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लखनऊ और दिल्ली के बीच उलझी भाजपा ब्रज क्षेत्र की नई टीम, पूरनलाल लोधी को अध्यक्ष बने दो महीने से ज्यादा, अब तक नहीं बनी कार्यकारिणी, 2027 की चुनावी तैयारी के बीच संगठन विस्तार पर पेच

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नीरज सिसौदिया, नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने भले ही संगठन के स्तर पर बड़े बदलाव कर दिए हों, लेकिन ब्रज क्षेत्र में नई टीम के गठन को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। भाजपा ने 25 जून को जारी प्रदेश संगठन की नई सूची में पूरन लाल लोधी को ब्रज क्षेत्र का नया क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया था। उन्होंने जुलाई के पहले सप्ताह में आगरा स्थित ब्रज क्षेत्र कार्यालय में विधिवत कार्यभार भी संभाल लिया था।
अब अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाले दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन ब्रज क्षेत्र की नई क्षेत्रीय कार्यकारिणी की घोषणा नहीं हो सकी है। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पार्टी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि नई टीम को लेकर लखनऊ और दिल्ली के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। यही वजह है कि पूरनलाल लोधी की ओर से तैयार की जा रही सूची बार-बार अंतिम मंजूरी के स्तर पर अटक जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, क्षेत्रीय अध्यक्ष की ओर से संभावित पदाधिकारियों के नामों की सूची तैयार कर संगठन के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष रखी जा रही है। लेकिन सूची में शामिल कुछ नामों को लेकर प्रदेश संगठन को आपत्ति होती है तो कुछ नाम केंद्रीय स्तर पर पसंद नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में सूची में लगातार बदलाव की स्थिति बनी हुई है।
सूत्रों का कहना है कि पूरनलाल लोधी पिछले कुछ समय में इस सिलसिले में लखनऊ और दिल्ली के कई चक्कर लगा चुके हैं। कोशिश यह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ऐसी टीम तैयार हो, जिसमें संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और चुनावी सक्रियता के बीच तालमेल बैठाया जा सके। लेकिन अलग-अलग स्तरों पर पसंद और प्राथमिकताओं के चलते अंतिम सूची पर सहमति बनने में समय लग रहा है।
हालांकि भाजपा की ओर से सार्वजनिक तौर पर यह नहीं कहा गया है कि कार्यकारिणी की घोषणा किसी विवाद या मतभेद के कारण रुकी हुई है। इसलिए सूत्रों के इन दावों को पार्टी की आधिकारिक स्थिति नहीं माना जा सकता।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 25 जून को उत्तर प्रदेश संगठन की नई टीम का ऐलान किया था। इसमें छह संगठनात्मक क्षेत्रों के अध्यक्ष भी बदले गए थे। ब्रज क्षेत्र की जिम्मेदारी पूरन लाल लोधी को, पश्चिम क्षेत्र की जिम्मेदारी नबाब सिंह नागर को, कानपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी राम किशोर साहू को, अवध की जिम्मेदारी अवधेश द्विवेदी को, काशी की जिम्मेदारी अशोक चौरसिया और गोरखपुर की जिम्मेदारी विनोद राय को दी गई थी।
ब्रज क्षेत्र में पूरन लाल लोधी की नियुक्ति को कई राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देखा गया। वह बरेली में भाजपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव रखते हैं। उनकी नियुक्ति के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने विभिन्न जिलों में उनका जोरदार स्वागत किया।

65 विधानसभा सीटों का लक्ष्य

पूरनलाल लोधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2027 का विधानसभा चुनाव है। ब्रज क्षेत्र भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अलग-अलग जिलों के दौरे में वह कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान करते रहे हैं। मैनपुरी में भी उन्होंने कार्यकर्ताओं से 2027 के चुनाव के लिए अभी से तैयारी करने और बूथ मजबूत करने को कहा था। हाथरस के एक कार्यक्रम में उन्होंने ब्रज क्षेत्र की सभी 65 विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत का लक्ष्य भी बताया था।
यही वजह है कि क्षेत्रीय कार्यकारिणी का गठन महज संगठनात्मक औपचारिकता नहीं माना जा रहा। 2027 के चुनाव से पहले क्षेत्रीय टीम को जिलों में पार्टी की चुनावी रणनीति लागू करने, बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखने और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

नई टीम में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बड़ी चुनौती

भाजपा के सामने ब्रज क्षेत्र की नई टीम बनाते समय सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन कायम करने की हो सकती है। ब्रज क्षेत्र में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, कासगंज, अलीगढ़, हाथरस, बदायूं, बरेली, शाहजहांपुर समेत कई जिलों का राजनीतिक प्रभाव है। अलग-अलग जिलों की अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं और सामाजिक समीकरण हैं। ऐसे में क्षेत्रीय पदाधिकारियों का चयन करते समय पार्टी को यह देखना होगा कि किसी एक जिले या सामाजिक वर्ग का अत्यधिक प्रभाव न दिखाई दे। इसके अलावा पुराने संगठन कार्यकर्ताओं और नए राजनीतिक चेहरों के बीच भी संतुलन बैठाना होगा।
सूत्रों के मुताबिक, यही वह बिंदु है जहां सूची को लेकर कई स्तरों पर विचार-विमर्श हो रहा है। क्षेत्रीय अध्यक्ष अपने स्तर पर सक्रिय और भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देना चाहते हैं, जबकि संगठन के दूसरे स्तरों पर स्थानीय समीकरण और आगामी चुनाव की जरूरतों को भी ध्यान में रखने की कोशिश की जा रही है।

पूरनलाल लोधी लगातार कर रहे हैं क्षेत्र का दौरा

कार्यकारिणी की घोषणा भले ही अटकी हुई हो, लेकिन पूरनलाल लोधी ने क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में अपना दौरा अभियान जारी रखा है। मथुरा से लेकर आगरा, एटा, बदायूं, मैनपुरी और हाथरस तक वह कार्यकर्ताओं के बीच पहुंच रहे हैं। एटा में उन्होंने बूथ अध्यक्ष सम्मेलन को लेकर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया था। मथुरा में संगठनात्मक बैठक के दौरान उन्होंने बूथ को मजबूत करने पर जोर दिया। बदायूं और मैनपुरी में भी उनके स्वागत कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता पहुंचे। इन कार्यक्रमों में उन्होंने कार्यकर्ताओं को 2027 की तैयारी में अभी से जुटने का संदेश दिया। इससे साफ है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष संगठन के स्तर पर सक्रिय हैं, लेकिन उनकी टीम के गठन का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है।

क्या चुनावी तैयारी पर पड़ेगा असर?

भाजपा के लिए यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। चुनाव से पहले पार्टी को बूथ, मंडल, जिला और क्षेत्रीय स्तर पर संगठन को पूरी तरह सक्रिय रखना होता है। क्षेत्रीय टीम इन सभी स्तरों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी होती है। यदि नई कार्यकारिणी का गठन जल्द नहीं होता है तो चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में कुछ हद तक असुविधा हो सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां स्थानीय स्तर पर गुटबाजी या नेतृत्व को लेकर मतभेद हैं, वहां क्षेत्रीय पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
हालांकि भाजपा दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक संगठनों में से एक होने का दावा करती है और उसके पास बूथ स्तर तक संगठनात्मक ढांचा मौजूद है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि क्षेत्रीय कार्यकारिणी की घोषणा में देरी से पार्टी की चुनावी तैयारियों पर कोई बड़ा असर पड़ रहा है।

अब निगाहें नई कार्यकारिणी पर

पूरनलाल लोधी के अध्यक्ष बनने के बाद ब्रज क्षेत्र में उनका स्वागत जिस तरह हुआ और उन्होंने जिस तरह लगातार जिलों का दौरा किया, उससे पार्टी कार्यकर्ताओं में सक्रियता दिखाई दे रही है। लेकिन अब कार्यकर्ताओं की निगाहें उनकी नई टीम पर टिकी हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को ब्रज क्षेत्र में संगठनात्मक रूप से बड़ी जिम्मेदारी निभानी है। पार्टी के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में विधानसभा सीटें हैं और भाजपा इसे अपने चुनावी आधार का मजबूत हिस्सा मानती है।
ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नई कार्यकारिणी की घोषणा कब होगी, बल्कि यह भी है कि इस टीम में किन चेहरों को जगह मिलेगी, किन जिलों को कितना प्रतिनिधित्व मिलेगा और जातीय-सामाजिक समीकरण किस तरह साधे जाएंगे। फिलहाल स्थिति यही है कि अध्यक्ष की नियुक्ति हो चुकी है, क्षेत्रीय अध्यक्ष लगातार दौरे कर रहे हैं, 2027 का चुनावी लक्ष्य सामने है, लेकिन टीम अभी कागजों में ही घूम रही है।
सूत्रों के मुताबिक लखनऊ और दिल्ली के बीच सहमति बनते ही नई कार्यकारिणी की घोषणा की जा सकती है। अब देखना होगा कि यह इंतजार आखिर कब खत्म होता है और पूरनलाल लोधी को अपनी पसंद की टीम मिलती है या पार्टी नेतृत्व की पसंद के अनुसार सूची में एक बार फिर बड़ा बदलाव होता है।

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