
नीरज सिसौदिया, बरेली
सियासत के फलक पर कब कौन सितारों की मानिंद चमक बिखेरने लगेगा यह कोई नहीं जानता. बाजी जिसके हाथ आ जाए वही बाजीगर कहलाता है. लेकिन कहते हैं न कि स्वर्ग की तमन्ना है तो शरीर का मोह त्यागना ही होगा. कुछ ऐसे ही रास्ते पर इन दिनों पूर्व उपसभापति अतुल कपूर भी चलते नजर आ रहे हैं. शहर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदारों में शुमार अतुल कपूर का सियासी सफर बहुत लंबा नहीं है लेकिन जिस तेजी से वह नित नए मुकाम हासिल करते जा रहे हैं उसने पुराने भाजपाइयों की पेशानी पर बल जरूर डाल दिया है.

सियासतदानों की भीड़ से खुद को अलग रखने का हुनर पूर्व उपसभापति और भाजपा पार्षद अतुल कपूर बाखूबी जानते हैं. यही वजह कि इन दिनों वह शहर विधानसभा क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. उनके विधानसभा टिकट की दावेदारी के चर्चे तो काफी समय पहले से ही आम होने लगे थे लेकिन उनके साथी नेता इस बात को गंभीरता से नहीं ले रहे थे. पिछले दिनों जैसे ही अतुल कपूर ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में होर्डिंग और बैनर-पोस्टर लगाने शुरू किए वैसे ही अन्य नेताओं की आंखें खुली की खुली रह गईं. खास तौर पर वे नेता इन दिनों ज्यादा परेशान नजर आ रहे हैं जो तीन-चार बार से पार्षद का चुनाव जीतते आ रहे हैं.
दरअसल, खुद को कमजोर मानते हुए ये नेता कभी खुलकर विधानसभा का टिकट मांगने की हिम्मत नहीं जुटा पाए. अब जबकि अतुल कपूर ने अपनी आवाज बुलंद कर दी है तो ये नेता बेचैन हो उठे हैं. अतुल कपूर बरेली से लेकर लखनऊ तक अपनी बात रख चुके हैं. ब्रज क्षेत्र के दिग्गज नेता और संघ के पदाधिकारियों तक भी वह अपनी बात पहुंचा चुके हैं. जमीनी स्तर पर तो अतुल कपूर ने उस वक्त ही तैयारी शुरू कर दी थी जब कोरोना की पहली लहर से लोग बेहाल हो रहे थे. कोरोना की दूसरी लहर में घर-घर भोजन और राशन के साथ अतुल कपूर का नाम भी पूरे विधानसभा क्षेत्र के हर घर में पहुंच गया. इमेज बिल्डिंग का जो काम तीन-चार बार पार्षद रहने वाले नेता पिछले बीस वर्षों में नहीं कर सके वह काम अतुल कपूर ने चंद महीनों में कर दिखा. आलम यह है कि शहर विधानसभा क्षेत्र के कई वार्डों में लोग अपने पार्षद का नाम भले ही न जानते हों पर अतुल कपूर के चेहरे से भली भांति परिचित हैं.
अतुल कपूर ने इन दिनों शहर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले डेलापीर, राजेंद्र नगर, डीडीपुरम, बानखाना, संजय नगर, कुतुबखाना, किला, कर्मचारी नगर, एयरफोर्स गेट, आईवीआरआई सहित विभिन्न इलाकों में बैनर, पोस्टर, होर्डिंग आदि लगाए हैं. इन होर्डिंग्स में उन्होंने आम जनता को सावन मास, स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दी हैं. साथ ही 124 शहर विधानसभा लिखा हुआ है. अतुल कपूर के ये होर्डिंग तंग गलियों में भी लगे हैं तो वीवीआईपी इलाकों में भी यानि अतुल कपूर इन होर्डिंग्स के माध्यम से हर वर्ग तक पहुंच चुके हैं.

हर मंदिर के बाहर लगे इन पोस्टर और होर्डिंग ने अतुल कपूर की दावेदारी को और भी मजबूत बना दिया है. खत्री पंजाबी समाज के चेहरे के रूप में अतुल कपूर पहले ही अपनी पहचान बना चुके हैं. यही वजह है कि खत्री पंजाबी समाज के लोग भी इस बार समाज के व्यक्ति को ही टिकट देने की मांग करने लगे हैं. वैसे तो समाज के कई चेहरे राजनीति में सक्रिय हैं लेकिन जिस पुरजोर तरीके से अतुल कपूर विधानसभा की तैयारी में जुटे हैं उस तरह कोई भी बड़ा नेता सक्रिय नहीं नजर आ रहा है. सब अंदरखाने ही तैयारियों में जुटे हैं. नेतृत्व के मानदंडों पर अतुल कपूर पूरी तरह खरे उतरते हैं.

सियासत में अतुल कपूर का चेहरा भले ही नया हो मगर सियासत के सफर में मंजिल के फासले कैसे तय करने हैं यह अतुल कपूर ने अन्य सियासतदानों को जरूर सिखा दिया है. यही वजह है कि संघ नेताओं के बीच भी अतुल कपूर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. अब देखना यह है कि क्या पहली बार में ही चुनाव जीतकर उपसभापति जैसे पद पर काबिज होने वाले अतुल कपूर विधानसभा के फासले तय कर पाएंगे अथवा नहीं? बहरहाल, टिकट के बंटवारे में अभी काफी वक्त है और अतुल कपूर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने में पूरी तरह कामयाब रहे हैं.





