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जब तिलहर से लड़े थे मुलायम सिंह तो इंजीनियर अनीस अहमद ने निभाई थी अहम भूमिका, जानिये कैसे पलट दिया था कांग्रेस का सियासी खेल?

नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी से कैंट विधानसभा सीट के टिकट के दावेदारों में इंजीनियर अनीस अहमद का नाम टॉप-3 में लिया जा रहा है. वह बसपा से कांग्रेस में गए और हाल ही में कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं लेकिन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से उनका नाता कई दशक पुराना है. यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि मुलायम सिंह को तिलहर विधानसभा सीट से वर्ष 1991 का विधानसभा उपचुनाव जिताने में इंजीनियर अनीस अहमद की अहम भूमिका रही थी.
दरअसल, उस दौर में सत्यपाल सिंह यादव की इलाके में तूती बोलती थी. सत्यपाल सिंह यादव उस बार विधानसभा और लोकसभा चुनाव दोनों ही जीत गए थे. इसलिए वर्ष 1991 में इस सीट पर विधानसभा का उपचुनाव कराना पड़ा. उस वक्त समाजवादी पार्टी का गठन नहीं हुआ था. मुलायम सिंह यादव खुद यहां से उपचुनाव में खड़े हुए. उनके विरोध में कांग्रेस के वीरेंद्र प्रताप सिंह मुन्ना मैदान में उतरे थे. उस वक्त यहां कांग्रेस का वर्चस्व हुआ करता था. इंजीनियर अनीस अहमद बताते हैं, “उस वक्त मेरे भाई डा. हामिद सईद खां इसी इलाके से ब्लॉक प्रमुख हुआ करते थे. तब मैं राजनीति में सक्रिय तो था मगर सरकारी कर्मचारी होने के नाते किसी पार्टी में किसी भी पद पर काबिज नहीं था. मेरे भाई डा. हामिद की इलाके में अच्छी पकड़ हुआ करती थी. मुलायम सिंह जब वहां बैठकें करने लगे तो हर जगह डा. हामिद का नाम सामने आने लगा. इस पर मुलायम सिंह ने मेरे भाई के पास संदेशा भेजकर उनसे समर्थन करने को कहा लेकिव जो कोई भी मुलायम सिंह यादव का संदेशा लेकर जाता उसे निराशा ही हाथ लगती थी. इस पर किसी ने मुलायम सिंह यादव को बताया कि डा. हामिद के भाई इंजीनियर अनीस अहमद बरेली में तैनात हैं. उनकी बात डाक्टर साहब कभी नहीं टालते. इस पर मुलायम सिंह यादव ने मुझे बुलाया. मुलायम सिंह यादव के बुलावे पर मैं उनके पास गया. जब मुलायम सिंह ने डाक्टर साहब को उनके पाले में लाने को कहा तो मैंने उनसे वादा किया कि हम पूरा सहयोग करेंगे. इसके बाद मैंने डाक्टर साहब से बात की मगर वह कांग्रेस से जुड़ाव होने के कारण मानने को तैयार नहीं थे. काफी मान मनौव्वल के बाद मैंने उन्हें मना लिया. इसके बाद मैंने डाक्टर साहब और मुलायम सिंह यादव की मुलाकात कराई. मुलायम सिंह यादव मेरे भाईसाहब से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने पूरे चुनाव की कमान डाक्टर साहब को ही सौंप दी. हमारे परिवार ने उस वक्त पूरी तत्परता के साथ मुलायम सिंह यादव को चुनाव लड़वाया. जब नतीजे आए तो मुलायम सिंह यादव लगभग छह हजार वोटों से वीरेंद्र प्रताप सिंह मुन्ना से जीत चुके थे. इस तरह मुलायम सिंह यादव से डाक्टर साहब के करीबी रिश्ते बन गए. वर्ष 1992 में जब समाजवादी पार्टी का गठन हुआ तो डा. हामिद सईद खां को मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी के पहले शाहजहांपुर जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी. आजीवन वह जिला अध्यक्ष रहे. वह बेहद ईमानदार छवि के नेता थे. जब भी उनके विरोधी मुलायम सिंह के पास उनकी शिकायतें लेकर जाते थे तो नेताजी बस एक ही सवाल करते थे कि डॉक्टर साहब ईमानदार तो हैं न? इस पर विरोधी भी इस बात को सहर्ष स्वीकार करते थे. यही वजह रही कि अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक डा. साहब पार्टी के जिला अध्यक्ष रहे. दो साल पहले उनका निधन हो गया.”
बता दें कि इंजीनियर अनीस अहमद दो बार विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं. इनमें एक बार निर्दलीय चुनाव वह कैंट विधानसभा सीट से ही लड़े थे जिस पर अब वह सपा से टिकट की दावेदारी कर चुके हैं. बसपा ने जब ऐन वक्त पर उनका टिकट काट दिया था तो वह निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे और बसपा प्रत्याशी को उस चुनाव में पांचवें नंबर पर पहुंचा दिया था जबकि खुद निर्दलीय होने के बावजूद वह तीसरे स्थान पर रहे थे. कांग्रेस की दिग्गज नेत्री सुप्रिया एरन भी उनके बराबर वोट हासिल नहीं कर सकी थीं और सुप्रिया को चौथे नंबर से ही संतोष करना पड़ा था.

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