बाईपास गोलीकांड : बढ़ता हुआ सियासी कद, शशिभूषण की दोस्ती और कुछ अपनों की साजिश का शिकार हो गए सपा पार्षद दल के नेता गौरव सक्सेना, पहले भी लगाए गए थे हत्या के आरोप, जानिये कौन है साजिश का सूत्रधार?
नीरज सिसौदिया, बरेली
लगातार जीत की हैट्रिक लगाने वाले समाजवादी पार्टी के पार्षद दल के नेता गौरव सक्सेना के खिलाफ बाईपास गोलीकांड में गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद यह बहस आम हो गई है कि क्या वाकई गौरव सक्सेना आपराधिक छवि वाले नेता हैं या फिर उन्हें फंसाया जा रहा है। दरअसल, कुछ साल पहले भी गौरव सक्सेना पर हत्या के आरोप लगाए गए थे। उन पर अपनी ही पहली पत्नी को मार डालने का आरोप लगाया गया था लेकिन बाद में सभी आरोप बेबुनियाद साबित हुए। अब एक बार फिर गौरव सक्सेना गोलीबारी के आरोप में पुलिस के निशाने पर हैं।
दरअसल, पिछले कुछ सालों में गौरव सक्सेना के राजनीतिक कद में भारी इजाफा हुआ है। वह बतौर निर्दलीय उम्मीदवार तीन बार से लगातार पार्षद बनते आ रहे हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। गौरव सक्सेना ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और पार्टी ने उनके समर्थन में प्रत्याशी नहीं उतारा। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद गौरव सक्सेना जीत की हैट्रिक लगाने में कामयाब रहे। लेकिन इस बार की जीत कई मायनों में अहम रही। महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी की दरियादिली के चलते गौरव सक्सेना को राजेश अग्रवाल जैसे वरिष्ठ नेता को दरकिनार कर समाजवादी पार्टी के पार्षद दल का नेता चुन लिया गया। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने पार्टी में गौरव सक्सेना का कद काफी बढ़ा दिया। इससे वह पार्टी के कुछ वरिष्ठ कायस्थ नेताओं के निशाने पर आ गए। दूसरी तरफ कायस्थ समाज के सामाजिक संगठनों में भी लगातार गौरव सक्सेना की भागीदारी बढ़ने लगी थी। कई कायस्थ संगठनों में उन्हें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव जैसे कई जिम्मेदार पदों पर आसीन कर दिया गया। इससे पूरे बरेली महानगर में गौरव सक्सेना की गिनती बड़े कायस्थ नेताओं में होने लगी। यह बात भाजपा के कुछ कायस्थ नेताओं को अखरने लगी थी। इनमें वो नेता भी शामिल हैं जिन्हें शहर विधानसभा सीट पर वन राज्य मंत्री अरुण कुमार के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। यह जगजाहिर है कि विरोधी दल में होने के बावजूद गौरव सक्सेना और अरुण कुमार के व्यक्तिगत संबंध बेहद अच्छे रहे हैं। कहा तो यह भी जाता है कि गौरव सक्सेना को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जिताने में अरुण कुमार की भी अहम भूमिका रही है। ऐसे में कुछ नेताओं को यह भी डर था कि कहीं अरुण कुमार विधानसभा चुनाव में गौरव सक्सेना के लिए नई राह तैयार न कर दें। इसके अलावा भाजपा नेता शशिभूषण के साथ भी गौरव सक्सेना की गहरी दोस्ती वर्षों से चली आ रही है। शशिभूषण के रिश्ते समाजवादी पार्टी के एक बड़े कायस्थ नेता के साथ बेहद खराब हैं। दोनों के बीच 36 का आंकड़ा है। वो कायस्थ नेता भी विधानसभा के टिकट के प्रबल दावेदारों में शुमार है और कई कायस्थ संगठनों का हिस्सा है। लेकिन राजनीतिक कद में वह गौरव सक्सेना की बराबरी नहीं कर पा रहा है। ऐसे में गौरव सक्सेना के विवादों में आने से उसने एक तीर से दो निशाने साधने का प्रयास किया है। पहला गौरव सक्सेना के राजनीतिक सफर पर कुछ हद तक ब्रेक लगा दिया है तो दूसरा शशिभूषण को भी निशाने पर ले लिया है। इसमें कुछ भाजपा पदाधिकारियों का भी उसे पूरा साथ मिला है। अब चूंकि समाजवादी पार्टी पहले ही गुंडों-बदमाशों को संरक्षण देने के लिए बदनाम है। कई हिस्ट्रीशीटर आज भी समाजवादी पार्टी का हिस्सा हैं। ऐसे में एक और विवादित चेहरे पर समाजवादी पार्टी दांव खेलने से बचेगी, यह सोचकर गौरव सक्सेना को सलाखों के पीछे डालकर उनके राजनीतिक सफर को खत्म करने का ताना-बाना बुना गया। सूत्र बताते हैं कि इस काम में गौरव सक्सेना की एक पूर्व महिला मित्र ने भी विरोधियों का साथ दिया है। हालांकि, गौरव सक्सेना को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। साथ ही सपा नेताओं के साथ मुलाकात में पुलिस अधिकारियों ने भी निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है लेकिन मामला अब अदालत के पाले में है और गौरव सक्सेना निर्दोष हैं या अपराधी इसका फैसला अदालत ही करेगी।
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