यूपी

दो बार टिकट से चूके, अब पूरी ताकत से मैदान में उतरे समाजवादी पार्टी के नेता संजीव सक्सेना, क्या 2027 में कैंट सीट पर बदलेगा सियासी समीकरण?

Share now

नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली जिले की कैंट विधानसभा सीट पर आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होती दिख रही है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजीव सक्सेना एक बार फिर खुलकर मैदान में सक्रिय हो गए हैं और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी मजबूत दावेदारी जता रहे हैं। स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय सक्सेना को जिले में कायस्थ समाज का बड़ा चेहरा माना जाता है और उनकी पहचान संगठन तथा सामाजिक गतिविधियों दोनों में प्रभावशाली नेता के रूप में रही है।


संजीव सक्सेना ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कैंट सीट से टिकट के लिए दावेदारी पेश की थी। उस समय उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी उनके अनुभव और स्थानीय पकड़ को देखते हुए मौका देगी। लेकिन चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक समीकरण बदल गए और पार्टी ने कांग्रेस छोड़कर आईं पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन को उम्मीदवार बना दिया। चुनाव में सुप्रिया को हार का सामना करना पड़ा। उस फैसले के बाद से ही पार्टी के भीतर टिकट चयन को लेकर चर्चा होती रही और सक्सेना समर्थकों में निराशा भी देखी गई।


इसके अगले ही वर्ष बरेली नगर निगम चुनाव आए तो संजीव सक्सेना ने मेयर पद के लिए दावेदारी कर दी। इस बार पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें मेयर का उम्मीदवार घोषित कर दिया। माना जा रहा था कि इस चुनाव के जरिए उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हो जाएगी। लेकिन मतदान से ठीक पहले एक नया मोड़ आ गया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मेयर आईएस तोमर ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। इस कदम से समीकरण पूरी तरह बदल गए। बाद में पार्टी ने तोमर का समर्थन कर दिया और संजीव सक्सेना को पीछे हटना पड़ा। इससे उन्हें बड़ा झटका लगा।


राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि उसी समय पार्टी हाईकमान की ओर से संजीव सक्सेना को भविष्य में विधानसभा चुनाव लड़ाने का भरोसा दिया गया था। बताया जाता है कि तभी से उन्होंने अंदरखाने चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। संगठन के कार्यक्रमों में सक्रियता बढ़ाई, सामाजिक संपर्क मजबूत किए और अपने समर्थक नेटवर्क को लगातार सक्रिय रखा। अब जब अगला विधानसभा चुनाव नजदीक आने लगा है तो उन्होंने खुलकर अपनी दावेदारी सामने रख दी है।


संजीव सक्सेना का कहना है कि कैंट विधानसभा क्षेत्र में करीब 35 से 40 हजार तक कायस्थ समाज की आबादी है, जो चुनाव में अहम भूमिका निभा सकती है। उनका दावा है कि यह वर्ग लंबे समय से राजनीतिक प्रतिनिधित्व चाहता है और अगर पार्टी उन्हें मौका देती है तो समाज का बड़ा समर्थन मिल सकता है। वे यह भी कहते हैं कि शहर विधानसभा सीट पर भी कायस्थ मतदाता निर्णायक स्थिति में रहते हैं, इसलिए इस सामाजिक समीकरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बरेली शहर क्षेत्र में लंबे समय से भाजपा कायस्थ उम्मीदवारों पर दांव लगाती रही है और इस रणनीति का उसे फायदा भी मिलता रहा है। ऐसे में समाजवादी पार्टी भी इस सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर उम्मीदवार तय कर सकती है। इसी वजह से संजीव सक्सेना की दावेदारी को गंभीर माना जा रहा है।
सामाजिक स्तर पर भी सक्सेना की सक्रियता उनकी ताकत मानी जाती है। वे कायस्थ समाज के कई संगठनों से जुड़े रहे हैं और सामाजिक कार्यक्रमों में नियमित भागीदारी करते हैं। पार्टी कार्यक्रमों के साथ-साथ सामाजिक मंचों पर मौजूदगी ने उन्हें एक पहचान दी है। यही कारण है कि बरेली महानगर में फिलहाल समाजवादी पार्टी के भीतर कायस्थ समाज से उनके कद का कोई दूसरा नेता नहीं माना जाता।
उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में रहती है। संजीव सक्सेना एक सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और नौकरी से रिटायर होने के बाद सक्रिय राजनीति में आए। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने संगठन में तेजी से अपनी जगह बनाई और मजबूत संपर्कों के चलते मेयर टिकट तक हासिल कर लिया था। यह उदाहरण अक्सर उनके समर्थक उनकी राजनीतिक क्षमता के प्रमाण के रूप में पेश करते हैं।
हालांकि कैंट सीट पर टिकट की दौड़ केवल उन्हीं तक सीमित नहीं है। अन्य दावेदार भी लगातार सक्रिय हैं। इनमें वरिष्ठ पार्षद और शहर सीट से पूर्व प्रत्याशी राजेश अग्रवाल, डॉक्टर अनीस बेग और इंजीनियर अनीस अहमद खां जैसे नाम भी चर्चा में रहते हैं। ये सभी अपने-अपने स्तर पर संगठन और क्षेत्र में सक्रिय हैं और समय आने पर टिकट के लिए दावा पेश कर सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा और इसमें स्थानीय समीकरण, जातीय संतुलन, जीत की संभावना और संगठन की रिपोर्ट जैसे कई पहलू देखे जाएंगे। फिलहाल इतना तय है कि कैंट सीट पर चुनाव से काफी पहले ही दावेदारों की सक्रियता बढ़ चुकी है और आने वाले समय में यह प्रतिस्पर्धा और तेज होने वाली है।
कुल मिलाकर बरेली कैंट विधानसभा सीट पर संजीव सक्सेना की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व अंततः किस चेहरे पर भरोसा जताता है और 2027 के चुनाव में किसे मैदान में उतारा जाता है।

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *