यूपी

सांसदों एवं विधान मण्डल सदस्यों को ठेंगे पर रखते हैं यूपी के अफसर, सरकार से शिकायत, कसा शिकंजा

आशीष सिंह, लखनऊ
राज्य सरकार ने प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को सांसदों एवं विधान मण्डल के सदस्यों द्वारा शासन एवं जनपद स्तर पर भेजे गए पत्रों पर प्रभावी कार्यवाही करने एवं कृत कार्यवाही से अवगत कराने के निर्देश जारी किए है।
संसदीय शिष्टाचार एवं पत्राचार कार्यान्वयन अनुभाग द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि सांसदों एवं विधान मण्डल के सदस्यों के पत्रों पर प्रभावी कार्यवाही किए जाने के लिए समय-समय पर शासनादेश जारी किए जाते रहें है।
शासनादेशों में दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी शासन स्तर इस प्रकार की शिकायते प्राप्त हो रहीें है कि जिला स्तर पर सांसदों एवं विधान मण्डल के सदस्यों से प्राप्त पत्रों पर की गई कार्यवाही की जानकारी उनको नहीं दी जा रही है।
विगत 03 अप्रैल, 2018 को जारी शासनादेश में जिलाधिकारियों को एक बार पुनः निर्देशित किया गया है कि सांसदों एवं विधान मण्डल के सदस्यों से प्राप्त पत्रों को ‘जन प्रतिनिधि पत्राचार रजिस्टर‘ में अंकित करते हुए उन पत्रों की पावती देख कर उन पर प्राथमिकता से कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा कृत कार्यवाही से संबंधित सासंद एवं विधान मण्डल के मा0 सदस्यों को अवगत भी कराया जाए।
इस संबंध में 28 सितम्बर, 2012 के शासनादेश का हवाला भी दिया गया है, जिसमें नोडल अधिकारी नामित किए जाने की बात कही गई थी, इसके अलावा 15 अक्टूबर, 2015 को जारी पत्र का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें जन प्रतिनिधि पत्राचार रजिस्टर बनाए जाने एवं डाक रिसीव करने व कृत कार्यवाही से सदस्यों को अवगत कराने के निर्देश दिए गये थे।
शासनादेश में कहा गया है कि सांसद एवं विधान मण्डल के सदस्यों के पत्रों को शीर्ष प्राथमिकता देकर प्रभावी कार्यवाही करते हुए उन्हें अवगत भी कराया जाए।

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