नीरज सिसौदिया, बरेली बरेली की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां चुनावी राजनीति मुख्य रूप से जातीय समीकरणों, धार्मिक पहचान और परंपरागत वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमती थी, वहीं अब राजनीतिक दल और नेता सामाजिक स्वीकार्यता के नए रास्ते तलाशते दिखाई दे रहे हैं। मढ़ीनाथ […]

