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फरीदपुर में धोबी समाज की आवाज दबाने की कोशिश, सर्वजन आम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर की बढ़ती लोकप्रियता से घबराए सपाई और भाजपाई, रास नहीं आई सावन की बधाई, पूरे शहर से हटा दिए भास्कर के होर्डिंग्स और फाड़ दिए बैनर, पढ़ें ओछी राजनीति की पूरी कहानी

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नीरज सिसौदिया, बरेली

फरीदपुर विधानसभा की राजनीति इन दिनों एक अलग ही वजह से चर्चा में है। यहां मुद्दा किसी चुनावी सभा, रैली या बयानबाजी का नहीं, बल्कि सावन की शुभकामनाएं देने के लिए लगाए गए होर्डिंग और बैनरों का है। सर्वजन आम पार्टी का आरोप है कि उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने उनके होर्डिंग और बैनर हटवा दिए तथा कई जगह उन्हें फाड़ दिया। पार्टी इसे केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि धोबी समाज की राजनीतिक आवाज को दबाने की कोशिश बता रही है।

करीब दो वर्ष पहले अस्तित्व में आई सर्वजन आम पार्टी अभी भले ही उत्तर प्रदेश की बड़ी राजनीतिक ताकतों में शामिल न हो, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में उसने अपनी सक्रियता तेजी से बढ़ाई है। फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी लगातार संगठन विस्तार, सामाजिक कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है। इसी वजह से जयप्रकाश भास्कर का नाम अब क्षेत्र की राजनीति में तेजी से उभर रहा है। पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में भास्कर ने गांव-गांव और शहर के मोहल्लों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनी हैं और समाज के हर वर्ग के बीच अपनी पहचान बनाई है।

इसी जनसंपर्क अभियान के तहत सावन के पावन महीने में जयप्रकाश भास्कर की ओर से पूरे फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में लोगों को शुभकामनाएं देने के लिए होर्डिंग और बैनर लगाए गए थे। इन होर्डिंग्स पर किसी राजनीतिक दल पर हमला नहीं था, बल्कि केवल सावन की शुभकामनाओं के साथ सामाजिक सौहार्द और जनसेवा का संदेश दिया गया था। लेकिन पार्टी का आरोप है कि यह बात कुछ विरोधी नेताओं को रास नहीं आई।

सर्वजन आम पार्टी के अनुसार, कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल फरीदपुर आए थे। उनके स्वागत की तैयारियों के दौरान शहर के एक प्रमुख चौराहे पर पहले से लगे जयप्रकाश भास्कर के होर्डिंग के ऊपर समाजवादी पार्टी के एक टिकट के दावेदार ने अपना स्वागत होर्डिंग लगा दिया। जब इस बात की जानकारी जयप्रकाश भास्कर को मिली तो वह रात में ही मौके पर पहुंचे और अपने होर्डिंग के ऊपर लगाया गया दूसरा होर्डिंग हटवा दिया। पार्टी का दावा है कि पूरी घटना का वीडियो भी बनाया गया, ताकि भविष्य में कोई विवाद होने पर उसके प्रमाण मौजूद रहें।

यहीं से विवाद ने नया मोड़ ले लिया। पार्टी नेताओं का आरोप है कि इसके बाद फरीदपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में जहां-जहां जयप्रकाश भास्कर के होर्डिंग और बैनर लगे थे, उन्हें व्यवस्थित तरीके से हटाया जाने लगा। कई स्थानों पर बैनर फाड़ दिए गए, जबकि कुछ जगह पूरे होर्डिंग ही गायब कर दिए गए। सर्वजन आम पार्टी का आरोप है कि इस काम में समाजवादी पार्टी और भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं की भूमिका रही। हालांकि इन आरोपों पर दोनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

जयप्रकाश भास्कर ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतंत्र में विचारों की लड़ाई जनता के बीच होनी चाहिए, न कि पोस्टर और होर्डिंग फाड़कर। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता की लोकप्रियता बढ़ रही है तो उसका मुकाबला जनता के बीच जाकर किया जाना चाहिए। प्रचार सामग्री हटवाना राजनीतिक असहिष्णुता का उदाहरण है।

भास्कर का कहना है कि यह मामला केवल उनके होर्डिंग का नहीं है, बल्कि फरीदपुर में धोबी समाज की राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वर्गीय नंदराम के बाद प्रमुख राजनीतिक दलों ने धोबी समाज के किसी नेता को विधानसभा स्तर पर आगे बढ़ाने की गंभीर कोशिश नहीं की। चुनाव के समय समाज से वोट तो मांगे जाते हैं, लेकिन टिकट देने की बारी आती है तो समाज को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि सर्वजन आम पार्टी ने पहली बार धोबी समाज सहित उन सभी वर्गों को राजनीतिक मंच देने का प्रयास किया है, जिन्हें लंबे समय तक केवल वोट बैंक समझा गया। यही कारण है कि समाज के युवाओं और आम लोगों का पार्टी के प्रति रुझान तेजी से बढ़ रहा है। उनके अनुसार, कुछ राजनीतिक दल इसी बढ़ते जनसमर्थन से परेशान हैं।

राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में छोटे दल अब केवल वोट काटने वाली पार्टियां नहीं रह गए हैं। यदि कोई दल किसी क्षेत्र में सामाजिक आधार तैयार कर लेता है तो वह चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखता है। फरीदपुर विधानसभा में भी विभिन्न जातीय और सामाजिक समूहों का संतुलन काफी अहम माना जाता है। ऐसे में यदि सर्वजन आम पार्टी किसी एक बड़े सामाजिक वर्ग के साथ-साथ अन्य वर्गों में भी प्रभाव बढ़ाने में सफल होती है तो आने वाले विधानसभा चुनाव में उसका असर दिखाई दे सकता है।

सर्वजन आम पार्टी के कार्यकर्ताओं का दावा है कि पिछले कुछ महीनों में पार्टी के साथ युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों के लोगों की संख्या बढ़ी है। यही कारण है कि अब पार्टी के कार्यक्रमों में पहले की तुलना में कहीं अधिक भीड़ देखने को मिल रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि विरोधियों द्वारा होर्डिंग हटाने जैसी घटनाओं से संगठन कमजोर नहीं होगा, बल्कि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल और बढ़ेगा।

जयप्रकाश भास्कर ने अपने समर्थकों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी प्रकार की नकारात्मक राजनीति में विश्वास नहीं करती और आगे भी जनसंपर्क, सामाजिक न्याय तथा सर्वसमाज के सम्मान की राजनीति करती रहेगी। उन्होंने कहा कि विरोधियों की ऐसी हरकतें यह साबित करती हैं कि सर्वजन आम पार्टी अब राजनीतिक रूप से गंभीर चुनौती बन चुकी है।

उन्होंने प्रशासन से भी मांग की कि जिन लोगों ने होर्डिंग और बैनर हटाए या फाड़े हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी ने कानून अपने हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल के साथ इस तरह की घटना दोबारा न हो।

फिलहाल फरीदपुर की राजनीति में यह मामला चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। एक ओर सर्वजन आम पार्टी इसे अपनी बढ़ती ताकत का संकेत मान रही है, तो दूसरी ओर क्षेत्र के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की घटनाएं स्थानीय राजनीति को और अधिक गर्मा सकती हैं। इतना जरूर है कि इस विवाद ने जयप्रकाश भास्कर और सर्वजन आम पार्टी को फरीदपुर की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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