यूपी

समाजवादी पार्टी ने बरेली की नौ विधानसभा सीटों के लिए पूरा किया दो राउंड का सर्वे, तीसरे राउंड के बाद बनाए जाएंगे प्रभारी, विधानसभा सीट का प्रभारी ही होगा पार्टी उम्मीदवार, पढ़ें अनीस बेग, राजेश अग्रवाल, चंद्रसेन सागर और हसीव खान सहित किस सीट पर कौन सा उम्मीदवार दो राउंड में रहा आगे और किस विधायक का कट सकता है टिकट?

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीति तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी भी इस दिशा में काफी सक्रिय नजर आ रही है। पार्टी ने बरेली जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को एक नए तरीके से आगे बढ़ाया है। इसके तहत दो चरणों का सर्वे पूरा कर लिया गया है, जबकि तीसरे और अंतिम चरण का सर्वे भी शुरू हो चुका है। माना जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही यह तय होगा कि किस सीट से कौन नेता चुनाव लड़ेगा।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बार उम्मीदवारों का चयन सिर्फ सिफारिश या पुराने राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि जमीनी हकीकत और जनता के बीच पकड़ को ध्यान में रखकर किया जाएगा। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी साफ कहा है कि वही नेता टिकट पाएगा जो जमीन से जुड़ा हो, जनता के मुद्दों पर सक्रिय रहता हो और चुनाव जीतने की क्षमता रखता हो। यही वजह है कि इस बार सर्वे को सबसे अहम आधार बनाया गया है।
बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी इस बार उम्मीदवार चयन के लिए एक अलग मॉडल अपना रही है, जो काफी हद तक आम आदमी पार्टी के पैटर्न से प्रेरित है। आम आदमी पार्टी की तरह ही सपा भी चुनाव से काफी पहले अपने संभावित उम्मीदवारों को तय करने की दिशा में काम कर रही है। सर्वे में जो नेता सबसे मजबूत और जिताऊ नजर आएगा, उसे उस विधानसभा सीट का प्रभारी बना दिया जाएगा। यही प्रभारी आगे चलकर पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार भी होगा। हालांकि, चुनाव के नजदीक आने पर भी एक और सर्वे किया जाएगा जिसमें अगर प्रभारी कमजोर नजर आया तो उम्मीदवार बदला भी जा सकता है। इस रणनीति का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उम्मीदवार को चुनाव प्रचार के लिए लंबा समय मिलेगा और वह अपने क्षेत्र में संगठन को मजबूत कर सकेगा।
सूत्रों के अनुसार, बरेली जिले की सभी नौ सीटों- बरेली शहर, कैंट, बहेड़ी, नवाबगंज, फरीदपुर, मीरगंज, आंवला, बिथरी चैनपुर और भोजीपुरा पर दो राउंड का सर्वे पूरा किया जा चुका है। अब तीसरे चरण का सर्वे चल रहा है, जो अप्रैल के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पार्टी संगठन को भी सक्रिय किया जा रहा है। अप्रैल के पहले सप्ताह में बरेली समेत कुछ बड़े शहरों के महानगर अध्यक्षों को लखनऊ बुलाया गया है। इस बैठक में हर सीट के टॉप-3 दावेदारों के नामों पर चर्चा होगी और अंतिम रूप दिया जाएगा।
बरेली जिले की राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो फिलहाल नौ में से केवल दो सीटों पर ही समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। ऐसे में पार्टी के सामने अपनी स्थिति मजबूत करने की बड़ी चुनौती है। दिलचस्प बात यह है कि जिन दो सीटों पर सपा के विधायक हैं, उनमें से एक विधायक की रिपोर्ट सर्वे में कमजोर आई है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि उसका टिकट काटा भी जा सकता है। यह संकेत देता है कि पार्टी इस बार किसी भी नेता को सिर्फ पद या पुराने प्रदर्शन के आधार पर टिकट देने के मूड में नहीं है।
अगर बरेली कैंट सीट की बात करें तो यहां सर्वे में कुछ नाम काफी आगे बताए जा रहे हैं। प्रचार-प्रसार और सक्रियता के आधार पर डॉ. अनीस बेग और राजेश अग्रवाल के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं।

डॉक्टर अनीस बेग
राजेश अग्रवाल।

इनके अलावा तीसरे स्थान पर इंजीनियर अनीस अहमद खां का नाम बताया जा रहा है। इन तीनों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी दिलचस्प मानी जा रही है और तीसरे चरण के सर्वे के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

इंजीनियर अनीस अहमद खां

वहीं बरेली शहर विधानसभा सीट पर स्थिति कुछ अलग है। यहां हसीव खान को छोड़कर कोई भी दावेदार फिलहाल उतना मजबूत या सक्रिय नजर नहीं आ रहा है, जो पार्टी को जीत दिला सके। यही कारण है कि इस सीट को गठबंधन के तहत कांग्रेस को दिए जाने की चर्चा भी चल रही है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर लखनऊ में होने वाली बैठक में गंभीरता से विचार किया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो यह सपा की रणनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।

हसीव खान

मीरगंज विधानसभा सीट की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नहीं बताई जा रही है। यहां सुल्तान बेग के सक्रिय राजनीति से पीछे हटने के बाद पार्टी को मजबूत नेतृत्व नहीं मिल पा रहा है। सर्वे में भी इस सीट पर सपा की स्थिति कमजोर बताई गई है। ऐसे में इस सीट को भी कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। इससे साफ है कि सपा इस बार जीत के लिए गठबंधन के विकल्प को भी खुला रखे हुए है।

सुल्तान बेग

बिथरी चैनपुर सीट पर स्थिति थोड़ी संतुलित नजर आ रही है। यहां पूर्व सांसद वीरपाल सिंह के बेटे देवेंद्र यादव, सूरज यादव और शिवचरण कश्यप के नाम सर्वे में सामने आए हैं। ये तीनों नेता अपनी-अपनी तरह से क्षेत्र में सक्रिय हैं और पार्टी के भीतर अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। तीसरे चरण के सर्वे के बाद ही तय होगा कि इनमें से कौन आगे निकलता है।

डॉ. देवेंद्र यादव

आंवला विधानसभा सीट पर भी मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। यहां प्रचार-प्रसार के मामले में डॉ. जीराज यादव का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। वहीं प्रभाव और जनाधार के मामले में आरके शर्मा और महिपाल सिंह यादव भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। इस सीट पर अंतिम फैसला काफी सोच-समझकर लिया जाएगा क्योंकि यहां कई मजबूत चेहरे मौजूद हैं।

डॉक्टर जीराज सिंह यादव

फरीदपुर विधानसभा सीट की स्थिति सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां पूर्व विधायक सियाराम सागर के भाई चंद्रसेन सागर और पूर्व विधायक विजयपाल सिंह के बीच मुकाबला बताया जा रहा है। हालांकि सर्वे के मुताबिक विजयपाल सिंह की स्थिति चंद्रसेन सागर के मुकाबले कमजोर है।

चंद्रसेन सागर
विजयपाल सिंह

इसके पीछे उनकी लगातार दो चुनावी हार को वजह माना जा रहा है। इसके अलावा इस सीट पर अन्य दावेदार ज्यादा सक्रिय नहीं दिख रहे हैं। एक महिला दावेदार का भी जिक्र सामने आया है, जो पहले शराब का कारोबार करती थीं। उनका यह अतीत उनकी दावेदारी के लिए नकारात्मक साबित हो रहा है। साथ ही पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी कम मौजूदगी भी उनके लिए नुकसानदायक मानी जा रही है।
बहेड़ी और भोजीपुरा सीटों पर भी पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है। इन दोनों सीटों पर मौजूदा विधायकों की स्थिति की समीक्षा की जा रही है।

शहजिल इस्लाम

पहले यह कहा गया था कि किसी भी मौजूदा विधायक का टिकट नहीं काटा जाएगा, लेकिन सर्वे के बाद अब स्थिति बदलती नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, इन दोनों सीटों में से किसी एक सीट पर मौजूदा विधायक का टिकट कट सकता है, क्योंकि सर्वे में एक विधायक को जीतने में कमजोर बताया गया है।

अता उर रहमान

नवाबगंज विधानसभा सीट पर फिलहाल स्थिति काफी स्पष्ट मानी जा रही है। यहां भगवत सरन गंगवार का कोई मजबूत विकल्प पार्टी को नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में उनकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है और वे इस सीट से लगभग तय उम्मीदवार माने जा रहे हैं।

भगवत सरन गंगवार

कुल मिलाकर देखा जाए तो समाजवादी पार्टी इस बार बरेली में काफी सोच-समझकर और डेटा के आधार पर उम्मीदवार तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सर्वे के जरिए पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि किस नेता की जनता के बीच कितनी पकड़ है और कौन चुनाव जीत सकता है। इससे न केवल उम्मीदवार चयन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि पार्टी की चुनावी तैयारी भी मजबूत होगी।
तीसरे और अंतिम सर्वे के बाद जब प्रभारी घोषित किए जाएंगे, तब तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी कि बरेली की नौ सीटों पर समाजवादी पार्टी किसे मैदान में उतारने जा रही है। फिलहाल सभी दावेदार अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हुए हैं और पार्टी के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। आने वाले कुछ हफ्ते बरेली की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं।

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *