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सपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा को भी गोली दे गए इस्लाम साबिर, पिता को बताया पांच बार का विधायक, खुद को बताया दो बार का विधायक, पढ़ें क्या है सच्चाई?

नीरज सिसौदिया, बरेली
राजनीति और झूठ का चोली और दामन का साथ होता है। इस बात को सपा नेता इस्लाम साबिर ने साबित कर दिया है। जनता से झूठे वादे करने के आरोप तो दोनों पिता-पुत्र पर लगते ही रहते हैं, अब पूर्व विधायक इस्लाम साबिर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के सामने भी सफेद झूठ बोल गए। यह झूठ इस्लाम साबिर ने इंडिया टाइम 24 के सामने किरणमय नंदा से उस वक्त बोला जब हम किरणमय नंदा का इंटरव्यू लेने गए थे। उस वक्त कैमरा ऑन था और इस्लाम साबिर का यह झूठ हमारे कैमरे में कैद हो गया।

नीचे देखें रिकॉर्डिंग, ध्यान से सुने

दरअसल, जब किरणमय नंदा संगठन समीक्षा बैठक लेने बरेली आए थे तो दूसरे दिन वह सर्किट हाउस में रुके थे। अंतिम दिन सुबह यानि गुरुवार को इस्लाम साबिर और उनके सुपुत्र एवं पूर्व मंत्री शहजिल इस्लाम भी किरणमय नंदा से मिलने पहुंचे। अपना परिचय देने के साथ ही इस्लाम साबिर नंदा से कह बैठे कि उनके पिता स्व. अशफाक अहमद पांच बार विधायक रहे और इस्लाम साबिर खुद दो बार विधायक रहे जबकि चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि स्व. अशफाक अहमद चार बार विधायक रहे और इस्लाम साबिर सिर्फ एक बार विधायक रहे। इतना ही नहीं इस्लाम साबिर ने अपने ताऊ को दो बार का विधायक बता दिया जबकि उनके ताऊ के बेटे अखलाक अहमद ने कहा कि उनके पिता सिर्फ एक बार विधायक रहे। चुनाव आयोग का आंकड़ा भी यही कहता है।

वर्ष 1956 में इस सीट पर पहली बार विधानसभा चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस के मोहम्मद हुसैन विजयी रहे। दस साल तक विधायक रहने के बाद मोहम्मद हुसैन वर्ष 1967 में भारतीय जन संघ के रामा बल्लभ से चुनाव हार गए। उसके बाद वर्ष 1969 में चुनाव हुए और इस्लाम साबिर के पिता अशफाक अहमद पहली बार विधायक बने। वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। वर्ष 1974 में फिर चुनाव हुए और भारतीय जनसंघ के बादाम सिंह विधायक बन गए। इसके बाद वर्ष 1977 और 1980 में लगातार दो बार अशफाक अहमद कांग्रेस से विधायक बने। इसके बाद जब वर्ष 1985 में ‌विधानसभा चुनाव हुए तो अशफाक अहमद का ‌टिकट काटकर उन्हीं के बड़े भाई और इस्लाम साबिर के ताऊ रफीक अहमद उर्फ रफ्फन अहमद को कांग्रेस ने मैदान में उतारा। अशफाक अहमद टिकट कटने से इतने नाराज हुए कि अपने बड़े भाई के खिलाफ ही निर्दलीय मैदान में उतर गए। नतीजतन रफीक अहमद जीत गए और अशफाक अहमद को हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद वर्ष 1989 में ‌जनता दल के टिकट पर प्रवीन सिंह ऐरन विधायक बन गए। फिर जून 1991 में चुनाव हुए और इस्लाम साबिर कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद दिसंबर 1993 में चुनाव हुए और प्रवीन सिंह ऐरन समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधानसभा पहुंच गए। इसके बाद वर्ष 1996 में चुनाव हुए और अशफाक अहमद चौथी बार विधायक बने। अशफाक अहमद का यह आखिरी कार्यकाल था। इसके बाद वर्ष 2002 में शहजिल इस्लाम पहली बार चुनाव मैदान में उतरे और निर्दलीय विधायक बने। फिर वर्ष 2007 के चुनाव में बसपा के वीरेंद्र सिंह विधायक बने और वर्ष 2012 से अब तक भाजपा के राजेश अग्रवाल विधायक हैं। ऐसे में इस्लाम साबिर कब दो बार विधायक बन गए और उनके पिता स्व. अशफाक अहमद पांच बार विधायक कैसे बन गए यह विचारणीय पहलू है। अगर इस्लाम साबिर दो बार विधायक नहीं बने और उनके पिता पांच बार विधायक नहीं रहे तो फिर उन्होंने किरणमय नंदा से झूठ क्यों कहा, यह भी विचारणीय तथ्य है।
बहरहाल, नेताओं की जुबान का कोई भरोसा नहीं होता यह बात स्पष्ट हो गई है। जो नेता अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के सामने सफेद झूठ बोल सकता है वह आम जनता के सामने कितना सच बोलेगा, इसका अंदाजा खुद ब खुद लगाया जा सकता है।

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