मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़

दो आईएएस अधिकारियों सहित तीन अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार की एफआईआर दर्ज, पढ़ें क्या है पूरा मामला?

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी रानू साहू और समीर विश्नोई तथा राज्य सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। तीनों अधिकारी राज्य में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान सामने आए कथित कोयला लेवी घोटाले के मामले में जेल में हैं। ईओडब्ल्यू के एक अधिकारी ने यहां बताया कि एजैंसी ने दो जुलाई को विश्नोई, साहू और चौरसिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित के आरोप में तीन प्राथमिकी दर्ज की हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आईएएस की 2010 बैच की अधिकारी साहू के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, साहू ने 2015 से 2022 के बीच कथित तौर पर अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम पर करीब 3.94 करोड़ रुपये के निवेश के साथ अचल संपत्तियां खरीदी थीं। प्राथमिकी में कहा गया है कि साहू को अप्रैल 2011 से अक्टूबर 2022 तक वेतन के रूप में करीब 92 लाख रुपये मिले थे, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की और अचल संपत्तियों में करीब 3.94 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके अलावा, साहू ने कथित तौर पर बीमा, शेयर और एसआईपी में भी निवेश किया, जिसकी जांच की जानी चाहिए। आईएएस के 2009 बैच के अधिकारी विश्नोई के खिलाफ प्राथमिकी में कहा गया है कि उन्हें सितंबर 2010 से सितंबर 2022 तक वेतन के रूप में करीब 93 लाख रुपये मिले, लेकिन उन्होंने इस अवधि के दौरान कथित तौर पर 5.12 करोड़ रुपये से अधिक की चल/अचल संपत्ति अर्जित की। इसी तरह 2008 बैच की राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी चौरसिया के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि चौरसिया को अक्टूबर 2022 तक वेतन और अन्य भत्ते के रूप में लगभग 85.50 लाख रुपये मिले, जबकि उन्होंने कथित तौर पर अपने परिवार के सदस्यों और परिचितों के नाम पर 29 अचल संपत्तियां अर्जित की हैं, जिनकी कीमत लगभग 9.22 करोड़ रुपये है। कथित कोयला लेवी घोटाले में धन शोधन की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले साल जुलाई में साहू को गिरफ्तार किया था। मुख्यमंत्री कार्यालय में तत्कालीन उप सचिव चौरसिया को दिसंबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि विश्नोई को अक्टूबर 2022 में कोयला लेवी मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। तब से तीनों जेल में हैं। कोयला लेवी मामले के संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत इस साल जनवरी में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी)/ईओडब्ल्यू ने प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें 35 लोगों को आरोपी बनाया गया है जिनमें ये तीनों अधिकारी भी शामिल हैं। ईडी द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट के आधार पर यह मामला दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में उल्लेख किया गया है कि वरिष्ठ नौकरशाहों, व्यापारियों, राजनीतिक नेताओं और बिचौलियों से जुड़े एक गिरोह द्वारा राज्य में ढुलाई किए जाने वाले प्रत्येक टन कोयले पर 25 रुपये प्रति टन की अवैध वसूली की जा रही थी। प्राथमिकी के अनुसार, व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी इस घोटाले का मास्टरमाइंड था। ईडी ने छत्तीसगढ़ में “कोयला लेवी घोटाले” में धन शोधन की जांच शुरू की थी और छापेमारी की थी तथा 11 लोगों को गिरफ्तार किया था और लगभग 222 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त किया था। दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि सूर्यकांत तिवारी जैसे निजी व्यक्तियों और सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई जैसे राज्य सरकार के पदाधिकारियों तथा खनन अधिकारियों के एक सिंडिकेट ने कुछ राजनीतिक पदाधिकारियों के समर्थन से जानबूझकर नीतिगत बदलाव करने में कामयाबी हासिल की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में ढुलाई किए गए प्रत्येक टन कोयले पर 25 रुपये वसूलने के लिए जबरन वसूली का नेटवर्क शुरू किया। डायरियों के अनुसार, जुलाई 2020 से जून 2022 तक कोयला गिरोह द्वारा 540 करोड़ रुपये की उगाही की गई।

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