नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब धीरे-धीरे प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण मुकाबला बनता जा रहा है। भाजपा विधायक स्वर्गीय श्याम बिहारी लाल के निधन के बाद खाली हुई इस सीट को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियां तैयार करनी शुरू कर दी हैं। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा समाजवादी पार्टी की रणनीति को लेकर हो रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी ने इस बार फरीदपुर उपचुनाव में स्वर्गीय सियाराम सागर के परिवार से ही उम्मीदवार उतारने का फैसला लगभग कर लिया है और पार्टी के भीतर चंद्रसेन सागर के नाम पर सहमति लगभग बन चुकी है। बताया जा रहा है कि अब सिर्फ आधिकारिक घोषणा बाकी है।
फरीदपुर की राजनीति में सागर परिवार का प्रभाव लंबे समय से रहा है। पांच बार विधायक रहे स्वर्गीय सियाराम सागर इस क्षेत्र के बेहद लोकप्रिय नेता माने जाते थे। उनके निधन के बाद भी उनके परिवार की राजनीतिक पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। यही कारण है कि समाजवादी पार्टी इस उपचुनाव में उसी विरासत को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी फरीदपुर सीट को केवल एक उपचुनाव के रूप में नहीं देख रही है, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में भी ले रही है। ऐसे में पार्टी किसी ऐसे चेहरे को मैदान में उतारना चाहती है जो क्षेत्र में पहले से ही मजबूत पकड़ रखता हो और जनता के बीच उसकी पहचान हो।
इसी कारण सियाराम सागर के छोटे भाई चंद्रसेन सागर का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। चंद्रसेन सागर पिछले लगभग चार दशकों से फरीदपुर की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। जब सियाराम सागर विधायक थे, तब भी चंद्रसेन सागर उनकी राजनीतिक गतिविधियों में बराबर की भूमिका निभाते थे। क्षेत्र में उनकी पहचान एक ऐसे नेता की रही है जो लगातार जनता के बीच सक्रिय रहता है और कार्यकर्ताओं से मजबूत संपर्क बनाए रखता है।
चंद्रसेन सागर का राजनीतिक अनुभव भी उन्हें अन्य संभावित उम्मीदवारों से अलग बनाता है। वे ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं और क्षेत्र की स्थानीय राजनीति की गहरी समझ रखते हैं।
गांव-गांव में उनकी पहचान एक जमीनी नेता के रूप में मानी जाती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यही वजह है कि समाजवादी पार्टी के अंदर भी उनके नाम पर सहमति बनने में ज्यादा समय नहीं लगा।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व को जो फीडबैक मिला है, उसमें यह साफ कहा गया है कि यदि सपा को फरीदपुर में मजबूत लड़ाई लड़नी है तो सियाराम सागर के परिवार से ही उम्मीदवार उतारना सबसे बेहतर विकल्प होगा और इस मामले में चंद्रसेन सागर सबसे मजबूत दावेदार हैं।
पिछले कुछ चुनावों में समाजवादी पार्टी को फरीदपुर सीट पर लगातार हार का सामना करना पड़ा है। यही कारण है कि इस बार पार्टी ऐसी रणनीति बनाना चाहती है जो संगठन में नई ऊर्जा भर सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चंद्रसेन सागर को टिकट मिलता है तो इससे सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ सकता है। सियाराम सागर की राजनीतिक विरासत और चंद्रसेन सागर का अनुभव पार्टी के लिए नई ऊर्जा का काम कर सकता है।
इसी वजह से यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या फरीदपुर की सियासी महाभारत में चंद्रसेन सागर समाजवादी पार्टी के लिए संजीवनी साबित हो पाएंगे।
फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक समीकरण हमेशा से चुनावी परिणामों को प्रभावित करते रहे हैं। चंद्रसेन सागर जाटव समाज से आते हैं और इस समाज का इस क्षेत्र में अच्छा प्रभाव माना जाता है।
राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो जाटव समाज ने कभी भी भाजपा को यहां से आसानी से जीतने नहीं दिया है। यहां तक कि जब सियाराम सागर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे तब भी उन्हें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नंदराम ने हराया था, जो धोबी समाज से आते थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रसेन सागर को जाटव समाज के साथ-साथ यादव मतदाताओं का भी समर्थन मिल सकता है। इसके अलावा धोबी समाज और कुछ सवर्ण वर्गों में भी उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है।
यदि यह सामाजिक समीकरण चुनाव में एकजुट हो जाते हैं तो यह भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है।
दूसरी ओर भाजपा भी इस उपचुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। शुरुआत में यह चर्चा थी कि पार्टी सहानुभूति के आधार पर स्वर्गीय श्याम बिहारी लाल के बेटे को उम्मीदवार बना सकती है।
लेकिन जैसे ही समाजवादी पार्टी की ओर से चंद्रसेन सागर का नाम सामने आया, भाजपा के भीतर भी रणनीति को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार अब भाजपा ऐसे उम्मीदवार की तलाश कर रही है जो फरीदपुर की राजनीति में मजबूत पकड़ रखता हो और चंद्रसेन सागर जैसे अनुभवी नेता को कड़ी टक्कर दे सके।
इसी कारण यह संभावना भी जताई जा रही है कि भाजपा किसी पुराने और अनुभवी नेता को मैदान में उतार सकती है।
हाल ही में समाजवादी पार्टी के महासचिव शिवपाल सिंह यादव का बरेली दौरा भी इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा माना जा रहा है। बताया जाता है कि उनके दौरे के दौरान जिले की कई सीटों पर संगठन की स्थिति और संभावित उम्मीदवारों की ताकत का आकलन किया गया था।
सूत्रों का कहना है कि फरीदपुर सीट को लेकर जो रिपोर्ट सामने आई, उसमें यह साफ कहा गया कि इस बार सियाराम सागर के परिवार से उम्मीदवार उतारना ही सबसे प्रभावी रणनीति होगी।
रिपोर्ट में चंद्रसेन सागर को सबसे मजबूत दावेदार बताया गया और इसी आधार पर पार्टी के भीतर उनके नाम पर सहमति बनने लगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फरीदपुर का यह उपचुनाव केवल वर्तमान की लड़ाई नहीं है बल्कि भविष्य की रणनीति भी तय करेगा।
जो उम्मीदवार इस उपचुनाव में जीत दर्ज करेगा, उसके 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उसी सीट से उम्मीदवार बनने की संभावना काफी मजबूत हो जाएगी।
इसी वजह से भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रही हैं।
फरीदपुर विधानसभा उपचुनाव धीरे-धीरे एक बड़े राजनीतिक मुकाबले का रूप लेता जा रहा है। समाजवादी पार्टी यदि वास्तव में सियाराम सागर की विरासत पर दांव लगाते हुए चंद्रसेन सागर को उम्मीदवार बनाती है तो यह चुनाव बेहद दिलचस्प हो सकता है।
चार दशक से अधिक का राजनीतिक अनुभव, क्षेत्र में मजबूत पकड़ और सियाराम सागर की राजनीतिक विरासत—ये सभी कारण चंद्रसेन सागर को एक मजबूत उम्मीदवार बनाते हैं।
अब सबकी नजरें समाजवादी पार्टी की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। यदि पार्टी ने चंद्रसेन सागर के नाम पर मुहर लगा दी, तो फरीदपुर की सियासी जंग और भी रोचक हो जाएगी और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चंद्रसेन सागर वास्तव में सपा के लिए संजीवनी साबित हो पाते हैं या नहीं।





