यूपी

गुटबाजी की भेंट चढ़ी बरेली सपा के नए जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव की ताजपोशी, नहीं दिखे प्रमुख यादव नेता, अता उर रहमान, शहजिल इस्लाम, वीरपाल सिंह, भगवत सरन गंगवार जैसे दिग्गजों ने भी बनाई दूरी, मंच पर जगह नहीं मिली तो नाराज होकर चले गए बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव चंद्रसेन सागर, पढ़ें और क्या-क्या हुआ?

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली

समाजवादी पार्टी के बरेली जिला अध्यक्ष के रूप में शुभलेश यादव की ताजपोशी का दिन जहां पार्टी के लिए एक मजबूत संदेश देने का मौका होना चाहिए था, वहीं यह कार्यक्रम उल्टा गुटबाजी और नाराजगी की तस्वीर बनकर सामने आया। जिस आयोजन को शक्ति प्रदर्शन और एकजुटता का मंच बनना था, वह अंदरूनी खींचतान और आपसी दूरी का उदाहरण बन गया।


गुरुवार को पार्टी कार्यालय में शुभलेश यादव के स्वागत के लिए कार्यक्रम रखा गया था। हालांकि खुद शुभलेश यादव का कहना है कि यह कोई आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था और उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर किसी को निमंत्रण नहीं दिया था। उनके मुताबिक, वह जिला अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार कार्यालय पहुंचे थे, इसलिए कुछ कार्यकर्ता और नेता वहां आ गए और उनका स्वागत किया गया। लेकिन हकीकत यह है कि महानगर कमेटी की ओर से पार्टी नेताओं और मीडिया को एक मैसेज जारी कर बाकायदा इस कार्यक्रम की सूचना दी गई थी, जिसमें समय और स्थान के साथ स्वागत समारोह का जिक्र था। यही वजह रही कि पार्टी के कार्यकर्ता और मीडिया भी वहां पहुंची।
कार्यक्रम की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें यादव समाज के कई बड़े नेता नजर ही नहीं आए। जिन नेताओं की मौजूदगी से कार्यक्रम को मजबूती मिल सकती थी, उन्होंने दूरी बना ली। इनमें ढाई दशक तक जिला अध्यक्ष रहे सपा के राष्ट्रीय सचिव वीरपाल सिंह यादव, पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अरविंद यादव, निवर्तमान महासचिव संजीव यादव, आदेश यादव गुड्डू, रविंदर यादव और सूरज यादव जैसे नाम शामिल हैं। यह गैरमौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पार्टी ने हाल ही में शुभलेश यादव को जिला अध्यक्ष बनाकर यादव वोट बैंक को मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश की थी लेकिन सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के इस अरमान पर शुभलेश यादव की ताजपोशी के दिन ही पानी फिर गया। एकजुटता की जगह बिखराव का संदेश गया।
सिर्फ यादव नेता ही नहीं, बल्कि जिले के कद्दावर और प्रभावशाली नेता भी इस कार्यक्रम से दूर रहे। सपा के प्रदेश महासचिव और बहेड़ी से विधायक अता उर रहमान, भोजीपुरा से विधायक शहजिल इस्लाम और पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार जैसे दिग्गजों की गैरहाजिरी ने इस आयोजन को और कमजोर कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, इन नेताओं के करीबी स्थानीय प्रतिनिधि और समर्थक भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इससे साफ संकेत मिला कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और शुभलेश यादव के सामने चुनौतियों के बड़े पहाड़ खड़े हैं।


इस कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना दलित नेता चंद्रसेन सागर का नाराज होकर चले जाना। पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंद्रसेन सागर बरेली जिले में दलित समाज का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं और समाजवादी पार्टी की बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव भी हैं। वह फरीदपुर विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार माने जाते हैं और उनकी गिनती पुराने और प्रभावशाली नेताओं में होती है। उनके बड़े भाई स्वर्गीय सियाराम सागर फरीदपुर विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे थे। सागर परिवार बरेली जिले का रसूखदार दलित परिवार है। खुद चंद्रसेन सागर की तीन बेटियां आईएएस और आईआरएस अधिकारी हैं और एक दामाद आईपीएस अफसर हैं। बरेली में चंद्रसेन सागर एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी तीन बेटियां सिविल सेवक हैं। बताया जाता है कि चंद्रसेन सागर थोड़ी देर से कार्यक्रम में पहुंचे थे। जब वह पहुंचे, तब मंच पर पहले से ही कई नेताओं को जगह दी जा चुकी थी। लेकिन उन्हें मंच पर स्थान नहीं मिला। यह बात उन्हें नागवार गुजरी। खास बात यह रही कि जिन नेताओं को मंच पर जगह दी गई, उनमें उनके राजनीतिक विरोधी माने जाने वाले विजयपाल सिंह भी शामिल थे, जो पिछले चुनाव में बसपा से आए थे और लगातार तीन चुनाव हार चुके हैं। ऐसे में सागर समर्थकों ने इसे अपमान के तौर पर देखा। नाराज चंद्रसेन सागर ने औपचारिक रूप से शुभलेश यादव का स्वागत तो किया, लेकिन इसके बाद वह कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चले गए। उनका इस तरह जाना पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को खुलकर सामने ले आया। हालांकि, इस मामले में उनका पक्ष सामने नहीं आ सका, क्योंकि उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
मंच पर जिन नेताओं को जगह दी गई, उनमें महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संजीव सक्सेना, अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष इंजीनियर अनीस अहमद खां, महिला सभा की जिलाध्यक्ष स्मिता यादव, पूर्व महानगर अध्यक्ष कदीर अहमद और विजयपाल सिंह जैसे नाम शामिल थे। लेकिन बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी और कुछ नेताओं की नाराजगी ने पूरे कार्यक्रम का असर फीका कर दिया।


शुभलेश यादव ने इन सभी बातों को सामान्य बताते हुए कहा कि यह कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं था और चंद्रसेन सागर किसी काम से चले गए थे। उन्होंने मंच पर जगह न मिलने की बात से भी इनकार किया। लेकिन जिस तरह से कार्यक्रम में संदेश भेजकर लोगों को बुलाया गया और फिर कई बड़े नेता नहीं पहुंचे, उससे यह साफ हो गया कि पार्टी के भीतर तालमेल की कमी है।


राजनीतिक तौर पर देखें तो यह घटनाक्रम समाजवादी पार्टी के लिए एक चेतावनी की तरह है। जिला अध्यक्ष की ताजपोशी जैसे मौके पर ही अगर गुटबाजी खुलकर सामने आ जाए, तो आने वाले चुनावों में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। खासकर तब, जब पार्टी अलग-अलग सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही हो।
बरेली जैसे जिले में जहां जातीय और सामाजिक संतुलन राजनीति का अहम हिस्सा होता है, वहां इस तरह की नाराजगी और दूरी पार्टी की रणनीति को कमजोर कर सकती है। शुभलेश यादव की ताजपोशी से जो संदेश मजबूती का जाना चाहिए था, वह गुटबाजी और असंतोष के शोर में कहीं दबता नजर आया। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस स्थिति को कैसे संभालता है और क्या नाराज नेताओं को मनाने की कोई कोशिश की जाती है या नहीं।

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *