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25 साल की हो गई शाहरूख और काजोल की सुपरहिट फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे, जानिये पर्दे के पीछे की कुछ खास बातें

पूजा सामंत, मुंबई
‘यशराज फिल्म्स’ के बिना हिंदी सिनेमा का जिक्र पूरा नहीं हो सकता. बॉलीवुड को कई यादगार फिल्मों का तोहफा देने वाला यशराज बैनर आज अपनी 50वीं वर्षगांठ मना रहा है. इसी के इस बैनर तले बनी काजोल और शाहरूख खान स्टारर सुपरहिट फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे ने भी 25 साल का सफर तय कर लिया है. यशराज बैनर की स्थापना बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशकों में से एक यश चोपड़ा ने की थी. प्रख्यात लेखक -निर्माता और निर्देशक बी. आर. चोपड़ा के छोटे भाई यश चोपड़ा पूरी दुनिया में रोमांटिक फिल्मों के लिए खास तौर पर जाना जाता है. आज से 25 वर्ष पहले बनायीं गई उनकी फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे ‘ने सफलता -लोकप्रियता के नए आयाम बनाए। राज मल्होत्रा -सिमरन का प्यार आज भी लोगों के दिलों में ताजा है. शाहरुख़ खान और काजोल को इस फिल्म की सफलता ने सुपर स्टार्स बना दिया। आदित्य चोपड़ा (यश चोपड़ा के बड़े बेटे आदित्य चोप्रा) ने इसी फिल्म से बतौर निर्देशक डेब्यू किया और आगे चलकर वे टॉप के निर्देशकों की श्रेणी में आ गए।
आइये जानते हैं फिल्म से जुडी कुछ ख़ास बातें जिसने इस फिल्म को माइल स्टोन बनाया.

1. भारतीय सिने इतिहास में एक ही सिनेमा थिएटर -मराठा मंदिर में पूरे 25 वर्षों से नॉन स्टॉप चलने का रिकॉर्ड ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे ‘ ने बनाया. संजोग की बात यह कि जब ‘दिलवाले दुल्हनिया… ‘ फिल्म 1999 में रिलीज हुई तो उस वर्ष यशराज बैनर ने 25 वर्ष पूरे किये और अब ‘डीडीएलजे ‘ (दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे ) संक्षिप्त नाम से सम्बोधित किया जाता है. फिल्म ने अपने रिलीज के जब 25 वर्ष पूरे किए तो यशराज बैनर को पूरे पचास वर्ष का हो चुका है. बस, अफ़सोस, रुपहले पर्दे पर रोमांस -प्यार -मोहब्बत को एक नयी परिभाषा में गढ़ने वाले रोमांस के जादूगर यश चोपड़ा अब इस दुनिया में नहीं रहे.

2. डीडीएलजे की शूटिंग यश जी ने सितम्बर 1994 से अगस्त 1995 के दौरान लन्दन , स्विट्ज़रलैंड, इटली के अलावा हिंदुस्तान में पंजाब में की थी. आऊटडोर शूटिंग पूरी कर फिल्म को अक्टूबर 1995 यानि दिवाली के समय रिलीज किया गया था।

3. फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन महज एक महीने में पूरा किया गया और बैक ग्राऊंड स्कोर के लिए संगीतकार जोड़ी जतिन ललित को दस दिनों का ही समय दिया गया। सभी काम पर यश जी का पूरा-पूरा ध्यान था।

4. आदित्य चोपड़ा ने 18 वर्ष की उम्र में अपने पिता यश चोपड़ा को असिस्ट करना शुरू कर दिया था। डीडीएलजे की कहानी उन्होंने 21 वर्ष की उम्र में लिखी थी. कहानी लिखने के बाद उन्होंने अपने पिताजी को सुनायी और जब आदित्य चोपड़ा 24 वर्ष के हुए तो फिल्म के निर्देशन की बागडोर यश जी ने अपने बेटे के हाथों में थमा दी।

5- डीडीएलजे की शूटिंग शुरू हुई तो शाहरुख़ खान 30 के और काजोल मात्र 21 की थी.

6- आदित्य के खास दोस्त करण जौहर और आदित्य के छोटे भाई उदय चोपड़ा ने इस फिल्म के लिए सहायक निर्देशक का काम किया। उदय चोपड़ा ने इस फिल्म मेकिंग पर एक शॉर्ट फिल्म बनायी. फिल्म रिलीज होने से दो -तीन दिन पहले दूरदर्शन पर इस फिल्म की मेकिंग दिखायी गयी। दूरदर्शन पर किसी आने वाली फिल्म के रिलीज से पहले उसकी मेकिंग पहली बार दिखायी गयी।

7. यश चोपड़ा ने जब काजोल को सिमरन का रोल सुनाया तो उन्होंने इस रोल को सहर्ष स्वीकारा लेकिन उस दौर में शाहरुख़ ‘बाजीगर ”डर ‘फिल्म में नेगेटिव -एंटीहीरो के किरदार निभाकर सुर्खियां बटोर चुके थे. वे ऐसे में ‘डीडीएलजे ‘ में राज मल्होत्रा का सॉफ्ट-रोमांटिक हीरो बनना नहीं चाहते थे. यश चोपड़ा को शाहरुख़ को काफी मनाना पड़ा और आख़िरकार यश जी की बात शाहरुख़ टाल नहीं सके.

8. आदित्य ने फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले फिल्म की कहानी जब टीम मेंबर्स को सुनायी तो कई लोगों को उतनी पसंद नहीं आयी सिवाय गीतकार आनंद बख्शी के. उन्होंने कहा , फिल्म थिएटर से उतरेगी नहीं
और वाकई आनंद बख्शी जी का कहना शत -प्रतिशत सच साबित हुआ।

10. डीडीएलजे फिल्म की कहानी जब पर्दे पर शुरू होती है , कहानी में जब राज परीक्षा में फेल हो जाता है तो उसके पिताजी-अनुपम खेर अपने पुरखों के नाम लेकर बेटे को समझाते हैं कि किस तरह उनके पूर्वज कैसे फेल हो चुके हैं. असलियत में अनुपम खेर ने अपने सचमुच के पूर्वजों के नाम लिए थे पर फिल्म रिलीज होने से पहले सभी चाचाओं की माफ़ी मांग ली. फिल्म देखने के बाद इन चाचाओं का क्रोध इतना ठंडा हुआ कि उन्होंने अनुपम को कहा, बच्चे , तूने हमें वर्ल्ड फेमस कर दिया , हम तेरे शुक्रगुजार है.
11- फिल्म के क्लाइमैक्स में शाहरुख़ खान के कहने पर फाइट सीक्वेंस बनाया गया, आदित्य और यश जी ने पहले फाइट सीक्वेंस रखा ही नहीं था। दोनों पिता-पुत्र एक्शन के विरुद्ध थे। शाहरुख़ को लग रहा था ‘डर , बाजीगर इमेज इतनी प्रभावी है कि वो ही सिर चढ़कर बोलेगी .
लेकिन अनुभवी यश जी ने ‘डीडीएलजे ‘ फिल्म के जरिये शाहरुख़ की एक्शन -नेगेटिव इमेज बदलकर उसे ‘किंग ऑफ़ रोमांस ‘ बनाया.

11. तुझे देखा तो ये जाना सनम… गीत की शूटिंग गुरुग्राम -हरियाणा के खेतों में हो रही थी। वहां के किसान इस बात से चिंतित हुए कि शाहरुख -काजोल के खेतों में घूमने -फिरने से उनका नुकसान न हो जाए. जब किसानों ने आपा खोया, यूनिट परेशान हुई कि उनका गुस्सा कैसे शांत किया जाए. ऐसे में शाहरुख़ ने किसानों को उनकी भाषा -जबान और लहजे में उन्हें समझाया और किसान शाहरुख़ की बात से मान भी गए. दरअसल, शाहरुख़ दिल्ली में पले -बढे़, दिल्ली -गुड़गांव की आधी आबादी पंजाबी -हरियाणवी में बोलने के कारण शाहरुख़ के लिए मुश्किल नहीं था उनकी जबान में बात कर उस विवाद को खत्म करना.. सभी का दिल जीत लिया दिल्लीवाले शाहरुख़ ने.

12. डीडीएलजे पहली फिल्म है जिसने बॉलीवुड के साथ शाहरुख़ खान के लिए भी एनआरआय मार्केट के दरवाजे खोल दिए. इस फिल्म का नायक राज मल्होत्रा खुद एनआरआय कहानी में दिखाया है। एक एनआरआय युवक इंडिया में आकर अपनी गर्लफ्रेंड के घर के सभी सदस्यों का दिल जीत लेता है , भारतीय संस्कारों के परिवेश में बनी इस फिल्म में ‘देसी ‘ और ‘परदेसी ‘सभी का मन मोह लिया.

 

13. दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे ‘ यह टायटल अनुपम खेर की पत्नी अभिनेत्री किरण खेर ने सुझाया था।

14- काजोल -शाहरुख़ -परमीत सेठी -मंदिरा बेदी और अन्य कलाकारों पर फिल्माया गया गीत ‘मेहन्दी लगाके रखना ‘ आज भी हर शादियों में ‘मस्ट ‘ सॉन्ग है। लता मंगेशकर के गाए इस गीत का सुरूर अभी तक उतरा नहीं. इस गीत में काजोल को फ्लोरोसेंट कलर के ड्रेस (लहंगा ) में दिखाया गया है , जो उस दौर में रेयर कलर था. इस फिल्म के बाद ‘फ्लोरोसेंट ‘ कलर फैशन स्टेटमेंट बन गया पूरेे देश में. मनीष मल्होत्रा ने काजोल के लिए यह कॉश्चुम बनाया था।

15- इस फिल्म के सभी गीत देश विदेश में लोगों की जबान पर चढ़ गए। कैसेट्स की खपत दो करोड़ से अधिक हुई।

16- फिल्म के क्लाइमेक्स में शाहरुख़ का हाथ थामने की कोशिश में काजोल ट्रेन में सवार होने का प्रयास करती है, इस आयकॉनिक सीन को फिल्माने में रिटेक्स पर रिटेक्स होते गए. उस प्लेटफार्म पर फिर ट्रेन आने में आधे घंटा निकल जाता. तक़रीबन 8-10 रिटेक्स हुए.

17. डीडीएलजे रिलीज होने से एक वर्ष पहले ‘हम आपके हैं कौन ‘ फिल्म ने लोगों के दिलो -दिमाग पर एक ऐसा जादू डाल दिया था कि किसी को कभी नहीं लगा कि ‘हम आपके हैं कौन ‘ को ‘दिलवाले… ‘ फिल्म की सफलता पीछे छोड़ सकती है.

18- एक राष्ट्रीय पुरस्कार, दस फिल्म फेयर पुरस्कार और 14 नामांकन, तीन स्क्रीन पुरस्कार पाने वाली भी यह फिल्म बन गयी है।

19- 1001 मूव्हीज यु मस्ट सी बिफोर यु डाय ‘ इस अंतरराष्ट्रीय किताब में ‘मदर इंडिया , दीवार के बाद ‘डीडीएलजे ‘ तीसरी ऐसी फिल्म है जो हर फिल्म प्रेमी ने अपनी जिंदगी में एक मर्तबा जरूर देखनी चाहिए।

20 ‘ ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट ‘ की टॉप इंडियन फिल्म्स ऑफ़ ऑल टाइम ‘ में डीडीएलजे बारहवें नंबर पर है।

21- यश चोपड़ा की ‘डर ‘ फिल्म का म्यूजिक ‘शिव हरी ‘ ने दिया था जो बेहद हिट हुआ. इसीलिए यही सोचा जा रहा था कि ‘डीडीएलजे ‘ का म्यूजिक भी शिव-हरी देंगे लेकिन आदित्य चोपड़ा ने ‘डीडीएलजे ‘ के लिए युवा और प्रतिभाशाली संगीत निर्देशक जोड़ी जतिन ललित को सिलेक्ट किया और आदित्य के विश्वास पर दोनों खरे उतरे.

22. मशहूर नृत्य निर्देशिका सरोज खान ने इस फिल्म के लगभग सभी गीतों को ‘कोरिओग्राफ ‘ किया पर ‘रुक जा ओ दिल दीवाने ‘ को कोरिओग्राफ करने के लिए फरहा खान को बुलाया गया और सरोज खान ने भविष्य में कभी फिर यशराज के साथ काम न करने का फैसला ले लिया.

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