट विधानसभा क्षेत्र के कई प्रमुख इलाकों में नजर आ रहे हैं। बियावानी कोठी, खुर्रम गौटिया, श्यामगंज रोड, कालीबाड़ी, सिकलापुर, बीकानेर चौराहा, सरन हॉस्पिटल रोड, सुभाष नगर, वीर भट्टी, सिटी स्टेशन रोड, चौपुला रोड, कुतुबखाना, बिहारीपुर, करोलान और दरगाह आला हजरत समेत विभिन्न स्थानों पर 500 से अधिक होर्डिंग, बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं। इन पर कैंट विधानसभा क्षेत्र के निवासियों को दशहरा और दीपावली की शुभकामनाएं दी गई हैं।

राजनीतिक नजरिये से इन संदेशों का महत्व केवल त्योहारों की बधाई तक सीमित नहीं माना जा रहा। चुनाव से कुछ माह पहले क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में प्रचार सामग्री लगाना मतदाताओं के बीच पहचान बनाए रखने और अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाने का तरीका भी है। खास बात यह है कि होर्डिंग ऐसे इलाकों में लगाए गए हैं, जहां कांग्रेस को अपनी उपस्थिति बढ़ाने की जरूरत महसूस हो सकती है। हालांकि, इन संदेशों से किसी खास समुदाय के मतदाताओं के रुझान या चुनावी समर्थन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता लेकिन नवाब मुजाहिद वर्ष 2017 में जब गठबंधन प्रत्याशी थे तब भी उनका पूरा फोकस इन्हीं इलाकों पर था। बरेली कैंट विधानसभा सीट का सबसे बड़ा मुस्लिम चेहरा होने के नाते उनकी दावेदारी भी सबसे मजबूत नजर आ रही है। वह ऐसे मुस्लिम नेता हैं जिन्हें इन हिन्दू बाहुल्य इलाकों से भी काफी वोट मिला था। ऐसे में इस बार अगर उन्हें इन इलाकों का वोट मिल जाता है तो उनकी जीत की राह आसान हो सकती है।

नवाब मुजाहिद हसन खां के समर्थकों के बीच इन होर्डिंग को चुनावी तैयारी के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। शुभकामना संदेशों के जरिए उन्होंने कैंट के विभिन्न इलाकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। यह गतिविधि ऐसे समय सामने आई है, जब कांग्रेस और सपा के बीच संभावित गठबंधन की शर्तों पर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं।
हालांकि, होर्डिंग की संख्या या क्षेत्र में उनकी मौजूदगी अपने आप में टिकट मिलने का प्रमाण नहीं है। कांग्रेस नेतृत्व का फैसला, सपा के साथ बातचीत और पार्टी की चुनावी रणनीति आगे की दिशा तय करेंगे। फिलहाल इतना जरूर है कि नवाब मुजाहिद हसन खां की प्रचार गतिविधियों ने बरेली कैंट सीट पर कांग्रेस की तैयारियों और गठबंधन में सीटों की हिस्सेदारी को लेकर राजनीतिक चर्चा को नया आधार दे दिया है।

175 सीटों की सूची के बाद बढ़ी हलचल
नवाब मुजाहिद हसन खां के इन प्रचार संदेशों को कांग्रेस की सीट संबंधी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र गौतम के उस बयान के बाद यह गतिविधि चर्चा में आई, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को उन 175 विधानसभा सीटों की सूची भेजने की बात कही थी, जिन पर कांग्रेस चुनाव लड़ना चाहती है। इस सूची में बरेली जिले की बरेली शहर, बरेली कैंट, मीरगंज और आंवला विधानसभा सीटें शामिल बताई गई हैं।
इस घटनाक्रम से जिले में कांग्रेस की चुनावी प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा तेज हुई है। बरेली शहर में पूर्व प्रत्याशी प्रेम प्रकाश अग्रवाल और कैंट में नवाब मुजाहिद हसन खां जैसे पुराने राजनीतिक चेहरे पार्टी के पास हैं। दूसरी ओर, मीरगंज और आंवला में कांग्रेस के संभावित प्रत्याशियों को लेकर तस्वीर फिलहाल उतनी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में जिले की चारों सीटों पर दावा करने और गठबंधन वार्ता में अपनी स्थिति मजबूत रखने की रणनीति पार्टी के लिए अहम हो सकती है।

शहर और कैंट पर क्यों रहेगा जोर?
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे की बातचीत में बरेली शहर और कैंट का सवाल महत्वपूर्ण हो सकता है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के बावजूद इन दोनों सीटों पर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते पार्टी के स्थानीय नेताओं की नजर इन सीटों पर बनी हुई है।

कांग्रेस के सामने चुनौती यह होगी कि वह अपनी सूची में शामिल सीटों पर दावे को संगठनात्मक तैयारी और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के साथ किस तरह पेश करती है। वहीं, समाजवादी पार्टी के लिए भी गठबंधन में सीटों का बंटवारा करते समय अपने संगठन, पिछले चुनावी प्रदर्शन और स्थानीय नेताओं की दावेदारी के बीच संतुलन बनाना अहम होगा।




