नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कॉलेज में फीस वृद्धि के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस समय और मुखर हो गया, जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं बरेली कैंट विधानसभा सीट से वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी टिकट के प्रबल दावेदार डॉ. अनीस बेग छात्रों के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर आए। प्राचार्य कार्यालय के सामने चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और बढ़ाई गई फीस को वापस लेने के साथ ही अतिरिक्त राशि जमा कर चुके विद्यार्थियों को उनका पैसा लौटाने की मांग उठाई।

छात्रों के बढ़ते विरोध और हस्ताक्षर अभियान के बाद कॉलेज प्रशासन की ओर से फीस में करीब 800 रुपये तक की कमी किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि छात्र नेताओं और आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल आंशिक कमी से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका स्पष्ट कहना है कि जिन छात्रों से बढ़ी हुई फीस वसूल की जा चुकी है, उन्हें अतिरिक्त राशि वापस की जानी चाहिए। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक तथा चरणबद्ध तरीके से तेज करने की चेतावनी दी गई है।
इस आंदोलन में छात्रों के साथ खड़े नजर आए डॉ. अनीस बेग ने फीस वृद्धि को गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों के लिए गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि बरेली कॉलेज में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पढ़ाई करते हैं, जिनके परिवार किसान, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़े हुए हैं। ऐसे परिवार पहले ही महंगाई और बढ़ते खर्चों से परेशान हैं। शिक्षा की फीस में अचानक वृद्धि करना उनके बच्चों की पढ़ाई पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है।

डॉ. अनीस बेग ने कहा कि शिक्षा किसी भी छात्र के लिए आर्थिक मजबूरी के कारण दूर नहीं होनी चाहिए। यदि कोई छात्र केवल इसलिए उच्च शिक्षा से वंचित रह जाए कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बढ़ी हुई फीस भरने की अनुमति नहीं देती, तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि छात्र हितों से जुड़े इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर छात्रों के साथ मिलकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि फीस वृद्धि के मामले में कॉलेज प्रशासन को पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। छात्रों और अभिभावकों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि किन मदों में कितनी फीस बढ़ाई गई है और उसकी आवश्यकता क्या है। उनका कहना था कि जब शिक्षा संस्थानों में विभिन्न शुल्कों के नाम पर लगातार आर्थिक भार बढ़ता है तो इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है, जिनके लिए बच्चों की पढ़ाई कराना पहले से ही एक बड़ी चुनौती है।
छात्र नेता रवि पंडित और जावेद गद्दी ने आरोप लगाया कि कॉलेज में विभिन्न मदों के नाम पर लगभग 1200 रुपये से 2000 रुपये तक फीस बढ़ाई गई थी, लेकिन छात्रों को इसका स्पष्ट और संतोषजनक विवरण नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि विरोध और छात्र आंदोलन के बाद करीब 800 रुपये तक फीस में कमी की गई है, लेकिन अभी भी पूरी तरह से बढ़ी हुई फीस वापस नहीं ली गई है।

छात्र नेताओं ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल फीस कम कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भविष्य में छात्रों पर बिना स्पष्ट कारण और पारदर्शिता के अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डाला जाए। उन्होंने मांग की कि जिन विद्यार्थियों ने पहले ही बढ़ी हुई फीस जमा कर दी है, उनकी अतिरिक्त राशि वापस की जाए।
प्राचार्य कार्यालय के सामने चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। आंदोलनकारियों का कहना था कि हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से कॉलेज प्रशासन को यह संदेश दिया जा रहा है कि फीस वृद्धि का विरोध कुछ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी इस फैसले से प्रभावित हैं।

छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कॉलेज बंद कराने, भूख हड़ताल और अनशन जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। छात्रों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन छात्र हितों की अनदेखी होने पर संघर्ष का दायरा बढ़ाया जाएगा।
राजनीतिक दृष्टि से भी इस आंदोलन में डॉ. अनीस बेग की सक्रिय मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार डॉ. बेग लगातार सामाजिक सरोकारों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। छात्र हितों से जुड़े इस आंदोलन में उनका खुलकर समर्थन करना युवाओं और विद्यार्थियों के बीच उनकी सक्रियता को दर्शाता है।

डॉ. अनीस बेग ने स्पष्ट संदेश दिया कि छात्र, गरीब और आम परिवारों से जुड़े मुद्दों पर केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। बरेली कॉलेज फीस वृद्धि का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह छात्र हित और शिक्षा के बढ़ते खर्च का सवाल बन गया है।
हस्ताक्षर अभियान के दौरान डॉ. अनीस बेग के अलावा स्मिता यादव, हिर्देश यादव, नईम साहब, योगेश यादव, सौरभ खन्ना, परवेश यादव, नरेंद्र यादव दीपू, रवि पंडित, लखपत यादव, अनिकेत यादव, एलिजा खान, सिमरन, शिल्पी यादव, प्रियंका मिश्रा, आकांक्षा मिश्रा सहित बड़ी संख्या में छात्र और छात्र नेता मौजूद रहे।

अब सभी की निगाहें कॉलेज प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। छात्रों का कहना है कि फीस में आंशिक कमी आंदोलन की पहली सफलता जरूर है, लेकिन उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक बढ़ाई गई फीस पूरी तरह वापस लेने और अतिरिक्त राशि जमा कर चुके विद्यार्थियों को पैसा लौटाने पर स्पष्ट निर्णय नहीं हो जाता।




