नीरज सिसौदिया, बरेली
मेहनत और किस्मत साथ हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद जहां प्रदेश में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है वहीं, मंत्री बनने के लिए विधायकों ने भी सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। नव निर्वाचित विधायक कभी लखनऊ तो कभी दिल्ली दरबार में हाजिरी लगाते नजर आ रहे हैं। बरेली जिले में भी मंत्री पद को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। फिलहाल तीन चेहरे सबसे अधिक चर्चा में हैं।
इनमें पहला नाम कैंट विधायक संजीव अग्रवाल का है। दरअसल, संजीव अग्रवाल की राह बेहद मुश्किल थी। पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल को सियासत में पटखनी देकर संजीव अग्रवाल टिकट तो ले आए थे मगर पार्टी नेताओं के भितरघात और सुप्रिया ऐरन जैसी दिग्गज नेत्री से सीधा मुकाबला होने के कारण उनकी जीत की राह बेहद मुश्किल मानी जा रही थी। हालांकि, संजीव ने सभी राजनीतिक पंडितों को गलत साबित करते हुए अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर विधानसभा का फासला तय कर लिया। संजीव की जीत के बाद परिस्थितियां बदल चुकी हैं। संघ और संगठन दोनों में उनकी गहरी पकड़ है। चूंकि कैंट के पूर्व विधायक राजेश अग्रवाल वित्त मंत्री रह चुके हैं इसलिए कैंट की जनता तो उम्मीद है कि उनके नवनिर्वाचित विधायक को भी मंत्री पद से नवाजा जा सकता है। संजीव अग्रवाल वैश्य समाज के नए नेता के रूप में उभरे हैं। ऐसे में मंत्री पद मिलने पर न सिर्फ उनका कद और बढ़ेगा बल्कि वैश्य समाज को एकजुट करने में भी बल मिलेगा। संजीव अग्रवाल हाल ही में लखनऊ से लौटे हैं। वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही पार्टी और संघ के पदाधिकारियों के साथ भी उनकी मुलाकात हुई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बरेली के सांसद संतोष गंगवार का भी वरदहस्त उन्हें प्राप्त है। संघ एवं संगठन पर मजबूत पकड़ और संगठन का लंबा अनुभव उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकता है। माना जा रहा है कि आगामी 21 मार्च को नई सरकार के ऐलान के साथ उन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
संजीव अग्रवाल के साथ ही शहर विधायक अरुण कुमार का नाम भी चर्चा में है। जीत की हैट्रिक लगाने वाले अरुण कुमार मंत्री पद के हकदार भी हैं। कायस्थ समाज के एकमात्र ऐसे नेता हैं जो लगातार तीसरी बार विधायक बने हैं। उन्हें मंत्री बनाने के लिए पूरा कायस्थ समाज एकजुट है। पिछली सरकार में जब विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा रहा था तो उस वक्त भी अरुण कुमार का नाम चर्चा में था और उन्हें मंत्री बनाने की मांग की जा रही थी। हालांकि उस वक्त बहेड़ी विधायक छत्रपाल गंगवार को मंत्री बना दिया गया जो इस बार सपा प्रत्याशी अता उर रहमान से पराजित हो गए। ऐसे में माना जा रहा है कि अरुण कुमार भी नई सरकार में योगी मंत्रिमंडल का हिस्सा बन सकते हैं।
तीसरा नाम पूर्व मंत्री और आंवला विधायक धर्मपाल का है। धर्मपाल को फिर से मंत्री बनाने की मांग तेजी से उठ रही है। पिछली सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया था लेकिन बाद में उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया जिससे उनके समर्थकों में मायूसी थी लेकिन चुनाव जीतकर धर्मपाल ने खुद को फिर से साबित किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि योगी के मंत्रिमंडल में धर्मपाल को जगह जरूर मिलेगी। बहरहाल, इस बार बरेली को योगी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की प्रबल संभावनाएं नजर आ रही हैं। बस वह चेहरा कौन सा होगा, यह कहना फिलहाल मुश्किल है।

योगी के मंत्रिमंडल में बरेली को मिलेगी जगह? जानिये कौन से चेहरे हैं मंत्री पद की दौड़ में शामिल?




