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बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय महासचिव सपा सांसद को मंच पर भेंट करना चाहते थे संविधान की प्रति, जिला अध्यक्ष शिवचरण कश्यप ने नहीं दिया मौका, मंच पर भी नहीं दी जगह, अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास पहुंची शिकायत, जानिये क्या है पूरा मामला?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष से जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पहले मारपीट, फिर माफी और अब अपनी ही पार्टी के दलित समाज से जुड़े प्रकोष्ठ बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय महासचिव का कथित अपमान सामने आया है। राष्ट्रीय महासचिव ने वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती से इस संबंध में लिखित शिकायत की है।
समाजवादी पार्टी बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय महासचिव ने बताया कि विगत 26 जुलाई को संविधान दिवस के अवसर पर प्रदेश भर में पार्टी की ओर से समाराेहों का आयोजन किया गया था। बरेली में आईएमए हॉल में समारोह का आयोजन किया गया था जिसमें बदायूं सांसद आदित्य यादव मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान मंच पर बड़ी संख्या में पार्टी नेता मौजूद थे लेकिन बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय महासचिव रणबीर सिंह को जगह नहीं मिली। इस बीच रणबीर सिंह ने मंच के नीचे से ही जिला अध्यक्ष शिवचरण कश्यप से अनुरोध किया कि वह आदित्य यादव को संविधान की प्रति मंच पर आकर भेंट करना चाहते हैं। रणबीर सिंह का आरोप है कि शिवचरण कश्यप ने उन्हें एक भाषण के बाद मंच पर बुलाने का आश्वासन दिया लेकिन सभी लोगों के भाषण खत्म होने के बावजूद उन्हें संविधान की प्रति भेंट नहीं करने दी गई। इसके बाद रात लगभग 11 बजे एक अलग स्थान पर रणबीर सिंह ने आदित्य यादव से मुलाकात कर उन्हें संविधान की प्रति भेंट की।
जिला अध्यक्ष द्वारा की गई इस उपेक्षा से रणबीर सिंह और उनके समर्थकों में खासा रोष है। रणबीर सिंह जाटव समाज से आते हैं और उनके समाज के लोगों में अपने नेता के इस कथित अपमान से आक्रोश फैल गया। रणबीर सिंह ने इसकी लिखित शिकायत समाजवादी पार्टी बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती से की है।
इस संबंध में जब मिठाई लाल भारती से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है लेकिन इस मामले में उन्होंने आगे क्या कार्रवाई की है या करने जा रहे हैं, इस संबंध में उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा।
उधर, दूसरी तरफ शिवचरण कश्यप को जल्द ही जिला अध्यक्ष पद से हटाए जाने की चर्चाएं और तेज हो गई हैं। कहा जा रहा है कि उनके खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा इतना बड़ा हो चुका है कि सपा प्रमुख अब उन्हें क्षमादान करने के मूड में नहीं हैं। बताया जाता है कि कुछ दिनों पहले जब वह बरेली के कुछ नेताओं के साथ लखनऊ गए थे तो उन्हें काफी निराशा हाथ लगी थी। इसी तरह सपा की जिले की मासिक बैठक भी रविवार को हुई जिससे सपा के प्रमुख नेताओं और कई पदाधिकारियों ने भी दूरी बनाए रखी।
बहरहाल, समाजवादी पार्टी की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। लोगों में यह संदेश जा रहा है कि जो पार्टी दलितों के नेताओं का सम्मान नहीं कर रही है वो दलित समाज को क्या सम्मान देगी।

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