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संभल हिंसा और अडानी पर संसद में गरजे अखिलेश, राहुल और विपक्ष के सांसद, कुछ विधेयक पेश तो कुछ पारित, पढ़ें क्या-क्या हुआ आज संसद में?

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नीरज सिसौदिया, नई दिल्ली
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के संभल में पिछले दिनों हुई हिंसा को ‘सोची-समझी साजिश’ करार देते हुए मंगलवार को लोकसभा में मांग की कि घटना के लिए जिम्मेदार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निलंबित किया जाए और उन पर हत्या का मुकदमा चलाया जाए। कन्नौज से सपा सांसद अखिलेश यादव ने निचले सदन में शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए कहा, ‘‘संभल में पिछले दिनों अचानक हुई हिंसा की घटना को सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया। संभल में सालों से लोग भाईचारे से रहते आए हैं। इस घटना से इस भाईचारे को ‘गोली मारने’ का काम किया गया।” उन्होंने संभल की शाही जामा मस्जिद में सर्वे का जिक्र करते हुए इस तरह की घटनाओं के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा। यादव ने कहा, ‘‘देश के कोने-कोने में भाजपा और उसके सहयोगी, समर्थक और शुभचिंतक बार-बार ‘खुदाई’ की बात करते हैं जिससे देश का सौहार्द, भाईचारा और गंगा-जमुनी तहजीब खो जाएगी।” उन्होंने दावा किया कि एक बार स्थानीय अदालत के आदेश पर संभल की शाही जामा मस्जिद के अंदर सर्वे का काम पूरा कर चुके अधिकारी कुछ दिन बाद दोबारा सर्वे के लिए पहुंच गए और उनके पास अदालत का कोई आदेश नहीं था। यादव ने आरोप लगाया कि इस दौरान सूचना मिलने पर मस्जिद पहुंच गए स्थानीय लोगों ने जब कार्रवाई का कारण जानना चाहा तो पुलिस क्षेत्राधिकारी ने बदसलूकी की और नाराज होकर कुछ लोगों ने पथराव कर दिया जिसके बाद पुलिस गोलीबारी में पांच मासूम मारे गए। उन्होंने कहा, ‘‘संभल का माहौल बिगाड़ने में सर्वे की याचिका दायर करने वाले लोगों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन के लोग जिम्मेदार हैं। जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए और उन पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।” यादव ने कहा, ‘‘हम यूं ही नहीं कहते कि सरकार संविधान को नहीं मानती।” कांग्रेस के उज्ज्वल रमण सिंह ने भी शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि संभल को इंसाफ मिलना चाहिए और पूरे घटनाक्रम की जांच उच्चतम न्यायालय के किसी सेवारत न्यायाधीश के नेतृत्व में कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।” इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर ने संभल के मुद्दे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि देश में इस समय ‘उपासना स्थल अधिनियम, 1991′ खतरे में है। उन्होंने संभल की एक मस्जिद में सर्वे और वहां हिंसा की घटनाओं के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए किसी सेवारत न्यायाधीश के नेतृत्व वाले न्यायिक आयोग से इस घटना की जांच कराए जाने की मांग की। इससे पहले सपा समेत विपक्षी दलों के सदस्यों ने संभल में हिंसा की घटना के विरोध में प्रश्नकाल के दौरान सदन से वॉकआउट किया।
इसके अलावा राज्यसभा में मंगलवार को एक विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन में ‘अडानी’शब्द के उल्लेख को लेकर तीखी नोंक झोंक हुई। सदन में भारतीय वायुयान विधेयक 2024 की चर्चा के दौरान कांग्रेस के सैयद नासिर हुसैन ने अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश नीति और‘अडानी’शब्द का प्रयोग किया तो उस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई। सत्ता पक्ष के कई सदस्यों की ओर से श्री हुसैन की कुछ टिप्पणियों पर व्यवस्था का प्रश्न उठाया गया। सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने सदन में शब्दों के प्रयोग और प्रधानमंत्री पद की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया। कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि ‘अडानी शब्द नहीं है’। उन्होंने कहा कि वायुयान से संबंधित विधेयक पर चर्चा के दौरान संबंधित कंपनियों, उनके कारोबार तथा कंपनी प्रवर्तकों का नाम लिया ही जाएगा। इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस बीच सदन में दोनों ओर से शोर शराबा होने लगा तथा कई अन्य सदस्यों ने भी व्यवस्था का प्रश्न उठाने का प्रयास किया। इस पर पीठासीन सस्मित पात्रा ने कहा कि सदस्य के वक्तव्य में जो कुछ भी अप्रासंगिक होगा, वह कार्यवाही से हटा दिया जाएगा। इसके बाद सदन सुचारू रूप से चल सका।
वहीं, प्राकृतिक तेल एवं गैस उत्खन्न के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने सहित इस क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों के समाधान के उद्देश्य से लाये गये तेल क्षेत्र (विनियमन एवं विकास) संशोधन विधेयक 2024 को मंगलवार को राज्यसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन में इस विधेयक पर हुयी चर्चा का जबाव देते हुये केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े निवेश की जरूरत होती है। गहरे समुद्र में एक तेल का कुंआ बनाने पर 10 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश करना पड़ता है। इसके साथ ही जो कंपनियां इतना बड़ा निवेश करेगी वह यहां खैरात के लिए नहीं करेगी। उसे भी अपने निवेश पर लाभ चाहिए होता है। इस सबको ध्यान में रखते हुये यह संशोधन लाया गया है। इसका मकसद इस क्षेत्र के लिए स्थिर कानून, विवाद निपटरा, एकल लीज आदि की वैधानिक व्यवस्था करना है। इससे किसी भी राज्य सरकार का अधिकार नहीं छीना जा रहा है क्योंकि तेल क्षेत्र के आवंटन और उस पर रॉयल्टी का अधिकार राज्यों के पास ही है।
उधर, राज्यसभा में मंगलवार को ‘भारतीय वायुयान विधयेक, 2024′ पेश किया गया, जो कानून बनने पर 90 साल पुराने विमान अधिनियम की जगह लेगा तथा विमानन क्षेत्र के प्रमुख निकायों को ज्यादा शक्ति प्रदान करेगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने उच्च सदन में यह विधेयक प्रस्तुत किया। लोकसभा ने इसी साल अगस्त महीने में भारतीय वायुयान विधेयक 2024 पारित किया था। नायडू ने विधेयक को पेश करते हुए कहा कि पहले के अधिनियम में कुछ भ्रम थे उनको दूर करने के लिए यह विधेयक लाया गया है।

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