नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली में नगर निगम की कार्रवाई को लेकर उस वक्त बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब निगम कर्मचारियों ने सुबह करीब चार बजे पहुंचकर लगभग एक दर्जन दुकानों को सील कर दिया। यह कार्रवाई इतनी सुबह की गई कि अधिकांश दुकानदारों को इसकी जानकारी तक नहीं हो सकी। जब सुबह करीब सात बजे दुकानदार रोज़ की तरह अपनी दुकानों पर पहुंचे और वहां नगर निगम की सील लगी देखी, तो उनके होश उड़ गए। अचानक दुकान बंद हो जाने से व्यापारियों में घबराहट फैल गई, क्योंकि दुकान बंद होने का मतलब था कि दिनभर का कारोबार पूरी तरह ठप हो जाएगा और आर्थिक नुकसान होगा।
परेशान दुकानदारों ने तुरंत स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संपर्क करना शुरू किया। कई व्यापारियों ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ पार्षद राजेश अग्रवाल को फोन कर पूरी स्थिति बताई और मदद मांगी। व्यापारियों में शिव मक्कड़, हरीश, दिनेश अरोड़ा, संजीव अरोड़ा समेत कई लोग शामिल थे, जिन्होंने सुबह साढ़े सात से आठ बजे के बीच लगातार फोन कर समाधान की गुहार लगाई। दुकानदारों का कहना था कि बिना पहले से स्पष्ट नोटिस दिए अचानक दुकानें सील कर देना उनके लिए बहुत बड़ी समस्या बन गया है।
मामले की गंभीरता समझते हुए राजेश अग्रवाल ने तुरंत विरोध दर्ज कराने का फैसला लिया। उन्होंने व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या को उठाया जाएगा और इसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे वह बड़ी संख्या में व्यापारियों को लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और मामला शहर में चर्चा का विषय बन गया। पूरा मीडिया मौके पर इकट्ठा हो गया।
धरने के दौरान राजेश अग्रवाल ने नगर निगम की नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि निगम ने दुकानों के किराए में कई गुना बढ़ोतरी कर दी है, जो व्यापारियों के लिए असहनीय है। उनके मुताबिक जिन दुकानों का किराया पहले करीब 700 रुपये था, उसे बढ़ाकर लगभग 14 हजार रुपये कर दिया गया है। उन्होंने इसे “काला कानून” बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी किराया वृद्धि प्रदेश के किसी अन्य नगर निगम में लागू नहीं है। उनका आरोप था कि यह नियम केवल बरेली में लागू किया गया है और इससे छोटे व्यापारियों का शोषण हो रहा है।

धरना बढ़ने लगा और व्यापारियों का दबाव भी तेज हो गया। इस बीच राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई। बताया गया कि कुछ दुकानदारों ने सुबह ही पूर्व उपसभापति और भाजपा नेता अतुल कपूर को भी फोन कर मदद मांगी थी। अतुल कपूर ने बताया कि सूचना मिलते ही उन्होंने तुरंत नगर आयुक्त को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। इसके बाद उन्होंने मेयर उमेश गौतम से बात की, जिन्होंने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया, मगर तत्काल कोई हल नहीं निकल सका।
स्थिति बिगड़ती देख अतुल कपूर खुद नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। वहां उन्होंने देखा कि राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में व्यापारी पहले से धरना दे रहे हैं। मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका था और दोनों पक्षों के जनप्रतिनिधि समाधान की कोशिश में जुट गए। इसके बाद अतुल कपूर ने सांसद छत्रपाल गंगवार से संपर्क किया और उनसे मौके पर आकर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।
कुछ ही समय बाद सांसद छत्रपाल गंगवार नगर निगम पहुंचे और उन्होंने अधिकारियों से बातचीत शुरू की। सांसद ने नगर आयुक्त से चर्चा कर व्यापारियों की समस्या सुनी और समाधान निकालने की कोशिश की। काफी देर तक बातचीत चलने के बाद आखिरकार एक समझौता हुआ। तय किया गया कि दुकानों की सील खोल दी जाएगी, लेकिन व्यापारियों से चार गुना शुल्क लिया जाएगा। इस सहमति के बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगी और दुकानों को खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई।
समाधान निकलने के बाद राजेश अग्रवाल ने अपना धरना समाप्त कर दिया, लेकिन साथ ही उन्होंने साफ चेतावनी भी दी कि जब तक किराया वृद्धि का यह नियम वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना था कि यह लड़ाई सिर्फ एक दर्जन दुकानों की नहीं बल्कि पूरे शहर के व्यापारियों की है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
व्यापारियों का भी कहना है कि अचानक इतनी बड़ी किराया वृद्धि और फिर सुबह-सुबह दुकान सील करने जैसी कार्रवाई से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। छोटे दुकानदारों के लिए रोज का कारोबार ही मुख्य आय का साधन होता है। एक दिन दुकान बंद रहने से भी बड़ा नुकसान हो जाता है, ऐसे में बिना पर्याप्त समय दिए की गई कार्रवाई से वे बेहद परेशान हो गए।
दूसरी तरफ नगर निगम के सूत्रों का कहना है कि किराया और शुल्क से जुड़े नियम प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लागू किए जाते हैं और उनका उद्देश्य राजस्व बढ़ाना तथा व्यवस्था सुधारना होता है। हालांकि व्यापारियों का तर्क है कि नियम लागू करने से पहले संवाद होना चाहिए और अचानक कठोर कदम नहीं उठाने चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में नगर निगम और व्यापारियों के संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई व्यापारी संगठनों का मानना है कि यदि प्रशासन पहले बैठक कर समझाता और समय देता, तो विवाद इतना नहीं बढ़ता। वहीं राजनीतिक दल भी अब इस मुद्दे पर खुलकर बयान देने लगे हैं, जिससे यह मामला आगे और गरमाने की संभावना है।
फिलहाल दुकानों की सील खुलने से तत्काल राहत जरूर मिल गई है, लेकिन किराया वृद्धि का मुद्दा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राजेश अग्रवाल और व्यापारी संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि नीति में बदलाव नहीं हुआ तो वे फिर से आंदोलन कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम इस मामले में क्या फैसला लेता है और क्या व्यापारियों की मांगों पर कोई संशोधन किया जाता है या नहीं।
इस तरह सुबह चार बजे शुरू हुई सीलिंग की कार्रवाई ने देखते ही देखते शहर में बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। दिन भर चली भागदौड़, धरना, नेताओं की एंट्री और सांसद की मध्यस्थता के बाद भले ही अस्थायी समाधान निकल आया हो, लेकिन किराया वृद्धि और नियमों को लेकर विवाद अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा।





