झारखण्ड

तामिलनाडु में फंसे 123 मजदूरों का सब्र का टूटा बांध, पैदल ही निकल पड़े अपने गांव

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बोकारो थर्मल। रामचंद्र कुमार अंजाना 
बोकारो, गिरीडीह, धनबाद, हजारीबाग और उडीसा के 123 प्रवासी मजदूर तामिलनाडु में फंसे हैं। लॉकडाउन के कारण न तो जिस कंपनी में कार्यरत थे, वहां से सहयोग मिला और न ही सरकार से। इंतजार करते-करते आखिरकार इन मजदूरों का सब्र का बांध टूटा और पैदल से अपने-अपने गांव निकल पड़े। अपने गांव आने में इन मजदूरों को करीब 50 किलोमीटर की दूरी तय कर लिए थे। लेकिन तामिलनाडु के कांचीपुरम जिला के तालावकम पुलिस ने चैंगलवटू फोर लाइन से पकड़कर थाना के समीप मैरेज हाॅल में कोरोनटाइन कर दिया गया है। 13 मई को 123 मजदूर अपने-अपने गांव के लिए पैदल निकल पड़े थे। ऊपरघाट बरई निवासी प्रवासी मजदूर बिजय कुमार महतो व कुलदीप महतो ने तामिलनाडु स्थित कांचीपुरम के क्रेशर मील में चालक का काम करते थे। लॉकडाउन के कारण कंपनी मालिक ने सहयोग करने से मना कर दिया। किसी तरह दिन काटने को मजबूर हुए। कई बार अपने गांव वापस जाने की गुहार भी लगायी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया, तो थक-हार कर 123 मजदूरों ने पैदल ही अपने घर जाने को मजबूर हुए। मजदूरों ने दूरभाष पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि जिस कंपनी में काम करते हैं, लॉकडाउन के कारण वहां से भी मदद नहीं मिली। इन मजदूरों का कंपनी के पास तीन माह का मजदूरी बकाया हो गया है, लेकिन इस संकट की घड़ी में कंपनी भी हाथ पीछे खींच लिया। इससे उनलोगों के सामने विकट स्थिति उत्पन्न हो गयी। पास के गांव के ग्रामीणों द्वारा मिले कुछ अनाज से कुछ दिनों तक जीवन यापन हुआ, लेकिन उसके बाद स्थिति विकट होने लगी। प्रवासी मजदूर बिजय कुमार महतो ने बोकारो जिले के 34 जिसमें नावाडीह व ऊपरघाट के मजदूर शामिल है। इसके अलावे गिरीडीह, हजारीबाग, धनबाद और उडीसा के मजदूर शामिल है।
मां की तबीयत बिगड़ी, महाराष्ट्र से बाइक से पहुंचा ऊपरघाट
महाराष्ट्र में अपनी जीवन की गाड़ी किसी तरह से मजदूरी कर खीच रहें ऊपरघाट के खोरठा गायक दिलीप कुमार महतो की मां की तबीयत बिगड़ी तो बाइक से अपना गांव पहुंच गए। हालांकि गायक दिलीप को पंचायत में बने कोरोटाइन सेंटर में कोरोटाइन होना पड़ा। दिलीप कुमार महतो का कहना है कि मां की बिमार हालात सुनकर किसी अनहोनी को लेकर हजारों मील दिनरात बाइक चलाकर घर पहुंचा। बाहर से मां की स्थिति देखी। लाॅकडाउन में फंसे बेटे को देख मां की आंखें भर गयी और फुट-फुटकर रोने लगी।
फोटो-तामिलनाडु में नावाडीह व ऊपरघाट के प्रवासी मजदूर पुलिस कोरोनटाइन में।

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