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राजेश अग्रवाल की बढ़ती सक्रियता से घबराए विरोधी? सुभाष नगर में होर्डिंग फाड़े, वॉल पेंटिंग पर पोता सफेद रंग

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नीरज सिसौदिया, बरेली

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, वरिष्ठ पार्षद और बरेली कैंट विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार राजेश अग्रवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह उनकी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और जनसमर्थन के बीच विरोधियों की कथित शरारती हरकतें बनी हैं। सुभाष नगर क्षेत्र में उनके प्रचार के लिए लगवाए गए होर्डिंग कई जगह फाड़ दिए गए, जबकि दीवारों पर करवाई गई वॉल पेंटिंग पर सफेद रंग पोत दिया गया। इस घटना के बाद क्षेत्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इसे लेकर हर तरफ चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

राजेश अग्रवाल की वॉल पेंटिंग पर पोती गई सफेदी।

करीब 9 से 10 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बरेली कैंट सीट पर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में राजेश अग्रवाल का लगातार जनता के बीच सक्रिय रहना और पार्टी सर्वे में मजबूत स्थिति बनाना विरोधियों को बेचैन कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हरकत किसी सामान्य शरारत का हिस्सा नहीं, बल्कि राजनीतिक कुंठा का परिणाम है।

राजेश अग्रवाल पिछले तीन दशक से पार्षद के रूप में जनता की सेवा कर रहे हैं। 30 वर्षों के लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने बरेली शहर के कई बदलावों को न केवल करीब से देखा है, बल्कि उनमें अपनी सक्रिय भूमिका भी निभाई है। खास तौर पर सुभाष नगर, कैंट क्षेत्र, मणिनाथ और आसपास के इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। क्षेत्र की जनता उन्हें एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में देखती है, जो सिर्फ चुनाव के समय नहीं बल्कि हर परिस्थिति में लोगों के बीच मौजूद रहते हैं।

यही वजह है कि जब सुभाष नगर क्षेत्र में उनके प्रचार के लिए होर्डिंग लगाए गए और दीवारों पर वॉल पेंटिंग करवाई गई, तो इसे जनता के बीच उनकी बढ़ती लोकप्रियता का संकेत माना गया। लेकिन कुछ ही समय बाद इन होर्डिंग्स का फाड़ा जाना और पेंटिंग पर सफेद रंग पोत दिया जाना कई सवाल खड़े कर गया। फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि इस हरकत के पीछे कौन लोग हैं, लेकिन इसे अराजक तत्वों की करतूत बताया जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाल ही में समाजवादी पार्टी की ओर से कराए गए दो चरणों के आंतरिक सर्वे में राजेश अग्रवाल का नाम टॉप-3 दावेदारों में शामिल होना भी विरोधियों की बेचैनी की एक बड़ी वजह हो सकता है। कैंट विधानसभा सीट पर टिकट के लिए उनकी दावेदारी लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। ऐसे में विरोधी खेमे के लिए उनका बढ़ता कद चिंता का विषय बनना स्वाभाविक है।

गौरतलब है कि पिछली बार समाजवादी पार्टी ने राजेश अग्रवाल को बरेली शहर विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था। हालांकि वह सीट उनका मूल राजनीतिक क्षेत्र नहीं थी, फिर भी उन्होंने पूरी दमदारी के साथ चुनाव लड़ा और पार्टी के लिए मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इस बार चूंकि वह अपने मूल क्षेत्र कैंट विधानसभा में दावेदारी पेश कर रहे हैं, इसलिए उनका जनसंपर्क और भी ज्यादा प्रभावी नजर आ रहा है।

सुभाष नगर इलाका कैंट विधानसभा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और यहां राजेश अग्रवाल की मजबूत पकड़ रही है। तीन दशक से लगातार जनता की समस्याओं को उठाने के कारण उन्होंने क्षेत्र में एक भरोसेमंद नेता की छवि बनाई है। चाहे व्यापारियों की समस्याएं हों, आम जनता की मूलभूत सुविधाओं का सवाल हो, मणिनाथ क्षेत्र की परेशानियां हों, रामपुर गार्डन की समस्याएं हों या शहर के किसी अन्य वार्ड का मुद्दा—राजेश अग्रवाल हर मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए जाने जाते हैं।

हाल के दिनों में उन्होंने बरेली के सम्मान की लड़ाई को लेकर भी जोरदार आवाज उठाई। फिल्म पुरंदर में बरेली को “पॉकेटमार” कहकर दिखाए जाने पर उन्होंने खुलकर विरोध दर्ज कराया और इसे शहर के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस मुद्दे पर बड़े-बड़े नेता चुप रहे, उस पर राजेश अग्रवाल ने मुखर होकर बरेली की आवाज बुलंद की। यही उनकी राजनीतिक पहचान को और मजबूत बनाता है।

इसी सक्रियता और जनसरोकार की राजनीति ने उन्हें समाजवादी पार्टी के अंदर भी एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित किया है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि राजेश अग्रवाल का निरंतर जनसंपर्क, संगठन में पकड़ और जनता के मुद्दों पर मुखरता उन्हें कैंट सीट के लिए सबसे मजबूत चेहरों में शामिल करती है।

विरोधियों द्वारा पोस्टर फाड़ने, होर्डिंग हटाने और वॉल पेंटिंग पर सफेद रंग पोतने जैसी घटनाओं को लेकर क्षेत्र में नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों और समर्थकों ने इस हरकत की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि इस तरह की छोटी और ओछी हरकतों से किसी जननेता की लोकप्रियता को रोका नहीं जा सकता।

राजनीतिक गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस तरह की शरारती हरकतों से राजेश अग्रवाल के बढ़ते कद को रोका जा सकता है? जानकारों का मानना है कि इसका जवाब साफ तौर पर “नहीं” है। वजह यह है कि राजेश अग्रवाल की राजनीति पोस्टर, बैनर या वॉल पेंटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सीधे जनता के दिलों में अपनी जगह बना चुके हैं।

जनता के आंदोलनों का चेहरा बने राजेश अग्रवाल लगातार लोगों की लड़ाई लड़ते रहे हैं और आगे भी उसी ऊर्जा के साथ सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि विरोधियों की यह कुंठा इस बात का संकेत है कि राजेश अग्रवाल की दावेदारी दिन-ब-दिन मजबूत होती जा रही है।

आने वाले महीनों में कैंट विधानसभा सीट की राजनीति और दिलचस्प होने वाली है, लेकिन फिलहाल इतना जरूर साफ है कि राजेश अग्रवाल को रोकने की कोशिशें जितनी बढ़ेंगी, उनकी राजनीतिक पहचान उतनी ही मजबूत होती जाएगी। बरेली की राजनीति में उनका नाम एक बार फिर मजबूती से उभर रहा है और जनता के बीच उनकी सक्रियता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनती जा रही है।

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