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बरेली में सपा को तोड़ना होगा लोधी समाज पर भाजपा का वर्चस्व, सपा का चेहरा बने महेंद्र सिंह लोधी तो हिल सकता है धर्मपाल सिंह और डीसी वर्मा का लोधी साम्राज्य, जानिये कैसे?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली की राजनीति में इन दिनों लोधी समाज को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष पद पर युवा नेता महेंद्र सिंह लोधी की दावेदारी ने न सिर्फ सपा के भीतर हलचल बढ़ाई है, बल्कि भाजपा के उस मजबूत सामाजिक आधार को भी चुनौती दी है, जो उसने बीते करीब दो दशकों में लोधी समाज के बीच बनाया है। सवाल यही है कि अगर सपा ने महेंद्र सिंह लोधी को अपना जिला अध्यक्ष बनाया, तो क्या इससे भाजपा के कद्दावर लोधी नेताओं धर्मपाल सिंह और डीसी वर्मा के प्रभाव में दरार पड़ सकती है?
हकीकत यह है कि बरेली जिले में लोधी समाज पर भाजपा की पकड़ काफी समय से मजबूत रही है। प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और मीरगंज से विधायक डीसी वर्मा जैसे नेताओं ने इस समाज को न सिर्फ प्रतिनिधित्व दिया, बल्कि सत्ता और संगठन में उसकी हिस्सेदारी भी सुनिश्चित की। यही वजह है कि लोधी समाज का बड़ा वर्ग लगातार भाजपा के साथ खड़ा रहा है।
इसके उलट समाजवादी पार्टी बरेली में इस समाज के बीच अपेक्षित जगह नहीं बना सकी। सपा ने अब तक लोधी समाज को कोई बड़ा संगठनात्मक चेहरा नहीं दिया, जिससे यह संदेश जाता रहा कि पार्टी में इस समाज के लिए आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यही खाली जगह अब महेंद्र सिंह लोधी की दावेदारी से भरती नजर आ रही है।
महेंद्र सिंह लोधी की राजनीति की खास बात यह है कि वे भाजपा के कामकाज और संगठनात्मक ताकत को भीतर से समझते हैं। एक समय वे धर्मपाल सिंह की टीम का हिस्सा रह चुके हैं। यानी भाजपा के लोधी नेटवर्क, उसकी कार्यशैली और समाज में उसकी पकड़ से वे अच्छी तरह वाकिफ हैं। बाद में समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने सपा का दामन थामा। पार्टी ने उन्हें महानगर सचिव जैसी जिम्मेदारी दी, लेकिन यह पद लोधी समाज को बड़े स्तर पर जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं था।
अब अगर सपा उन्हें जिला अध्यक्ष जैसा अहम पद सौंपती है, तो यह सिर्फ एक संगठनात्मक फैसला नहीं होगा, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश होगा। इससे लोधी समाज के भीतर यह भरोसा बनेगा कि सपा भी उन्हें नेतृत्व और सम्मान देने को तैयार है। खासकर युवा लोधी नेताओं और कार्यकर्ताओं को इससे यह महसूस होगा कि भाजपा के अलावा भी उनके पास राजनीतिक विकल्प मौजूद हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा का लोधी साम्राज्य एक झटके में नहीं टूटेगा। धर्मपाल सिंह और डीसी वर्मा का प्रभाव आज भी मजबूत है। लेकिन राजनीति में बदलाव हमेशा छोटे-छोटे झटकों से शुरू होता है। यदि सपा जिला स्तर पर लोधी समाज का चेहरा खड़ा करने में सफल होती है, तो पंचायत, नगर निकाय और विधानसभा स्तर पर इसका असर धीरे-धीरे दिख सकता है।
महेंद्र सिंह लोधी की उम्र और उनकी सक्रियता भी सपा के लिए फायदेमंद हो सकती है। वे गांव-देहात और शहरी इलाकों में सीधे संवाद की राजनीति कर सकते हैं। भाजपा के पुराने नेताओं की तुलना में उनका युवा चेहरा सपा को लोधी समाज के नए मतदाताओं तक पहुंचाने में मदद कर सकता है। यही वह बिंदु है, जहां भाजपा की मजबूत पकड़ में हलचल पैदा हो सकती है।
सपा की पीडीए रणनीति भी इसी दिशा में इशारा करती है। पार्टी लगातार यह संदेश दे रही है कि पिछड़े समाजों को सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि नेतृत्व भी मिलेगा। यदि इस सोच को जमीन पर उतारते हुए महेंद्र सिंह लोधी को जिला अध्यक्ष बनाया जाता है, तो यह बरेली की राजनीति में नया मोड़ साबित हो सकता है।
फिलहाल सबकी निगाहें पार्टी के फैसले पर टिकी हैं। 15 फरवरी के बाद यह साफ हो जाएगा कि सपा लोधी समाज को लेकर बड़ा दांव खेलने को तैयार है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि अगर महेंद्र सिंह लोधी सपा का चेहरा बने, तो बरेली में भाजपा के लोधी वर्चस्व को पहली बार गंभीर चुनौती जरूर मिलेगी।

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