यूपी

फरीदपुर में सपा टिकट की दौड़ : चंद्रसेन सागर ने संगठन, विरासत और जनसंपर्क के सहारे मजबूत किया दावा, पुलिस वालों को पेशाब पिलाने की धमकी और यादवों की नाराजगी विजयपाल सिंह पड़ सकती है भारी, पूनम सेन और शालिनी सिंह की आपसी लड़ाई ने दोनों की मुसीबत बढ़ाई, पढ़ें क्या कहते हैं सियासी समीकरण?

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली

फरीदपुर विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी का टिकट अभी भले तय न हुआ हो, लेकिन दावेदारों के बीच राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कवायद चरम पर आ चुकी है। इस दौड़ में पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंद्रसेन सागर का दावा लगातार चर्चा में है। उनकी दावेदारी की खास बात यह है कि वह इसे केवल पूर्व विधायक डॉ. सियाराम सागर की राजनीतिक विरासत तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि संगठनात्मक गतिविधियों, गांवों में जनसंपर्क, सामाजिक कार्यक्रमों और पार्टी की विचारधारा के प्रचार के जरिए अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर टिकट की दौड़ में शामिल रहे पूर्व विधायक विजयपाल सिंह, पूनम सेन, शालिनी सिंह और कुछ अन्य नेता अब ठंडे पड़ चुके हैं। चंद्रसेन सागर की सक्रियता की वजह से अन्य दावेदारों के समर्थकों में भी वो उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है। वहीं, पूनम सेन और शालिनी सिंह की आपसी लड़ाई और शालिनी सिंह के पटाखा गोदाम पर प्रशासन के छापे ने दोनों की मुसीबत बढ़ा दी है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी हाईकमान भी अब इन दोनों को तवज्जो नहीं दे रहा है।

चंद्रसेन सागर पांच बार फरीदपुर से विधायक रहे स्वर्गीय डॉ. सियाराम सागर के छोटे भाई हैं। वह दो बार ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं और लंबे समय से क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय हैं। परिवार की राजनीतिक पहचान उनके पक्ष में एक आधार जरूर तैयार करती है, लेकिन उनकी मौजूदा रणनीति इससे आगे जाती दिखाई दे रही है। वह गांवों में अपनी मौजूदगी बनाए रखने, पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क रखने और अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने पर जोर दे रहे हैं। इसके विपरीत अन्य टिकट के दावेदार इतने सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं।

विजयपाल सिंह

उनकी सक्रियता केवल यात्रा तक सीमित नहीं रही। बूथ स्तर पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान भी वह अपने क्षेत्र के बूथ पर मौजूद रहे और बूथ लेवल एजेंटों के कामकाज की जानकारी लेते दिखाई दिए। इसके अलावा मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान, सामाजिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक बैठकों में उनकी भागीदारी भी उनकी दावेदारी को लगातार चर्चा में रखती है। सितंबर 2026 में सामने आए स्थानीय राजनीतिक आकलन में भी उनकी गतिविधियों को अन्य दावेदारों के मुकाबले अधिक निरंतर बताया गया था। पूनम सेन ने तो एसआईआर में कोई काम ही नहीं किया था।
चंद्रसेन सागर के सामने सबसे प्रमुख चुनौती पूर्व विधायक विजयपाल सिंह की मानी जा रही थी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने विजयपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह सपा सरकार बनने पर पुलिस वालों को पेशाब पिलाने की धमकी देते नजर आ रहे थे। उधर, यादव बाहुल्य इस सीट पर यादव समाज आज भी उनसे नाराज है। यह नाराजगी इसलिए है कि जब विजयपाल सिंह बसपा से विधायक बने थे तो उन्होंने यादवों के खिलाफ कथित तौर पर कई फर्जी मुकदमे दर्ज कराए थे। अब सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस वालों को पेशाब पिलाने की धमकी देने वाले विजयपाल सिंह को फरीदपुर में पार्टी का चेहरा बनाएगी? क्या अखिलेश यादव अपने ही समाज के लोगों की भावनाओं को दरकिनार कर उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज करवाने वाले विजयपाल को विधानसभा भेजना चाहेंगे?

पूनम सेन और शालिनी सिंह।

फरीदपुर की राजनीति में डॉ. सियाराम सागर की विरासत का सवाल भी अहम है। उनके परिवार से चंद्रसेन सागर के अलावा उनकी पुत्रवधू कल्पना सागर भी टिकट की दावेदारी कर रही हैं जिनके पति डीके सागर को सियाराम सागर ने अपने जीवन के अंतिम समय में अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया था।

कल्पना सागर और चंद्रसेन सागर

इस परिवार की दावेदारी का असर केवल टिकट तक सीमित नहीं है। पार्टी को यह भी देखना होगा कि उम्मीदवार का चयन होने के बाद परिवार और उससे जुड़े समर्थकों को किस तरह साथ रखा जाएगा।
फरीदपुर में टिकट का सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। ऐसे में सपा के लिए केवल जातीय समीकरण देखना पर्याप्त नहीं होगा। उम्मीदवार की क्षेत्र में स्वीकार्यता, बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती, दलित मतदाताओं तक पहुंच और पिछड़े वर्गों के साथ सामाजिक तालमेल भी निर्णायक महत्व रखेंगे।

चंद्रसेन के पक्ष में अनुभव और निरंतरता, लेकिन संगठन की परीक्षा बाकी
चंद्रसेन सागर की दावेदारी का सबसे मजबूत पक्ष उनकी राजनीतिक निरंतरता है। वह टिकट की घोषणा का इंतजार करने के बजाय पहले से क्षेत्र में काम करते दिखाई दे रहे हैं। समाजवादी संदेश यात्रा के जरिए उन्होंने पार्टी के प्रदेश नेतृत्व तक अपनी राजनीतिक पहल पहुंचाई। शिवपाल सिंह यादव की ओर से यात्रा को हरी झंडी मिलना भी उनके लिए संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रहा। इसके अलावा पूर्व विधायक डॉ. सियाराम सागर के परिवार से जुड़ाव उन्हें स्थानीय राजनीति में एक अलग पहचान देता है।
फरीदपुर की सियासत में इस समय मुकाबला केवल एक टिकट पाने का नहीं, बल्कि यह साबित करने का है कि कौन भाजपा के खिलाफ सपा का व्यापक आधार तैयार कर सकता है। चंद्रसेन सागर ने लगातार गतिविधियों के जरिए अपनी दावेदारी को चर्चा के केंद्र में रखा है। अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव का नेतृत्व किसे प्राथमिकता देता है?
फिलहाल उपलब्ध राजनीतिक गतिविधियों के आधार पर चंद्रसेन सागर की दावेदारी को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के सर्वे, संगठनात्मक रिपोर्ट और चुनावी समीकरणों के आधार पर ही होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *