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बरेली कैंट में ब्राह्मण समीकरण साधने की सपा की बड़ी चाल, पंडित दीपक शर्मा ने दिखाया दम, सपा सांसद सनातन पांडेय की मौजूदगी में मंडल स्तरीय सम्मेलन बना शक्ति प्रदर्शन, अखिलेश यादव के ब्राह्मण आउटरीच अभियान में बरेली से सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरे पंडित दीपक शर्मा, जानिये क्यों?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ-साथ अब पार्टी का पूरा फोकस ब्राह्मण समाज पर भी दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को बरेली में आयोजित मंडल स्तरीय ब्राह्मण बैठक केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं था, बल्कि इसे आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है। इस सम्मेलन में सबसे अधिक चर्चा समाजवादी पार्टी के महानगर महासचिव और बरेली कैंट विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार पंडित दीपक शर्मा की रही, जिन्होंने बड़ी संख्या में प्रभावशाली ब्राह्मण चेहरों को एक मंच पर लाकर अपनी संगठन क्षमता और सामाजिक पकड़ का मजबूत संदेश दिया।
जिस तरह अखिलेश यादव पिछले कुछ समय से ब्राह्मण समाज को साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, उसमें बरेली की यह बैठक और पंडित दीपक शर्मा की सक्रियता को भविष्य की राजनीतिक तस्वीर का संकेत माना जा सकता है।
बलिया से समाजवादी पार्टी के सांसद एवं वरिष्ठ नेता सनातन पांडेय को प्रदेशभर में प्रबुद्ध ब्राह्मणों के बीच संवाद स्थापित करने और पार्टी की स्वीकार्यता का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसी क्रम में उनका बरेली दौरा हुआ।


हालांकि सम्मेलन की औपचारिक अगुवाई सनातन पांडेय ने की, लेकिन उसकी सफलता के पीछे सबसे बड़ी भूमिका पंडित दीपक शर्मा की मानी जा रही है। उन्होंने जिलेभर के उन प्रभावशाली ब्राह्मण चेहरों को सम्मेलन तक पहुंचाया, जो सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक, व्यापारिक और बौद्धिक क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान रखते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि सम्मेलन में केवल पारंपरिक सपा कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि ऐसे लोग भी शामिल हुए, जो सामान्यतः समाजवादी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखते रहे हैं। यही कारण है कि इस आयोजन को केवल एक बैठक नहीं, बल्कि ब्राह्मण समाज में सपा की नई पैठ का संकेत माना जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पिछले कई वर्षों से योगी आदित्यनाथ सरकार पर ब्राह्मणों की उपेक्षा और उनके खिलाफ अपराध बढ़ने के आरोप लगाते रहे हैं। परशुराम जयंती से लेकर भगवान परशुराम की प्रतिमा और ब्राह्मण सम्मेलनों तक, सपा लगातार इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीडीए सामाजिक समीकरण के साथ यदि ब्राह्मण समाज का एक प्रभावी वर्ग भी समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ता है, तो कई सीटों पर चुनावी मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है। यही वजह है कि पार्टी ने प्रदेशभर में ब्राह्मण संवाद अभियान शुरू किया है और वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग जिलों में भेजा जा रहा है। बरेली का सम्मेलन इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बरेली कैंट विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। यहां ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या भी अच्छी-खासी मानी जाती है। राजनीतिक समीकरणों पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि यदि समाजवादी पार्टी इस सीट पर ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने का फैसला करती है तो पंडित दीपक शर्मा सबसे मजबूत दावेदारों में दिखाई देते हैं। इसके पीछे कई कारण हैं- संगठन में लंबे समय से सक्रिय भूमिका। महानगर महासचिव के रूप में मजबूत नेटवर्क। ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों से लगातार संपर्क। सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी। बैठक के जरिए बड़ी संख्या में प्रभावशाली लोगों को एक मंच पर लाने की क्षमता। शुक्रवार का सम्मेलन इन सभी दावों को सार्वजनिक रूप से स्थापित करता नजर आया।


सम्मेलन के दौरान ब्राह्मण समाज की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों का अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया। इनमें बरेली बार संगठन के सचिव दीपक पांडे, भागवत कथा व्यास पंडित सीताराम प्रतिहस्त, पंडित मेधाब्रत शास्त्री, पंडित विनोद शर्मा, शिक्षक प्रबल तिवारी, प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अतुल शर्मा, इंजीनियर देश दीपक शास्त्री और सी.एल. मिश्रा सहित अनेक प्रमुख लोग शामिल रहे।
इसी दौरान डॉ. पारितोष शर्मा ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वहीं वरिष्ठ सपाई डॉ. राजेश पाराशरी और मुकेश पांडे का भी सम्मान किया गया। इससे यह संदेश देने की कोशिश हुई कि पार्टी केवल राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रतिष्ठित वर्गों को भी अपने साथ जोड़ना चाहती है।


राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को पंडित दीपक शर्मा के शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। आमतौर पर किसी भी टिकट दावेदार की ताकत का आकलन इस आधार पर किया जाता है कि वह अपने प्रभाव क्षेत्र से कितने प्रभावशाली लोगों को पार्टी के कार्यक्रम में जोड़ सकता है। इस कसौटी पर देखें तो शुक्रवार का आयोजन दीपक शर्मा के पक्ष में जाता दिखाई देता है। सम्मेलन में मौजूद कई चेहरे ऐसे थे, जो पहली बार समाजवादी पार्टी के मंच पर नजर आए। यही वजह है कि संगठन के भीतर भी यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि पार्टी ब्राह्मण चेहरे पर दांव खेलती है तो दीपक शर्मा का नाम सबसे आगे हो सकता है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति लगातार नए सामाजिक समीकरणों की ओर बढ़ रही है। भाजपा जहां अपने पारंपरिक समर्थन आधार को मजबूत बनाए रखने में जुटी है, वहीं समाजवादी पार्टी पीडीए के साथ-साथ सवर्ण वर्ग, विशेषकर ब्राह्मणों के बीच भी अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास कर रही है। बरेली जैसे जिले में, जहां शहरी और सवर्ण मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं, वहां ब्राह्मण बैठक का सफल आयोजन केवल प्रतीकात्मक नहीं माना जा सकता। यदि आने वाले महीनों में पार्टी इसी तरह के कार्यक्रम लगातार करती है और स्थानीय नेतृत्व सामाजिक आधार को मजबूत बनाए रखता है, तो इसका असर विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दे सकता है।

क्या कैंट सीट पर बदलेगा सपा का चुनावी प्रयोग?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समाजवादी पार्टी बरेली कैंट जैसी महत्वपूर्ण सीट पर इस बार ब्राह्मण प्रत्याशी उतारेगी? पार्टी नेतृत्व अभी इस पर खुलकर कुछ नहीं कह रहा, लेकिन जिस तरह अखिलेश यादव ब्राह्मण प्रतिनिधित्व बढ़ाने के संकेत दे चुके हैं और प्रदेशभर में ब्राह्मण बैठकों की श्रृंखला चल रही है, उससे इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा होता है तो शुक्रवार का सम्मेलन भविष्य के चुनावी समीकरणों की शुरुआती पटकथा साबित हो सकता है और पंडित दीपक शर्मा की दावेदारी को सबसे मजबूत आधार देने वाला आयोजन भी।

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