हरियाणा

पहले भी रहा है इनेलो-बसपा गठबंधन

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कुरुक्षेत्र (ओहरी)

आखिरकार इनैलो-बसपा के गठबंधन पर से अटकलों को विराम लग ही गया। दोनो दलों के प्रभारियों ने हरियाणा में राजनीतिक गठबंधन की घोषणा कर दी। एनडीए को यूपी के बाद हरियाणा में जोरदार टक्कर देने के लिए बसपा ने इनैलो के साथ गठबंधन किया हैं। इसके बाद प्रदेश और देश में विपक्षी दलों की एकजुटता को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया हैं। आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी तथा उसके सहयोगियों को हराने के लिए विपक्ष एकजुट हो रहा हैं। हरियाणा की राजनीति में इसका जोरदार असर दिखाई देगा। एनडीए की प्रमुख सहयोगी रही इनैलो अब एनडीए के खिलाफ मैदान में बसपा के साथ उतर आई हैं।  हरियाणा में इस गठबंधन की चर्चा कुछ महीनों से प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चल रही थी और इनैला के नेता इस बारे में इशारा भी कर रहे थे। बीते माह बसपा सुप्रीमो मायावती के जन्मदिन पर अभय चौटाला ने दिल्ली में उनसे मुलाकात कर शुभकामनाएं दी थी जिसके बाद चर्चाएं और ज्यादा तेज हो गई थी। इस विषय पर पूछे गए एक सवाल पर अभय चौटाला ने कहा था कि बसपा संस्थापक कांशी राम के साथ चौधरी देवीलाल के घनिष्ठ संबंध थे और अगर वे गठबंधन करेंगे तो डंके की चोट पर घोषणा के साथ करेंगे।  इससे पहले भी इनैलो और बसपा मिलकर हरियाणा में एक बार चुनाव लड़ चुके हैं। 1998 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों का समझौता था और तब इनैलो ने 7, बसपा ने 3 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। हरियाणा के इतिहास में बसपा का एकमात्र सांसद उसी चुनाव में अंबाला से बना था। इनैलो (तब हलोद) के सहयोग से बसपा के अमन नागरा उस चुनाव में जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में इनैलो (तब हलोदरा) के 7 में से 4 उम्मीदवार जीते थे। हरियाणा में बहुजन समाज पार्टी का वोट बैंक 40 से ज्यादा सीटों पर प्रभावी असर रखता है। पिछले 5 विधानसभा चुनावों में बसपा ने 5.44 प्रतिशत (1966), 5.74 प्रतिशत, 3,22 प्रतिशत, 6.74 प्रतिशत और 4.3 प्रतिशत (2014) वोट लिए हैं, जबकि इस दौरान इनैलो का वोट प्रतिशत 20.56 प्रतिशत (1996), 29.61 प्रतिशत , 26.77 प्रतिशत, 25.81 प्रतिशत 24.73 प्रतिशत (2014) रहा है। इससे यह दिखता है कि दोनों दलों के पास कुछ निश्चित वोटबैंक है जिसे वे पिछले 20 सालों से एक स्तर के आसपास बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं। बसपा ने गठन के तुरंत बाद 1989 में हरियाणा में पहला लोकसभा और 1991 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था। तब से यह पार्टी हरियाणा का हर लोकसभा-विधानसभा चुनाव लड़ती आ रही और सिर्फ एक बार 1998 में लोकसभा चुनाव में हलोदरा के साथ गठबंधन किया था। लोकसभा चुनावों में बसपा का वोट प्रतिशत विधानसभा चुनावों के मुकाबले अच्छा रहता है। 1996 में 6.5 प्रतिशत वोट लेने के बाद बसपा ने 1998 में 7.68 प्रतिशतवोट लिए हालांकि 1999 में कारगिल युद्ध के बाद हुए चुनाव में इस दल को सिर्फ 1.96 प्रतिशत बसपा ने 2004 में 4.98 प्रतिशत , और 2009 में 15.75 प्रतिशत वोट लिए जबकि पिछले 2014 के चुनाव में 4.6 प्रतिशत वोट लिए। 2009 में लिए गए 15.7 प्रतिशत वोट बसपा का हरियाणा में किसी भी चुनाव में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। यह सियासी हलकों में जोड़-घटाव के दौर को शुरू करने वाला कदम रहेगा और लोग यह जानने को उत्सुक रहेंगे कि बसपा के साथ पहली बार विधानसभा चुनाव अगर इनेलो लड़ती है तो कौन सी सीटों पर बसपा के उम्मीदवार उतारे जाएंगे और इस गठबंधन का परिणाम क्या रहेगा। बसपा ने 2009 के चुनावों से पहले कुलदीप बिश्नोई की हजका के साथ भी गठबंधन किया था लेकिन वह गठबंधन कुछ समय बाद ही टूट गया था और दोनों दलों ने मिलकर कोई चुनाव नहीं लड़ा था।

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