नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान तथा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दोनों की रिहाई के लिए अदालत से आदेश जारी होने के बाद रामपुर जेल में हलचल तेज हो गई है। दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहाई की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। अदालत में जमानत की शर्तें पूरी करने के बाद रिहाई परवाने जारी किए गए हैं। अब जेल प्रशासन की ओर से दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी किए जाने के बाद दोनों के बाहर आने का रास्ता बनेगा।
करीब एक साल से जेल में बंद आजम खान और अब्दुल्ला आजम की रिहाई को समाजवादी पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। रामपुर की राजनीति में आजम खान का प्रभाव रहा है। ऐसे में उनकी रिहाई से जिले के साथ-साथ प्रदेश की सियासत में भी नई हलचल पैदा होने की संभावना है।
दो पैन कार्ड मामले में मिली थी बड़ी राहत
आजम खान और अब्दुल्ला आजम को 29 अक्तूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दो पैन कार्ड मामले में जमानत मिली थी। दोनों को रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने 17 नवंबर 2025 को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। बाद में अपील पर आजम खान की सजा दस साल कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर कर ली, हालांकि दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
जमानत के लिए अदालत ने आर्थिक और जमानती संबंधी शर्तें भी रखी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, आजम खान की ओर से 3.50 लाख रुपये और अब्दुल्ला आजम की ओर से 2.75 लाख रुपये जमा कराए गए। इसमें जुर्माने की आधी रकम और जमानतियों की राशि शामिल है। इसके बाद रामपुर की एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों के रिहाई परवाने जारी किए।
52 और 41 मुकदमों का भी था कानूनी पेंच
आजम खान की रिहाई में सबसे बड़ी अड़चन उनके खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमे थे। जेल में रहते हुए उन्होंने कई मामलों में पहले मिली जमानतें निरस्त करा दी थीं। इसलिए हाईकोर्ट से नई जमानत मिलने के बाद उन मामलों में भी दोबारा रिहाई के परवाने हासिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
रामपुर की राजनीति में लौटेगी आजम खान की धमक?
आजम खान की रिहाई सिर्फ एक बड़े राजनीतिक नेता के जेल से बाहर आने का घटनाक्रम नहीं है, बल्कि इसका असर समाजवादी पार्टी की राजनीति पर भी पड़ सकता है। रामपुर और आसपास के जिलों में आजम खान का अपना राजनीतिक प्रभाव रहा है। वह लंबे समय तक रामपुर की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहे हैं।
अखिलेश यादव और आजम खान के राजनीतिक रिश्तों को देखते हुए उनकी रिहाई से सपा कार्यकर्ताओं में भी उत्साह बढ़ने की संभावना है। अब तक जेल में रहने के कारण आजम खान सीधे तौर पर राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं ले पा रहे थे। बाहर आने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी और वह पार्टी के संगठन तथा आगामी चुनाव की तैयारियों में किस तरह योगदान देंगे, इस पर सबकी निगाहें रहेंगी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई है। इसलिए जमानत पर रिहाई को चुनाव लड़ने की पात्रता बहाल होने के रूप में नहीं देखा जा सकता। फिलहाल रामपुर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जेल प्रशासन की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आजम खान और अब्दुल्ला आजम कब बाहर आते हैं।




