पंजाब

आखिर कहां छुप कर बैठे हैं सुनील ज्योति को नथ थमाने वाले कमलजीत सिंह भाटिया? मेयर राजा की नाकामियों पर क्यों हैं खामोश

नीरज सिसौदिया, जालंधर
अकाली-भाजपा गठबंधन के निगम के कार्यकाल में दो बार लगातार सीनियर डिप्टी मेयर के पद पर विराजमान होने के बाद अपने ही सहयोगी दल के मेयर सुनील ज्योति की नाक में दम करने वाले कमलजीत सिंह भाटिया को शायद अब शहर में विकास की गंगा बहती नजर आने लगी है. शायद यही वजह है अब वह न तो मेयर को नथ थमाने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं और न ही उनकी नाक में दम करने की हिमाकत करना जरूरी समझ रहे हैं. अपने सहयोगी दल के मेयर सुनील ज्योति का जितने पुरजोर तरीके से कमलजीत सिंह भाटिया ने विरोध किया था उतनी ही खामोशी अब भाटिया की जुबां पर देखने को मिल रही है. यही वजह है कि अब शहर में यहां तक चर्चा होने लगी है कि भाटिया कहीं राजनीति से संन्यास तो नहीं लेने जा रहे.
दरअसल, जालंधर नगर निगम के चुनाव को लगभग ढाई साल का वक्त पूरा हो चुका है लेकिन शहर में विकास की गाड़ी चंद कदमों का फासला भी तय नहीं कर सकी है| यही वजह है कि मेयर जगदीश राज राजा अब अपनी ही पार्टी के नेताओं के भी निशाने पर आ चुके हैं लेकिन हैरानी की बात है कि सुनील ज्योति के कार्यकाल के दौरान उन्हें कठघरे में खड़ा करने वाले उनकी ही पार्टी और सहयोगी दल के नेता अब कहीं नजर नहीं आ रहे| हैरानी की बात है कि मेयर जगदीश राज राजा की नाकामियों की ओर वह आंखें मूंदे बैठे हुए हैं| यही वजह है कि अब विपक्ष की भूमिका भी सत्ता पक्ष के ही कुछ पार्षद निभा रहे हैं| मेयर सुनील ज्योति पर सवालिया निशान उठाने वाले और उन्हें निगम हाउस में नथ देकर सदन की गरिमा को तार-तार करने वाले पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया को लगता है अब शहर में सब कुछ ठीक-ठाक नजर आ रहा है| कमलजीत सिंह भाटिया अब मेयर के खिलाफ कोई भी विरोध प्रदर्शन करते नजर नहीं आ रहे हैं| मीना बाजार भले ही गुलजार हो लेकिन लगता है कि भाटिया के पास अब नथ का स्टॉक खत्म हो चुका है, इसलिए वह जगदीश राजा को नथ देने की गुस्ताखी करने से कतरा रहे हैं| शहर के चुनिंदा इलाकों में अपनी क्षमता के अनुसार विकास करवाने वाले सुनील ज्योति को नथ भेंट करने में भले ही कमलजीत सिंह भाटिया अपनी शान समझ रहे हों लेकिन राजा की ढाई साल की नाकामियों पर उन्हें कमलजीत सिंह भाटिया क्या तोहफा देंगे यह जाहिर करने से क्यों कतरा रहे हैं? भाटिया के पास विकल्प अभी खुला हुआ है| यह वक्त एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने का है| भाटिया भले ही खुद पार्षद न हों लेकिन एक जनप्रतिनिधि की हैसियत से क्या अब जनता की आवाज उठाना भाटिया का फर्ज नहीं रह गया या फिर भाटिया का जनता प्रेम सिर्फ सुनील ज्योति के विरोध तक ही सीमित था? या कहीं ज्योति के विरोध के पीछे कोई बड़ा खेल तो नहीं था?
दरअसल, सुनील ज्योति के मेयर पद के कार्यकाल के दौरान सदन की बैठक में सबसे तेज सिर्फ एक ही आवाज सुनाई देती थी जो विपक्ष के नेता जगदीश राजा के सुरों में सुर मिलाती नजर आती थी. यह आवाज तत्कालीन सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया की थी. कार्यकाल के आखिरी साल तो भाटिया ने हद ही कर दी. उन्होंने सदन में अपने ही सहयोगी दल के मेयर को नथ भेंट कर दी थी. भाटिया की इस हरकत ने न सिर्फ राजनीति को शर्मसार किया बल्कि यह घटना जालंधर के इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई. उस वक्त भाटिया ने इसे जनता की लड़ाई करार दिया था. लेकिन अब जबकि शहर के विकास पर पूरी तरह से ब्रेक लग चुका है तो कमलजीत सिंह भाटिया की वह बुलंद आवाज कहीं सुनाई नहीं देती| कहीं भाटिया अज्ञातवास पर तो नहीं चले गए| यह कैसी जनसेवा है जो सिर्फ अपनी ही पार्टी का विरोध करने की इजाजत देती है| विपक्षी दलों का विरोध करने की हिम्मत भाटिया जैसे नेता क्यों नहीं जुटा पा रहे हैं| शहर की टूटी सड़कें, जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर और जाम सीवरेज अब कमलजीत सिंह भाटिया को क्यों नजर नहीं आ रहे| मेयर जगदीश राजा के कार्यकाल में शहर का जो हाल हुआ है उस हिसाब से तो राजा ज्योति से भी बड़े तोहफे के हकदार हैं| तो क्या भाटिया फिर कोई ऐसा तोहफा कांग्रेसी मेयर को देंगे जो नगर निगम के इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाए? क्या भाटिया की जनसेवा सिर्फ चिंतपूर्णी मंदिर तक बसें पहुंचाने तक ही सीमित रह गई है? क्या भाटिया नहीं जानते कि एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका क्या होती है? अकाली-भाजपा गठबंधन के नगर निगम के कार्यकाल को तो भाटिया की कारगुजारी के चलते एक काले अध्याय के रूप में हमेशा जाना जाएगा लेकिन राजा के इस नाकाम कार्यकाल को कमलजीत सिंह भाटिया किस रूप में दर्ज कराना चाहेंगे? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब जालंधर की जनता पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया से जानना चाहती है| जनता को इंतजार है कि उनके प्रिय नेता कमलजीत सिंह भाटिया एक बार फिर अपने वही तेवर दिखाएं जो उन्होंने मेयर सुनील ज्योति के कार्यकाल में विकास की अनदेखी करने पर दिखाए थे ताकि शहर का विकास फिर से पटरी पर आ सके| सिर्फ कमलजीत सिंह भाटिया ही नहीं बल्कि उन सभी जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर एक सशक्त विपक्ष की भूमिका निभानी होगी जो अपने सहयोगी दल के मेयर के खिलाफ हमेशा मोर्चा खोलकर डटे रहते थे| अगर ये जनप्रतिनिधि ऐसा नहीं करते हैं तो निश्चित तौर पर उनकी मंशा सवालों के घेरे में आ जाएगी और वे बेनकाब हो जाएंगे| बहरहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि कमलजीत सिंह भाटिया अपने इस सियासी वनवास से कब बाहर निकलते हैं|

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