नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली के राजेंद्र नगर क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली अव्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। राजेंद्र नगर ई-ब्लॉक स्थित पानी की टंकी के पीछे पिछले तीन दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण लोगों को भीषण गर्मी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। देर रात तक चले प्रयासों के बाद बिजली व्यवस्था बहाल हो सकी, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की कमी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्षेत्रीय पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना ‘मम्मा’ ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि स्थानीय निवासियों ने जब उनसे संपर्क किया तो उन्होंने तत्काल राजेंद्र नगर के एसडीओ श्री ज्ञान जी, अवर अभियंता मिलन कुमार तथा अन्य अधिकारियों से फोन पर बात की। इसके साथ ही उन्होंने शहर विधायक एवं प्रदेश सरकार में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार से भी संपर्क कर समस्या की जानकारी दी। इसके बाद वह स्वयं स्थानीय निवासियों के साथ राजेंद्र नगर पावर हाउस पहुंचे।
सतीश मम्मा के अनुसार कर्मचारियों की भारी कमी के कारण बिजली विभाग की व्यवस्थाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्रत्येक पावर हाउस पर पर्याप्त कर्मचारी मौजूद रहते थे, जिससे स्थानीय स्तर पर समस्याओं का त्वरित समाधान हो जाता था। लेकिन अब हालात यह हैं कि छोटी-छोटी शिकायतों के लिए भी लोगों को रामपुर बाग कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले राजेंद्र नगर, अस्पताल और अशोक नगर जैसे पावर हाउसों पर सीधे शिकायत दर्ज कराई जा सकती थी और तत्काल समाधान भी मिल जाता था, लेकिन अब लोगों को ऑनलाइन शिकायत कराने, बिजली बिल साथ ले जाने और बार-बार कार्यालय पहुंचने जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें भीषण गर्मी में घंटों भटकना पड़ता है।
पार्षद सतीश मम्मा ने कहा कि एक समय ऐसा था जब बिजली और पानी की समस्याओं को लेकर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन हुआ करते थे। उन्होंने स्वर्गीय डॉ. दिनेश जोहरी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में जनता की समस्याओं को लेकर जोरदार आंदोलन होते थे और समाधान भी निकलता था। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह हो गई है कि जनता समझ नहीं पा रही कि आखिर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किसके खिलाफ आवाज उठाई जाए।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय और शीर्ष नेतृत्व से अपील करते हुए कहा कि पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए तथा प्रत्येक पावर हाउस पर पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि सरकार की छवि तभी मजबूत होगी जब आम जनता को यह महसूस होगा कि उनकी समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई हो रही है।
सतीश मम्मा ने बताया कि बुधवार रात कर्मचारियों की कमी के चलते उन्हें और स्थानीय लोगों को पावर हाउस पर काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। देर रात तक वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार, हाइडिल विभाग के अधिकारियों, एसडीओ और अवर अभियंता से लगातार बातचीत के बाद कर्मचारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद कर्मचारियों ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर खराब बिजली व्यवस्था को दुरुस्त किया। पूरी प्रक्रिया में रात करीब डेढ़ बजे तक काम चलता रहा।
उन्होंने बिजली कर्मचारियों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों और कम स्टाफ के बावजूद कर्मचारियों ने रात में काम कर लोगों को राहत पहुंचाई। उन्होंने वन मंत्री, विभागीय अधिकारियों और पूरी टीम का धन्यवाद भी किया।
हालांकि इस घटना के बाद क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में लगातार बिजली संकट और शिकायत निस्तारण की धीमी प्रक्रिया आम लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। लोगों ने मांग की है कि प्रत्येक पावर हाउस पर पर्याप्त स्टाफ तैनात किया जाए ताकि स्थानीय स्तर पर ही शिकायतों का तुरंत समाधान हो सके और लोगों को बार-बार दूर स्थित कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।




