नीरज सिसौदिया, बरेली
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे की चर्चाएं तेज हो रही हैं। इसी बीच बरेली शहर विधानसभा सीट को लेकर एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसने सपा नेता हसीब खान की उम्मीदवारी की संभावनाओं को नई ताकत दे दी है। कांग्रेस ने बरेली शहर सीट पर दावा नहीं किया है। कांग्रेस के निवर्तमान जिलाध्यक्ष अशफाक सकलैनी ने साफ किया है कि पार्टी की प्राथमिकता में आंवला, मीरगंज, कैंट और नवाबगंज विधानसभा सीटें हैं। ऐसे में शहर सीट पर सपा के टिकट के लिए हसीब खान की राह पहले के मुकाबले आसान होती दिखाई दे रही है।

दरअसल, इंडिया गठबंधन की रामलीला मैदान में हुई रैली के बाद दोनों दलों के बीच वर्ष 2027 के चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की ओर से सपा नेतृत्व को 170 से अधिक सीटों की सूची सौंपे जाने की चर्चा है। इन सीटों पर कांग्रेस अपने चुनाव चिह्न पर उम्मीदवार उतारना चाहती है। बरेली शहर सीट को लेकर भी यह माना जा रहा था कि कांग्रेस इस पर अपना दावा पेश कर सकती है। इसी वजह से सपा के कई संभावित दावेदार खुलकर सामने आने से बच रहे थे।
लेकिन कांग्रेस के निवर्तमान जिलाध्यक्ष अशफाक सकलैनी ने इस तस्वीर को काफी हद तक साफ कर दिया है। उन्होंने इंडिया टाइम 24 डॉट कॉम से बातचीत में बताया कि कांग्रेस ने बरेली जिले की चार विधानसभा सीटों पर दावा किया है। इनमें आंवला, मीरगंज, नवाबगंज और कैंट शामिल हैं। उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर आंवला सीट है। सकलैनी के मुताबिक, करीब डेढ़ सप्ताह पहले सीटों की सूची सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सौंप दी गई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बरेली शहर विधानसभा सीट कांग्रेस की सूची में शामिल नहीं है और पार्टी ने इस पर कोई दावा नहीं किया है।

कांग्रेस के इस रुख से सपा नेता हसीब खान को राजनीतिक बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। शहर विधानसभा सीट पर पिछले करीब 15 वर्षों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हसीब खान लगातार संगठन में सक्रिय रहे हैं। वह पिछले दो कार्यकाल से शहर विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। संगठन में उनकी लगातार सक्रियता और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से संपर्क उनकी दावेदारी का प्रमुख आधार है।
हसीब खान शहर विधानसभा सीट पर पीडीए की राजनीति को भी लगातार आगे बढ़ाते रहे हैं। वह इस सीट पर बड़े पीडीए सम्मेलन का आयोजन कर चुके हैं, जिसमें बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था। उनकी कोशिश पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एक मंच पर जोड़ने की रही है। इसके अलावा समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रियता और सहज व्यवहार के कारण स्थानीय स्तर पर भी उनकी पहचान बनी है।
शहर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत बताई जाती है। ऐसे सामाजिक समीकरण में सपा के लिए उम्मीदवार का चयन महत्वपूर्ण होगा। हसीब खान लंबे समय से क्षेत्र में संगठनात्मक काम कर रहे हैं, यही वजह है कि विधानसभा क्षेत्र के हर बूथ पर उनकी कमेटी पूरी तरह तैयार है। अगर पार्टी उन्हें टिकट देती है तो उन्हें अन्य उम्मीदवार की तुलना में कम मेहनत करनी पड़ेगी। कांग्रेस की ओर से सीट पर दावा नहीं किए जाने से गठबंधन के संभावित सीट बंटवारे में उनके सामने एक बड़ी राजनीतिक अड़चन कम होती दिख रही है।
हालांकि, इसे हसीब खान की उम्मीदवारी पर अंतिम मुहर नहीं माना जा सकता। समाजवादी पार्टी में टिकट का फैसला पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और शीर्ष नेतृत्व को ही करना है। सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस और सपा के बीच अंतिम सहमति बनने के बाद ही यह तय होगा कि बरेली शहर सीट किसके खाते में जाएगी। इसके बाद उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल कांग्रेस के ताजा बयान ने शहर सीट पर सपा के दावेदारों के बीच हसीब खान की स्थिति को चर्चा में ला दिया है।




