यूपी

कार्यकर्ता सम्मेलन बनकर रह गया पूर्व मंत्री अता उर रहमान का धरना, किसानों ने बनाई दूरी, मुलायम सिंह को भी पोस्टर में नहीं दी जगह

नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री की ओर से नसीम अहमद को पटखनी देने का हर दांव उल्टा पड़ता जा रहा है। बहेड़ी विधानसभा सीट के पूर्व प्रत्याशी और टिकट के प्रबल दावोदार नसीम अहमद हर मोर्चे पर अता उर रहमान पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। नसीम अहमद ने लगभग एक सप्ताह पूर्व लखीमपुर खीरी में जान गंवाने वाले किसानों की याद में विशाल श्रद्धांजलि सभा और रैली निकाली थी। खुद महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष अबु आसिम आजमी इस सभा में शामिल हुए थे। साथ ही विधानसभा के कई गांवों के किसान भी इस सभा का हिस्सा बने थे। इसके जवाब में अता उर रहमान ने लगभग एक सप्ताह की तैयारी के बाद आज किसानों के समर्थन में धरना आयोजित किया लेकिन लगता है कि इस धरने के लिए एक सप्ताह का वक्त भी कम पड़ गया। एक तरफ जहां किसानों ने इस धरने से दूरी बनाई और सिर्फ पार्टी कार्यकर्ता ही इसमें शामिल हुए वहीं, दूसरी तरफ अता उर रहमान के पोस्टर से समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की तस्वीर भी गायब रही। इस कारण अता उर रहमान का यह धरना प्रदर्शन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया और विवादों की भेंट चढ़ गया।
दरअसल, जब से नसीम अहमद समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं तब से अता उर रहमान का राजनीतिक ग्राफ नीचे गिरता जा रहा है। नसीम अहमद हर छोटे-बड़े कार्यक्रम को इस तरह प्रस्तुत करते आ रहे हैं जो न सिर्फ जनता को प्रभावित करता है बल्कि सत्ताधारियों के भी होश उड़ाने में सफल रहता है। यही वजह है इन दिनों बहेड़ी विधानसभा की जनता अता उर रहमान का खुलकर विरोध करने लगी है। अपनी सियासी जमीन को खिसकता देख अता उर रहमान लगातार उसे वापस हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने आज बहेड़ी चीनी मिल पर एक दिवसीय धरने का आयोजन किया मगर किसानों ने इस धरने से दूरी बना ली। इस धरने में किसानों की जगह पार्टी कार्यकर्ता ज्यादा नजर आए। इतना ही नहीं धरने में किसानों से ज्यादा अता उर रहमान को वोट देने की चर्चाएं ज्यादा हो रही थीं।
किसानों द्वारा दूरी बनाने की वजह को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हो रही थीं। बहरहाल, कारण चाहे जो भी रहा हो मगर किसानों द्वारा अता उर रहमान के धरने से दूरी बनाना यह साबित करता है कि ग्रामीण इलाकों में अब अता उर रहमान का जनाधार खत्म हो चुका है। वहीं, नसीम अहमद की सभा में बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों से पहुंचे किसानों ने यह साबित कर दिया है कि अता उर रहमान की जगह अब नसीम अहमद ले चुके हैं। यही वजह है कि अब पार्टी के आला नेता भी अता उर रहमान का टिकट कटने की संभावना जता रहे हैं। बहरहाल, अगर अता उर रहमान का टिकट कटता है तो उनके राजनीतिक भविष्य पर विराम लग सकता है। हालांकि यह भी चर्चा है कि अता उर रहमान का टिकट कटेगा तो वह बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में दम तोड़ चुकी बसपा उनकी सियासी नाव को डूबने से किस हद तक बचा पाएगी इसका अंदाजा खुद ब खुद लगाया जा सकता है।

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