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बरेली कैंट में लौट आया पुराने दौर का चुनावी अंदाज, सपा नेता संजीव सक्सेना के कटआउट बने चर्चा का विषय, दो दशक बाद दिख रहा अलग तरह का प्रचार, टिकट की दौड़ में मजबूत मौजूदगी का दे रहे संदेश

नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन बरेली कैंट विधानसभा सीट पर राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज होती दिखाई देने लगी हैं। समाजवादी पार्टी से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे Sanjeev Saxena इन दिनों अपने अनोखे प्रचार अभियान को लेकर चर्चा में हैं। उनके बड़े-बड़े कटआउट और दीवारों पर दिखाई दे रही वॉल पेंटिंग्स न सिर्फ लोगों का ध्यान खींच रही हैं, बल्कि यह भी संकेत दे रही हैं कि वह चुनावी मैदान में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में जुट गए हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र में जिस तरह का प्रचार संजीव सक्सेना कर रहे हैं, वह पिछले करीब दो दशकों से लगभग देखने को नहीं मिला था। एक समय था जब नेताओं के बड़े-बड़े कटआउट चुनावी माहौल की पहचान हुआ करते थे। शहर के प्रमुख चौराहों और बाजारों में लगे कटआउट जनता को यह संदेश देते थे कि कौन नेता मैदान में सक्रिय है। लेकिन सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार के दौर में यह परंपरा धीरे-धीरे पीछे छूट गई। अब संजीव सक्सेना ने उसी पुराने अंदाज को नए तरीके से फिर चर्चा में ला दिया है।
इन दिनों बीसलपुर चौराहे और फहम लॉन के सामने लगाए गए उनके कटआउट लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन स्थानों से हर दिन हजारों लोग गुजरते हैं और राहगीरों की नजर अनायास ही इन कटआउट पर पड़ जाती है। राजनीतिक हलकों में इसे सिर्फ प्रचार नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि संजीव सक्सेना अपने समर्थकों और पार्टी नेतृत्व दोनों को यह दिखाना चाहते हैं कि वह क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं और चुनावी तैयारी में किसी से पीछे नहीं हैं।
बरेली की राजनीति को करीब से देखने वाले लोग बताते हैं कि वर्ष 2000 के आसपास तक बड़े कटआउट और वॉल पेंटिंग चुनावी प्रचार का अहम हिस्सा हुआ करते थे। उस दौर में किसी नेता की लोकप्रियता और सक्रियता का अंदाजा उसके पोस्टर, बैनर और कटआउट से लगाया जाता था। समय के साथ सोशल मीडिया ने इस भूमिका को काफी हद तक अपने हाथ में ले लिया।
हालांकि आज भी कई नेताओं के कटआउट दिखाई देते हैं, लेकिन वे ज्यादातर किसी कार्यक्रम या आयोजन स्थल तक ही सीमित रहते हैं। संजीव सक्सेना का अभियान इस मायने में अलग माना जा रहा है क्योंकि उनके कटआउट विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख स्थानों पर लगाए गए हैं और लगातार लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
कटआउट के साथ-साथ शहर के कई इलाकों में संजीव सक्सेना की वॉल पेंटिंग भी दिखाई दे रही है। दीवारों पर लिखे गए संदेश और चित्र उनकी राजनीतिक सक्रियता को लगातार लोगों तक पहुंचा रहे हैं। यह तरीका भी पुराने चुनावी दौर की याद दिलाता है, जब दीवारें ही नेताओं का सबसे बड़ा प्रचार माध्यम हुआ करती थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वॉल पेंटिंग और कटआउट का यह मिश्रण संजीव सक्सेना को अन्य संभावित दावेदारों से अलग पहचान दिलाने में मदद कर रहा है। जहां दूसरे नेता मुख्य रूप से सोशल मीडिया या बैठकों तक सीमित हैं, वहीं संजीव सक्सेना ने मैदान में अपनी दृश्य उपस्थिति मजबूत कर दी है।


संजीव सक्सेना की पहचान बरेली में कायस्थ समाज के एक प्रभावशाली और लोकप्रिय नेता के रूप में की जाती है। यही समाज उनकी राजनीतिक ताकत का सबसे बड़ा आधार भी माना जाता है। बरेली कैंट विधानसभा सीट पर कायस्थ मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी बताई जाती है और चुनावी समीकरणों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि समाजवादी पार्टी इस सीट पर सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर उम्मीदवार चुनती है तो संजीव सक्सेना का नाम स्वाभाविक रूप से मजबूत दावेदारों में शामिल रहेगा। उनकी लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय मौजूदगी भी उनकी दावेदारी को मजबूती देती है।
हालांकि संजीव सक्सेना की सबसे मजबूत पकड़ कायस्थ समाज में मानी जाती है, लेकिन उनकी राजनीति केवल इसी वर्ग तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अन्य सवर्ण समाजों के बीच भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है। इसके साथ ही दलित समाज के विभिन्न कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में भी उनकी मौजूदगी लगातार देखी जाती रही है।
यही कारण है कि उन्हें केवल एक समाज के नेता के रूप में नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक संपर्क रखने वाले नेता के तौर पर भी देखा जाता है। राजनीतिक दृष्टि से यह उनकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक मानी जा रही है।
समाजवादी पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों की बात करें तो संजीव सक्सेना शायद ही किसी महत्वपूर्ण कार्यक्रम से अनुपस्थित रहते हों। पार्टी के आंदोलनों, बैठकों, धरनों और जनसंपर्क अभियानों में उनकी नियमित भागीदारी उन्हें संगठन के सक्रिय नेताओं की श्रेणी में रखती है।


पार्टी कार्यकर्ताओं का भी मानना है कि संजीव सक्सेना लंबे समय से लगातार संगठन के लिए काम कर रहे हैं। यही वजह है कि टिकट की चर्चा जब भी शुरू होती है तो उनका नाम प्रमुखता से सामने आता है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि संजीव सक्सेना के कटआउट केवल प्रचार सामग्री नहीं हैं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी हैं। यह संदेश पार्टी नेतृत्व के साथ-साथ जनता तक भी पहुंच रहा है कि वह चुनावी तैयारी को लेकर गंभीर हैं और क्षेत्र में अपनी पहचान को और मजबूत बनाने में जुटे हुए हैं।
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट को लेकर अभी अंतिम फैसला भले दूर हो, लेकिन मौजूदा माहौल में संजीव सक्सेना ने अपने अनोखे प्रचार अभियान से खुद को चर्चा के केंद्र में जरूर ला खड़ा किया है। बीसलपुर चौराहे से लेकर शहर की दीवारों तक दिखाई दे रही उनकी मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि वह आने वाले चुनावी मुकाबले के लिए अभी से मजबूत जमीन तैयार करने में लगे हैं। उनके इस अलग अंदाज ने न केवल पुराने चुनावी दौर की यादें ताजा कर दी हैं, बल्कि बरेली कैंट की राजनीति में भी नई चर्चा छेड़ दी है।

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