झारखण्ड

नक्सलियों ने विकास कार्य में लगे मुंशी को गोलियों से भूना, ट्रैक्टर और जेसीबी में लगाई आग

बोकारो थर्मल। रामचंद्र कुमार अंंजाना 
बोकारो जिला के गोमिया थाना क्षेत्र अंतर्गत लुगु पहाड़ के तलहटी में कैरा झरना के निकट नक्सलियों ने सड़क निर्माण करा रहे मुंशी को गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

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गोमिया थाना से 15 किलोमीटर दूर तुलबुल पंचायत के पिंडरा गांव निवासी रमेश मांझी उम्र 50 को नक्सलियों के दस्ते ने गोली मारकर हत्या कर दी है। रमेश मांझी झुमरा एक्शन प्लान के तहत पिंडरा से टूटी झरना तक सड़क निर्माण में मुंशी का काम कर था। इसी बीच लगभग दिन के दस बजे नक्सलियों के हथियार बंद दस्ता घटनास्थल पर पहुंचा और वहां काम कर रहे सभी मजदूरों को भगा दिया। मुंशी रमेश मांझी को नक्सलियों ने अपने कब्जे में रखा। कुछ देर बाद उसे दो तीन गोली मारकर हत्या कर दी। सड़क निर्माण में लगे जेसीबी, मुंशी का ट्रैक्टर और उसका मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया।

 

इस संबंध में सीआरपीएफ के अभियान एसपी उमेश कुमार ने बताया कि नक्सलियों के दस्ते ने सड़क निर्माण में लगे संवेदक के मुंशी रमेश मांझी की गोली मारकर हत्या कर दी है। प्रथम दृष्टया यह घटना लेवी वसूली को लेकर लगता है। उन्होंने कहा कि इस घटना को अंजाम देने में एक करोड़ के इनामी नक्सली मिथिलेश सिंह के दस्ते का काम है। उन्होंने कहा कि आबादी वाले इलाके से दूर घने जंगल में घटना को अंजाम दिया है। बेरमो के एसडीपीओ अंजनी अंजन, गोमिया थाना प्रभारी विनय कुमार सहित सीआरपीएफ के जवान घटनास्थल पर पहुंच कर शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए तेनुघाट अनुमंडल अस्पताल भेज दिया गया है।

मृतक रमेश मांझी की दो पत्नी है। पहली पत्नी मुक्ता सोरेन से तीन बेटी और एक बेटा है जबकि दूसरी पत्नी सेवती देवी से एक लड़का और एक लड़की है। पुलिस मृतक के दोनों पत्नी को घटना स्थल पर लेकर आई और उसकी शिनाख्त कराई। मृतक रमेश मरांडी 50 वर्ष के थे। वे तुलबुल पंचायत के पिंडरा गांव निवासी थे। मुंशी रमेश मरांडी की हत्या के बाद नक्सलियों ने विकास कार्य में लगे ट्रैक्टर और जेसीबी में आग भी लगा दी। गोमिया थाना क्षेत्र के तुलबुल में टूटीझरना के समीप नक्सली घटना हुई। टूटीझरना को नक्सलियों का गढ़ माना जाता है। घटना के पीछे माओवादी मिथिलेश सिंह उर्फ दुर्योधन महतो व दस्ते का नाम आ रहा है। धनबाद के तोपचांची प्रखंड के मिथिलेश पर एक करोड़ का इनाम है।

झुमरा पहाड़ को नक्सल फ्री जोन बनाना पुलिस के लिए कठिन डगर


हजारीबाग-बोकारो-रामगढ़ जिला के बाॅर्डर में बसा झुमरा पहाड़ को नक्सल फ्री जोन बनाना पुलिस के लिए कठिन डगर ही नहीं बल्कि एक बड़ी चुनौती है। सिर्फ पुलिस सीआरपीएफ छापामारी के जरिए झुमरा पहाड़ को नक्सल फ्री जोन होने का दावा करने वाले झारखंड के शीर्ष अधिकारियों के बयान पर माओवादियों ने शुक्रवार को एक कंपनी के सुपरवाइजर रमेश मंराडी की हत्या कर कालिख पोत डाली है। माओवादियों ने यह साबित कर दिया है कि उन्हें झुमरा पहाड़ से बेदखल करना नामुमकिन है। झुमरा पहाड में माओवादी संगठनों का सेफ प्लेटफार्म माना जाता है और पूरे झुमरा पहाड पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से माओवादियों का कब्जा है। जहां राष्ट्रीय स्तरीय के अधिवेशन आयोजित होते हैं और संगठन के बड़े-बड़े थिंक टैंक का पूरे देश के लिए यहीं से फरमान जारी होता है। झुमरा पहाड के आसपास का इलाका जो पिछलंे 80 के दशक से नक्सलियों के कब्जे में रहा हो, ऐसे में महज कुछ साल के साधारण पुलिस अभियान से कहा जाना कि झुमरा पहाड़ नक्सल फ्री जोन हो गया। वह भी पुलिस के वरीय अधिकारियों की तरफ से, यह हास्यास्पद है। नक्सल फ्री जोन होने का दावा करने वाले पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को शायद ये मालूम नहीं है कि झुमरा पहाड़ की चोटी तक जाने वाली जिस सड़क परिवहन मार्ग को माओवादियों ने पिछलें कई सालों से बंद कर रखा है। बाद में उसे भी पुलिस के सहयोग सड़क काम लगभग 80 फीसदी पूरी हुई है। माओवादियों के लिए ऊर्वरा रही है झुमरा पहाड़ की धरती, किले खाली कराना पुलिस के लिए लंबे समय से बड़ी चुनौती है।

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झुमरा पहाड़ माओवादियों का सेफ प्लेटफाॅर्म, पुलिस के लिए सिरदर्द बना मिथिलेश
भाकपा माओवादी के लिए झुमरा पहाड़ का बड़ा महत्व है। इसे नक्सलियों का अभेद दुर्ग कहा जाता है। माओवादियों का हथियारबंद दस्ता करीब डेढ़ माह से झुमरा पहाड़ में डेरा डाले हुए हैं। इसकी सटीक सुचना बोकारो पुलिस को भी थी। करोडों का इनामी माओवादी मिथिलेश उर्फ दुर्योधन महतो अपने जेड़ सुरक्षा के अतिरिक्त जोन के हथियार बंद दस्ता के संगठन की आंतरिक ढांचा को मजबूत करने करने के लिए झुमरा पहाड़ पहुंचा है। पुलिस ने इस गिरफतार करने के लिए लाख से करोड रूपया तक की इनाम राशि रखी है। लेकिन पुलिस को कुछ खास कामयाबी नही मिली है। सुत्रों का कहना है मिथिलेश उर्फ दुर्योधन महतो को गांव के लोगों से संबंध बहुत अच्छा ओर विश्वास के कारण इसके खिलाफ कोई सुराग पुलिस को नही मिल पाती है। माओवादी अपनी मजबुत किला को मजबुज करने लिए झुमरा पहाड़ पर संघर्ष करते नजर आ रहें है। लाल सलाम की गुंज लगभग बंद सी हो गयी है, कभी-कभार सिर्फ गोलीबारी की गुंज उठती रहती है। झुमरा पहाड स्थित पुलिस व सीआरपीएफ कैंप को हटाने के लिए माओवादियों ने 90 करोड़ की पेशकश भी कर चुकी है। इसके बाद से पुलिस वहां पर लगातार कार्रवाई जारी रखी है। कई बार पुलिस को सफलता मिली है, तो कई बार मुंह के बल चोट खानी पड़ी है। शुक्रवार की घटना से पुलिसिया कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

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