उत्तराखंड

यौन शोषण के आरोपी भाजपा विधायक को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही पुलिस, बयान तक दर्ज नहीं कर सकी, महिला आयोग की हुई एंट्री

नीरज सिसौदिया, देहरादून
फौजी की पत्नी के यौन शोषण के आरोप में घिरे द्वाराहाट विधायक महेश नेगी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं लेकिन पुलिस की सुस्ती मामले में कई सवाल भी खड़े कर रही है. पुलिस विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना तो दूर अब तक उसके बयान तक नहीं ले सकी है. वहीं मामले में राज्य महिला आयोग की भी एंट्री हो गई है. पीड़िता ने सुरक्षा को लेकर महिला आयोग को पत्र लिखा था जिस पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विजय बड़थ्वाल ने अल्मोड़ा के एसएसपी को पत्र लिखकर पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है. साथ 29 अगस्त तक रिपोर्ट देेेेने को कहा है.
हैरानी की बात है कि पुलिस ने विधायक की पत्नी रीता नेगी की शिकायत पर पीड़िता के खिलाफ तो रिपोर्ट दर्ज कर ली लेकिन पीड़िता की शिकायत पर अब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं की है. विधायक को बयान दर्ज कराने के लिए भी न्योता दिया जा रहा है. सोमवार को विधायक के बयान दर्ज होने थे लेकिन नहीं हो सके क्योंकि व्यस्तता के चलते विधायक को बयान दर्ज कराने का समय नहीं मिला था. वहीं, पीड़िता का आरोप है कि विधायक उसे हिमाचल और नेपाल के होटलों में भी ले गया था जहां उसका यौन शोषण किया. वह अभी भी अपनी बेटी और विधायक के डीएनए टेस्ट की मांग पर अड़ी है. लेकिन विधायक की ओर से मामले को साजिश करार दिया जा रहा है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर विधायक सही हैं तो फिर वह डीएनए टेस्ट से क्यों कतरा रहे हैं. सरकार उनकी है और पुलिस भी उनकी है तो फिर विधायक पुलिस का सामना क्यों नहीं कर रहे. पीड़िता पर ब्लैकमेलिंग का मामला दर्ज कर दिया गया है लेकिन सोचनीय पहलू यह है कि अगर महिला को ब्लैकमेल करके रुपए ही कमाने थे तो उसने विधायक जैसा खतरनाक लक्ष्य क्यों चुना? जबकि वो किसी बड़े बिजनेस मैन को निशाना बनाती तो ज्यादा पैसे कमा सकती थी और उसमें विधायक की तरह खतरा भी नहीं होता.वो भी सत्ताधारी पार्टी के विधायक को ब्लैकमेल करने की बात हजम नहीं हो रही. संभव है कि पीड़िता और विधायक के बीच जो कुछ भी हुआ होगी वो सहमति से हुआ होगा लेकिन अगर ये दोनों की सहमति से ही हुआ तो भी शादीशुदा होने के बावजूद दूसरी शादीशुदा महिला से नाजायज ताल्लुकात रखना भी कानूनन अपराध है. ऐसे में विधायक महेश नेगी पर शिकंजा कसना तय है. सियासी रसूख के चलते भले ही महेश नेगी के खिलाफ कार्रवाई दबा दी जाए लेकिन जनता के बीच उनकी छवि धूमिल होने से कोई नहीं रोक सकता.
पुलिस ने महिला के फौजी पति को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है. अब अगर नेगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होता तो पुलिस भी सवालों के घेरे में आ जाएगी. बहरहाल नेगी चौतरफा घिर चुके हैं. पुलिस ने रेस्टोरेन्ट की सीसीटीवी फुटेज लेने की कोशिश तो की लेकिन उसके हाथ खाली ही रहे.

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