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ओटीएस में ब्याज माफी पर बरेली नगर निगम की दोहरी नीति, राजेश अग्रवाल ने उठाए सवाल, कहा- लखनऊ में पूरा ब्याज माफ कर रहा नगर निगम तो बरेली में क्यों नहीं, सभी करदाताओं को मिलनी चाहिए समान राहत, पढ़ें प्रेस वार्ता में क्या-क्या बोले वरिष्ठ सपा पार्षद और पूर्व प्रत्याशी राजेश अग्रवाल

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नीरज सिसौदिया, बरेली

नगर निगम की वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना के तहत करदाताओं को दी जा रही ब्याज माफी को लेकर बरेली में सवाल उठने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ पार्षद और बरेली कैंट विधानसभा सीट से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार राजेश अग्रवाल ने नगर निगम पर ओटीएस योजना लागू करने में दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लखनऊ नगर निगम में ओटीएस के तहत करदाताओं का पूरा ब्याज माफ किया जा रहा है, जबकि बरेली में अलग-अलग करदाताओं को अलग-अलग अवधि का ब्याज माफ किया जा रहा है। किसी को केवल तीन साल की ब्याज माफी मिल रही है तो किसी को वर्ष 2014 से ब्याज में छूट दी जा रही है। उन्होंने मांग की है कि बरेली में भी ओटीएस का लाभ लेने वाले सभी करदाताओं का पूरा ब्याज माफ किया जाए।
शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में राजेश अग्रवाल ने कहा कि ओटीएस योजना का उद्देश्य बकाया गृहकर और अन्य करों की वसूली को आसान बनाना तथा करदाताओं को राहत देना है। इस योजना के तहत एकमुश्त मूलधन जमा करने पर ब्याज में छूट दी जाती है। लेकिन जब एक ही योजना के तहत अलग-अलग करदाताओं को अलग-अलग अवधि का ब्याज माफ किया जाएगा तो समानता का सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है।
उन्होंने लखनऊ और बरेली नगर निगम की व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि लखनऊ में जिस समय से किसी करदाता ने अपना असेसमेंट कराया है, उसी समय से उसके खाते में जुड़ा पूरा ब्याज माफ किया जा रहा है। यानी करदाता के असेसमेंट के बाद जितने समय का ब्याज बकाया हुआ है, उसे ओटीएस के तहत पूरी तरह माफ किया जा रहा है। इसके विपरीत बरेली नगर निगम में ब्याज माफी की कोई एक समान व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है।

किसी को तीन साल की राहत तो किसी को 2014 से छूट

राजेश अग्रवाल ने सवाल उठाया कि आखिर बरेली में ब्याज माफी का आधार क्या तय किया गया है। यदि लखनऊ नगर निगम में सभी पात्र करदाताओं को असेसमेंट के समय से पूरा ब्याज माफ किया जा सकता है तो बरेली में ऐसा क्यों नहीं हो रहा है? यहां किसी करदाता को तीन साल का ब्याज माफ किया जा रहा है तो किसी को वर्ष 2014 से ब्याज माफी का लाभ दिया जा रहा है। ऐसे में करदाताओं के बीच असमानता की स्थिति पैदा हो रही है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम की किसी भी कर राहत योजना में सभी पात्र लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए। योजना का लाभ लेने वाले करदाताओं के लिए नियम स्पष्ट और समान होने चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को अधिक अवधि का ब्याज माफ किया जा रहा है और दूसरे व्यक्ति को कम अवधि का लाभ मिल रहा है तो इससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठेंगे। नगर निगम प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अलग-अलग करदाताओं के लिए ब्याज माफी की अवधि तय करने का आधार क्या है।

समान नियम लागू करने की मांग
सपा पार्षद ने कहा कि बरेली के करदाता भी नगर निगम को राजस्व देते हैं। ऐसे में उन्हें लखनऊ के करदाताओं के मुकाबले कम राहत क्यों मिले? यदि शासन की ओर से ओटीएस योजना का उद्देश्य बकायेदारों को राहत देकर राजस्व वसूली बढ़ाना है तो इसका लाभ सभी पात्र करदाताओं को समान रूप से मिलना चाहिए। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मांग की कि ओटीएस के तहत बरेली में भी असेसमेंट की तारीख से अब तक का पूरा ब्याज माफ किया जाए।
राजेश अग्रवाल का कहना है कि ब्याज का बोझ बढ़ने के कारण कई करदाता अपना बकाया जमा नहीं कर पाते। मूलधन के साथ वर्षों का ब्याज जुड़ने से कुल देनदारी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में यदि ब्याज माफ कर दिया जाए तो करदाताओं को एकमुश्त भुगतान करने में आसानी होगी और नगर निगम को भी बकाया राजस्व की वसूली में मदद मिलेगी। इससे उन लोगों को भी राहत मिल सकती है जो लंबे समय से अपने बकाया कर का भुगतान करना चाहते हैं, लेकिन ब्याज की अधिक राशि के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।

चुनावी मुद्दे के साथ नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी नजर
कैंट विधानसभा सीट से सपा के टिकट के दावेदार राजेश अग्रवाल ने इस मुद्दे को उठाकर नगर निगम की कर व्यवस्था और आम करदाताओं को मिलने वाली राहत को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर नगर निगम बकाया कर की वसूली के लिए ओटीएस जैसी योजनाएं चला रहा है, वहीं दूसरी ओर ब्याज माफी की अवधि को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासन के सामने चुनौती बन सकते हैं।
अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन लखनऊ और बरेली की व्यवस्था में अंतर को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या बरेली के सभी पात्र करदाताओं को एक समान ब्याज माफी देने की मांग पर कोई निर्णय लिया जाता है। फिलहाल राजेश अग्रवाल ने इस मुद्दे पर नगर निगम से स्पष्ट नीति बनाने और सभी करदाताओं को समान राहत देने की मांग की है।

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