नीरज सिसौदिया, बरेली
बिहार में आगामी अक्टूबर-नवंबर माह में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके मद्देनजर चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कार्य किया जा रहा है। इसके तहत चुनाव आयोग की ओर से मतदाताओं से कुछ दस्तावेज भी मांगे जा रहे हैं। दस्तावेज उपलब्ध न कराने वाले का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा। विपक्षी दलों ने इसे मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने और बैकडोर से सीएए लागू करने की कवायद करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट से इसे रोकने की गुहार लगाई है।

इंडिया गठबंधन में शामिल विभिन्न दलों की ओर से इस संबंध में कई याचिकाएं दायर की गई हैं जिन पर 10 जुलाई को सुप्रीम सुनवाई होनी है। चूंकि उत्तर प्रदेश में भी छह माह बाद पंचायत चुनाव और लगभग डेढ़ साल बाद विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं इसलिए समाजवादी पार्टी इसे लेकर पूरी तरह सतर्क है।
सोमवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ बैठक कर लौटे राष्ट्रीय सचिव वीरपाल सिंह यादव ने बताया कि आगामी चुनाव तक पार्टी का फोकस इस बात पर है कि असली मतदाता का वोट किसी भी सूरत में कटने न पाए और नकली या फर्जी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में जुड़ने न पाए।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देशानुसार हम बूथ स्तर पर काम कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि हमारे बूथ इतने मजबूत हो जाएं कि भारतीय जनता पार्टी के लोग किसी भी सूरत में हमारे असली मतदाताओं के वोट न कटवा सकें।
विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर उन्होंने कहा कि प्रदेश की कुछ विधानसभा सीटों के प्रभारी बना दिए गए हैं जो संगठन को मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे हैं। जिन सीटों पर प्रभारी नहीं बनाए गए हैं उन सीटों पर भी जल्द ही प्रभारी बना दिए जाएंगे। इसके अलावा सभी प्रभारियों एवं संगठन के पदाधिकारियों के कार्यों की समीक्षा के लिए जिला प्रभारी भी नियुक्त किए जाएंगे। भाजपा को हर मोर्चे पर मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनेंगे।





