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इंजीनियर की नई सोशल इंजीनियरिंग, भाजपा में शिफ्ट हुए कांग्रेस के वोटों पर सपा नेता इंजीनियर अनीस अहमद खां की नजर, डोर-टु-डोर शुरू किया ‘चाय पर पीडीए की चर्चा’ अभियान, पढ़ें क्या है उनका नया फॉर्मूला?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष और विधानसभा टिकट के प्रबल दावेदार इंजीनियर अनीस अहमद खां ने नई सोशल इंजीनियरिंग के तहत एक अलग रणनीति अपनाई है। उनका फोकस उन वोटों पर है जो कभी कांग्रेस के साथ थे लेकिन समय के साथ भाजपा की ओर शिफ्ट हो गए। इन्हें वापस अपने पक्ष में लाने के लिए उन्होंने डोर-टु-डोर ‘चाय पर पीडीए की चर्चा’ अभियान शुरू किया है, जो अब उनकी चुनावी रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है।
बरेली में सपा की राजनीति को मजबूत करने के लिए इंजीनियर अनीस अहमद खां इस समय पूरी तरह जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं। वह बड़े मंचों और भीड़-भाड़ वाले आयोजनों से ज्यादा सीधे जनता के बीच जाकर संवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनके अभियान की खासियत यह है कि वह मोहल्लेवार किसी दलित या पिछड़े परिवार के घर पहुंचते हैं, वहीं बैठकर चाय पीते हैं और स्थानीय लोगों से खुलकर बातचीत करते हैं।


हाल ही में नवादा शेखान इलाके में भी उन्होंने इसी तरह एक परिवार के घर जाकर ‘चाय पर पीडीए की चर्चा’ की। इस दौरान उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं और उन्हें अपनी योजनाओं के बारे में बताया। उनका कहना है कि राजनीति सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि भरोसे से चलती है और भरोसा तभी बनता है जब नेता जनता के बीच जाकर उनकी बात सुने।
उनके इस अभियान का सबसे बड़ा आधार “पीडीए” यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग है। वह लगातार इस बात को उठा रहे हैं कि इन वर्गों को सत्ता, नौकरियों और सरकारी योजनाओं में उनकी आबादी के हिसाब से उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। आरक्षण और प्रमोशन जैसे मुद्दों को भी वह चर्चा का अहम हिस्सा बना रहे हैं।
इसके साथ ही युवाओं के बीच बेरोजगारी का मुद्दा भी उनके एजेंडे में प्रमुख है। वह लोगों को समझा रहे हैं कि स्थानीय स्तर पर रोजगार कैसे बढ़ाया जा सकता है और छोटे व्यापारियों व उद्योगों को किस तरह मदद दी जा सकती है। महंगाई भी उनकी चर्चा का एक बड़ा विषय है- चाहे वह रसोई गैस सिलेंडर हो, पेट्रोल-डीजल या रोजमर्रा की जरूरत का सामान।
इंजीनियर अनीस अहमद खां अपने अभियान में सुरक्षा के मुद्दे को भी प्रमुखता दे रहे हैं। खासकर दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के बीच “सुरक्षा और सम्मान” का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि समाज के हर वर्ग को सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, तभी विकास संभव है।
शिक्षा और स्वास्थ्य भी उनके प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। वह सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों की हालत सुधारने की बात कर रहे हैं, क्योंकि गरीब तबके के लिए यही सबसे बड़ा सहारा होते हैं। इसके अलावा वह स्थानीय समस्याओं- जैसे सड़क, पानी, बिजली और सफाई को भी सीधे लोगों से जोड़कर चर्चा करते हैं, जिससे लोगों को लगता है कि उनकी समस्याएं वास्तव में सुनी जा रही हैं।


अपने अभियान के दौरान वह सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पिछली योजनाओं का भी जिक्र करते हैं और बताते हैं कि अगर उनकी सरकार आती है तो महिलाओं और युवाओं के लिए नई योजनाएं लाई जाएंगी जिनमें से कुछ की घोषणा अखिलेश यादव पहले ही कर चुके हैं। खासतौर पर महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के वादे को वह घर-घर तक पहुंचा रहे हैं।
दरअसल, बरेली कैंट सीट पर पिछले चुनाव के नतीजे सपा के लिए पूरी तरह निराशाजनक नहीं रहे। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार को करीब 10 हजार वोटों से हार मिली थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र में सपा प्रत्याशी बहुत कम वोटों के अंतर (लगभग 3200) से पीछे रहे। ऐसे में पार्टी को लगता है कि थोड़ी और मेहनत से यह सीट जीती जा सकती है।
इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए इंजीनियर अनीस अहमद खां ने अपनी रणनीति तैयार की है। उन्हें पता है कि इस सीट की सामाजिक संरचना ऐसी है जहां दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वोट मिलकर चुनाव का रुख बदल सकते हैं। अगर वह इन वर्गों के कुछ हजार वोट भी अपने पक्ष में जोड़ लेते हैं, तो जीत का रास्ता आसान हो सकता है।
उनका खास फोकस नवादा शेखान, कालीबाड़ी, सुभाष नगर, मढ़ीनाथ, गंगापुर और बदायूं रोड जैसे इलाकों पर है, जहां इन वर्गों की अच्छी-खासी आबादी है। यही वे क्षेत्र हैं जहां कभी कांग्रेस का कुछ प्रभाव हुआ करता था, लेकिन अब वहां उसका जनाधार कमजोर हो चुका है। मजबूत नेतृत्व के अभाव में कांग्रेस के वोट भाजपा में शिफ्ट हो चुके हैं। इंजीनियर अनीस अहमद खां इसी खाली जगह को भरने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी नजर खास तौर पर उन वोटरों पर है जो कांग्रेस से हटकर भाजपा की ओर चले गए थे। वह उन्हें फिर से अपने साथ जोड़ने के लिए व्यक्तिगत संपर्क और भरोसे की राजनीति पर जोर दे रहे हैं।
कुल मिलाकर, ‘चाय पर पीडीए की चर्चा’ सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सोशल इंजीनियरिंग है, जिसके जरिए इंजीनियर अनीस अहमद खां बरेली कैंट की राजनीति में नया समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि उनकी यह रणनीति चुनावी नतीजों में कितनी असरदार साबित होती है।

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