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सिर्फ नाम के ही नहीं काम के भी सुल्तान हैं पूर्व विधायक सुल्तान बेग, एक दिन में कर डालीं 87 चौपालें, पढ़ें क्या है पूरा मामला?

नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली मंडल की सियासत में सुल्तान बेग का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. लगभग तीन बार विधायक रह चुके मीरगंज के पूर्व विधायक और वरिष्ठ सपा नेता सुल्तान बेग मंडल के दबंग नेताओं में शुमार हैं. दिलचस्प बात यह है कि जितने वह दबंग हैं उतने ही मिलनसार और पार्टी के लिए समर्पित भी हैं. वह सिर्फ नाम से ही सुल्तान नहीं हैं बल्कि उनके काम भी किसी सुल्तान से कम नहीं हैं जो जनता के लिए मीलों के फासले चंद पलों में तय कर लेता है और अपने चेहरे पर शिकन तक नहीं आने देता. इसका जीता जागता उदाहरण शुक्रवार को देखने को मिला. सुल्तान के साथ ही उनकी सेेेेना भी पूरी तरह से डटी रही.

इन गांवों में सुल्तान बेग की ओर से किया गया चौपालों का आयोजन.

दरअसल, कृषि कानूनों के विरोध में समाजवादी पार्टी की ओर से लगातार विरोध प्रदर्शन करने के साथ ही गांवों में अलाव पर चर्चा और पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है. इसे लेकर कई नेताओं को पुलिस ने पकड़ भी लिया था. लेकिन सपा का आंदोलन और तेज होता जा रहा है. इसी कड़ी में पूर्व विधायक सुल्तान बेग ने शुक्रवार को महज 24 घंटे के भीतर 87 गांवों में चौपालों का आयोजन करवाया. इसके लिए पार्टी नेताओं की ड्यूटी लगाई गई थी. नेताओं ने वहां किसानों से मुलाकात की और रात्रि चौपाल भी लगाई. एक दिन में इतनी चौपालों का रिकॉर्ड फिलहाल तो सुल्तान बेग ने अपने नाम कर लिया है.
दरअसल, सुल्तान बेग खुद भी किसान परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं और ग्रामीण इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ है. यही वजह है कि समाजवादी पार्टी का कृषि कानूनों के विरोध में शुरू किया गया आंदोलन बरेली के ग्रामीण इलाकों में कुंद नहीं पड़ सका है. भाजपा की पूरी फौज मिलकर भी इस आंदोलन की धार को को कम कर पाने में नाकाम साबित हो रही है. वहीं, सुल्तान बेग के नेतृत्व में सपा ग्रामीणों के दिलों में अपनी जगह बनाने में कामयाब साबित हो रही है. इसका नुकसान भारतीय जनता पार्टी को आगामी पंचायत चुनाव में भुगतना पड़ सकता है क्योंकि भाजपा पंचायत चुनाव पार्टी के सिंबल पर लड़ने की तैयारी कर रही है और सपा पंचायत चुनावों के बहाने विधानसभा चुनावों की जमीन तैयार कर रही है. अब अलाव पर चर्चा और रात्रि चौपाल के जरिये सुल्तान बेग ने मीरगंज के गांवों में भाजपा को अपनी ताकत का एहसास तो करा ही दिया है. ऐसे में भाजपा के लिए आने वाले विधानसभा चुनाव मुश्किल भरे होंगे क्योंकि इस बार भाजपा की लहर पर किसानों का कहर टूट चुका है. इन परिस्थितियों में बरेली के ग्रामीण इलाकों में भगवा फहराना फिलहाल तो किसी नामुमकिन सपने जैसा ही प्रतीत हो रहा है. सुल्तान का किला इस बार पहले से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रहा है जिसमें सेंध लगाना फिलहाल भाजपा के बूते से बाहर ही नजर आ रहा है.

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