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उपेक्षा से आहत हैं दिग्गज कांग्रेस नेताओं के परिवार, इसलिए हुआ बंटाधार, स्व. राम सिंह खन्ना के भतीजे ने कहा- मेरी मां के निधन पर भी नहीं आए थे महानगर और जिला अध्यक्ष

नीरज सिसौदिया, बरेली
कभी सियासत के फलक पर सितारों की मानिंद चमकने वाली कांग्रेस आज अपना सियासी वजूद भी खोती जा रही है. एक दौर था जब बरेली शहर के कांग्रेस नेताओं की भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी भी मुरीद हुआ करती थीं. स्व. राम सिंह खन्ना भी एक ऐसा ही नाम है जो न सिर्फ इंदिरा गांधी के करीबियों में शुमार थे बल्कि संजय गांधी के भी विश्वासपात्र रहे. स्व. राम सिंह खन्ना वह शख्सियत थे जिन्होंने बरेली शहर का नाम राष्ट्रीय पटल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी. कांग्रेस के प्रति समर्पित राम सिंह खन्ना ने अपना पूरा जीवन पार्टी की सेवा में लगा दिया लेकिन उनके निधन के बाद उनके भाई संतोष सिंह खन्ना एवं उनके परिवार को कांग्रेस नेताओं ने ही दरकिनार कर दिया. एक दिग्गज कांग्रेस नेता का परिवार गुमनाम जिंदगी जीने को मजबूर हो गया. किसी भी कांग्रेस नेता ने उनकी सुध लेना मुनासिब नहीं समझा. परिवार का आशियाना तक चला गया. नतीजा यह हुआ कि जो जनता राम सिंह खन्ना और उनके परिवार से जुड़ी थी उसने कांग्रेस से दूरी बना ली. राम सिंह खन्ना की सियासत की विरासत को न कांग्रेस सहेज सकी और न ही उनका परिवार.

इंदिरा गांधी के साथ राम सिंह खन्ना
राजीव गांधी के साथ राम सिंह खन्ना
जीतने के बाद राम सिंह खन्ना का स्वागत करते लोग

राम सिंह खन्ना के भाई संतोष सिंह खन्ना उस दौर में खन्ना जी का पूरा काम देखते थे. वह खुद भी पार्षद रहे. अब उम्र का यह पड़ाव उन्हें बाहर निकलने की इजाजत नहीं देता.
राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद मोहित खन्ना ने राजनीति से दूरी क्यों बना ली?पूछने पर मोहित बताते हैं, ‘जब ताऊ जी की डेथ हुई थी तो मैं उस वक्त दसवीं क्लास में पढ़ता था. उस वक्त राजनीति में जाने के बारे में कभी सोचा भी नहीं था लेकिन जब हमारे परिवार से जुड़े और ताऊ जी के पुराने साथियों का दर्द और परेशानी देखी तो महसूस हुआ कि राजनीति में आगे आना चाहिए लेकिन पार्टी के नेताओं ने हमें दरकिनार कर दिया. उन्होंने कभी हमारे परिवार से संपर्क करने का प्रयास तक नहीं किया. इसकी वजह यह रही कि अब ताऊ जी जैसे समर्पित कार्यकर्ता पार्टी में रहे ही नहीं जो लोगों को जोड़ने का काम करें. कार्यकर्ता का मतलब होता है जो दिल से पार्टी हित में काम करे. अगर किसी भी संगठन में आप सेवा भाव लेकर आते हैं तो आपको सेवा का फल भी जरूर मिलेगा. लेकिन अब कांग्रेस नेताओं में सेवा की वह भावना रही ही नहीं जो स्व. राम सिंह खन्ना के दौर में हुआ करती थी.”
मोहित खन्ना ने कभी अपने पिता और ताऊ के रास्ते पर आगे बढ़ने का प्रयास नहीं किया लेकिन उनसे जब भी किसी कांग्रेस नेता ने चुनाव में मदद मांगी तो वह हमेशा उसके साथ खड़े नजर आए. मोहित ने खुद कभी चुनाव क्यों नहीं लड़ा? पूछने पर मोहित कहते हैं, “पार्टी ने कभी हमें इस लायक समझा ही नहीं कि हम चुनाव लड़ सकें लेकिन हम दिल से कांग्रेसी हैं और हमेशा रहेंगे. जब भी पार्टी नेताओं ने हमें सम्मान दिया है तब हमने भी उनका पूरा मान रखा है. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रेम प्रकाश अग्रवाल हमारे घर आए थे तो हमने उनके लिए चुनाव प्रचार भी किया.”
मोहित खन्ना के घर कुछ कांग्रेस नेता तो आए मगर क्या कभी महानगर अध्यक्ष अजय शुक्ला और जिला अध्यक्ष अशफाक सकलैनी ने भी उनके परिवार का हाल जानने की जहमत उठाई? पूछने पर मोहित खन्ना कहते हैं, “ताऊ जी के निधन के बाद हमारे घर पर आज तक कभी भी प्रेमी प्रकाश अग्रवाल को छोड़कर कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता नहीं आया. न तो कभी महानगर अध्यक्ष आए और न ही जिला अध्यक्ष ने हाल जानने का प्रयास किया. इतना ही नहीं जब वर्ष 2017 में मेरी मां का निधन हुआ तो उस वक्त कांग्रेस के आला नेताओं को छोड़कर बाकी सभी दलों के नेता शोक जताने यहां पहुंचे थे. जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार भी शामिल थे.”

स्व. राम सिंह खन्ना के भाई संतोष खन्ना

पुराने दिग्गज नेताओं के परिवारोंं की उपेक्षा को मोहित खन्ना कांग्रेस के पतन की मुख्य वजह मानते हैं. वह कहते हैं कि बरेली शहर में कांग्रेस के पतन का मुख्य कारण पुराने दिग्गज कांग्रेस नेताओं के परिवारों की उपेक्षा है. जिन परिवारों से हजारों लोग भावनात्मक रूप से जुड़े हुए थे उनकी उपेक्षा के कारण वे लोग भी कांग्रेस से दूर हो गए. वर्तमान नेताओं ने कभी इन परिवारों को जोड़ने का प्रयास नहीं किया. वह कहते हैं कि सिर्फ हमारा ही परिवार नहीं बल्कि कई दिग्गज कांग्रेस नेताओं के परिवार इस उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं. इसी उपेक्षा की वजह से कई लोग कांग्रेस छोड़कर चले गए तो कई लोगों ने पार्टी से दूरी बना ली.
मोहित खन्ना राजनीति से दूर हैं मगर समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. मोहित बताते हैं कि समाजसेवा का जज्बा हमारे खून में है. ताऊ जी और पिता जी ने राजनीति के माध्यम से समाजसेवा की. मुझे यह अवसर नहीं मिल पाया तो मैं रोटरी क्लब से जुड़ गया. पिछले करीब 18 वर्षों से मैं रोटरी क्लब से जुड़ा हुआ हूं. इसी के माध्यम से समाजसेवा के कार्य करते रहते हैं. डीडीपुरम में हम पूजा सेवा संस्थान के नाम से मेंटली रिटायर्ड बच्चों का एक स्कूल भी चलाते हैं. मैं उसका सचिव हूं और पीपी सिंह उसके चेयरमैन हैं. राखी सागर स्कूल की प्रिंसिपल हैं. हर साल दिसंबर माह में स्कूल का वार्षिकोत्सव आयोजित किया जाता है.

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