रामचंद्र कुमार अंजाना, बोकारो थर्मल
सीसीएल कथारा प्रक्षेत्र के गोबिंदपुर परियोजना में 16 अप्रैल को कोयला उधोग में आहुत हडताल को लेकर गुरुवार को संयूक्त मोर्चा के बैनर तले एक सभा की गयी। सभा की अध्यक्षता यूसीडब्ल्यूयू के क्षेत्रीय सचिव रामेश्वर साव एवं संचालन विश्वनाथ महतो ने किया। सभा को संबोधित करते हुए यूनाईटेड कोल वर्कर्स यूनियन के महामंत्री लखनलाल महतो ने कहा कि भारत सरकार फिर से कोयला खदान निजी मालिकों के हाथों सौंपने का निर्णय लिया है। अगर कोयला खदान निजी मालिकों को सौंपा गया तो मजदूरों की स्थिति क्या होगा, मजदूरों अपनी भविष्य को लेकर खुद तय करें। वर्ष 2030 तक जितनी कोयले की जरूरत है कोल इंडिया समेत सिंगरैनी कोल कम्पनी एवं आवंटित की गई कोयला खदानें पूरा करने में सक्षम है। अब कोई नया कोयला खदान निजी मालिकों को देने की आवश्यकता नही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोयला खदानाें को निजी मालिकों के हाथो में सौंपने का क्या परिणाम होता है, झरिया, रानीगंज एवं अन्य कोयला खदान क्षेत्र इसका जीता जागता एक मिसाल है। राष्ट्रीयकरण के पहले निजी मालिकों द्वारा कोयला मजदूरां के साथ किस तरह का अमानवीय व्यवहार होता था यह हम अभी भूले नही है निजी मालिकां के हाथां में कोयला खदानां सौंपने से कोल इंडिया भी प्रभावित होगा। क्षेत्रीय सचिव रामेश्वर साव ने सभी कोल मजदूरों को आगामी 16 अप्रैल को होने वाले एक दिवसीय हड़ताल को सफल बनाने व चट्टानी एकता का परिचय देने का अपील किया । इस सभा मे सीटू के सहायक महामंत्री भागीरथ शर्मा, बीएमएस के बिजयानंद प्रसाद, आरसीएमएस के अंजनी त्रिपाठी, जेएमएस के कामोद सिंह आदि ने भी संबोधित किया। इस मौके पर परन महतो, बुधन प्रजापति, रीतलाल महतो, टिकैत महतो, विकास सिंह, राजकुमार साव, श्याम बिहारी सिंह सहित संयुक्त मोर्चा के अधिकारी व सैकड़ों मजदूर उपस्थित थे ।

कोयला खदान को निजी मालिकों से बचाना होगा : लखनलाल महतो




