नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ बरेली की सियासत में भी टिकट को लेकर अंदरूनी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। खास तौर पर बरेली कैंट विधानसभा सीट पर कांग्रेस की संभावित रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं बढ़ गई हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता और बरेली कैंट से पार्टी के पूर्व प्रत्याशी नवाब मुजाहिद हसन खां ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी किसी सीट पर उम्मीदवार का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन पार्टी के भीतर टिकट को लेकर संभावित दावेदारों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
एक ओर कांग्रेस की केंद्रीय और प्रदेश स्तरीय टीमें संगठन को मजबूत करने और नए सिरे से तैयार करने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नेता अपने-अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में लगे हैं। इसी कड़ी में नवाब मुजाहिद हसन की बढ़ती सक्रियता को बरेली कैंट की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
कांग्रेस संगठन में भी जल्द बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सितंबर के पहले सप्ताह में बरेली कांग्रेस को नया जिलाध्यक्ष मिल सकता है। इस पद के लिए पूर्व जिलाध्यक्ष रामदेव पांडेय, पूर्व महानगर अध्यक्ष अजय शुक्ला समेत कई अन्य नेताओं के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं।
जिलाध्यक्ष की नियुक्ति महज संगठनात्मक बदलाव नहीं होगी, बल्कि इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी पड़ सकता है। जिला संगठन ही बूथ स्तर तक पार्टी की गतिविधियों, चुनावी कार्यक्रमों और संभावित उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए जिलाध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रही कवायद पर पार्टी के नेताओं और संभावित उम्मीदवारों की निगाहें टिकी हुई हैं।
गठबंधन हुआ तो 2017 का फॉर्मूला अहम
कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर चल रही चर्चाओं में समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन भी बड़ा मुद्दा है। पार्टी के कुछ नेताओं की इच्छा बताई जा रही है कि यदि 2027 में कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन होता है तो उन सीटों पर कांग्रेस को प्राथमिकता दी जाए, जहां 2017 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के दौरान कांग्रेस के उम्मीदवार मैदान में उतरे थे।
इसके पीछे कांग्रेस नेताओं का तर्क यह बताया जा रहा है कि जिन सीटों पर पार्टी पहले से चुनाव लड़ती रही है, वहां संगठन और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी का लाभ उठाया जा सकता है। साथ ही स्थानीय कांग्रेस नेताओं के बीच यह मांग भी उठ रही है कि गठबंधन में कांग्रेस के हिस्से में आने वाली सीटों पर पार्टी के पुराने और समर्पित नेताओं को ही प्राथमिकता दी जाए।
यदि पार्टी के भीतर यह फॉर्मूला स्वीकार किया जाता है तो बरेली कैंट सीट पर नवाब मुजाहिद हसन की दावेदारी स्वाभाविक रूप से मजबूत हो सकती है।
टिकट की दौड़ में नवाब मुजाहिद सबसे आगे?
नवाब मुजाहिद हसन हसन खां पहले भी बरेली कैंट विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी रह चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में सक्रियता के चलते वह पार्टी के संभावित दावेदारों में प्रमुख नाम माने जा रहे हैं।
पिछले कुछ महीनों में उनकी दिल्ली यात्रा भी बढ़ी है। बताया जाता है कि उन्होंने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की है। पार्टी के भीतर अपने संपर्कों को मजबूत करने के साथ-साथ वह स्थानीय स्तर पर भी सक्रिय नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की ओर से भी नवाब मुजाहिद के समर्थन में सार्वजनिक रूप से सकारात्मक रुख सामने आने की बात कही जा रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इमरान मसूद के कथित बयान कि वह नवाब साहब के ‘वकील’ हैं और हाईकमान के सामने उनकी दावेदारी की वकालत करेंगे, को भी उनके समर्थक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान को ही करना है और आधिकारिक टिकट घोषणा तक किसी भी दावेदारी को अंतिम नहीं माना जा सकता।
दिल्ली में नेताओं से मुलाकातों के साथ ही नवाब मुजाहिद हसन की स्थानीय गतिविधियां भी बढ़ी हैं। क्षेत्र में उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं की टीमें सक्रिय बताई जा रही हैं। स्थानीय कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी बढ़ी है और समर्थक भी लगातार लोगों के बीच संपर्क कर रहे हैं।
राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए यह संकेत जरूर मिल रहा है कि नवाब मुजाहिद 2027 की लड़ाई को लेकर अपनी तैयारियों में पीछे नहीं रहना चाहते। हालांकि उन्होंने अभी तक खुलकर अपनी उम्मीदवारी का औपचारिक दावा नहीं किया है, लेकिन उनके समर्थकों की सक्रियता को संभावित चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर भी नजर?
बरेली कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष को लेकर चल रही चर्चाओं का एक दूसरा पहलू भी है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि जिस नेता को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलेगी, उसके सामने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ विधानसभा चुनाव के लिए प्रभावी टीम तैयार करने की चुनौती होगी।
ऐसे में कांग्रेस के संभावित विधानसभा उम्मीदवार भी चाहते हैं कि संगठन की कमान ऐसे व्यक्ति के हाथ में हो जिसके साथ उनके राजनीतिक समीकरण बेहतर हों। नवाब मुजाहिद हसन के समर्थकों की ओर से भी अपने करीबी व्यक्ति को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाने की कोशिश की चर्चा है। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सपा के दावेदारों के सामने नई चुनौती
बरेली कैंट सीट का राजनीतिक समीकरण कांग्रेस-सपा संबंधों से भी प्रभावित हो सकता है। यदि 2027 में दोनों दलों के बीच गठबंधन होता है और सीट कांग्रेस के हिस्से में जाती है तो सपा के संभावित उम्मीदवारों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में इंजीनियर अनीस अहमद खान और डॉ. अनीस बेग जैसे नेताओं की दावेदारी भी चर्चा में रहती है। यदि कांग्रेस को कैंट सीट मिलती है और नवाब मुजाहिद को टिकट मिलता है तो इन नेताओं के सामने अलग राजनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि कांग्रेस-सपा गठबंधन किस रूप में होगा या बरेली की कौन-कौन सी सीट किस दल के हिस्से में जाएगी। गठबंधन का अंतिम स्वरूप ही इस पूरे समीकरण की दिशा तय करेगा।
मुस्लिम वोटों के साथ कांग्रेस का पुराना आधार भी महत्वपूर्ण
बरेली कैंट सीट पर कांग्रेस की रणनीति में मुस्लिम मतदाताओं के साथ-साथ पुराने कांग्रेस समर्थक वोट बैंक को साधना महत्वपूर्ण होगा। नवाब मुजाहिद हसन की दावेदारी को मजबूत करने वालों का मानना है कि उनके पास पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के साथ काम करने का अनुभव है।
वहीं कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की होगी। केवल मजबूत उम्मीदवार के सहारे चुनावी मुकाबला जीतना आसान नहीं होगा। पार्टी को मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदगी बढ़ाने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और विपक्षी दलों के प्रभाव को चुनौती देने के लिए लगातार काम करना होगा।
आने वाले महीनों में तस्वीर होगी साफ
फिलहाल बरेली कैंट की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 में कांग्रेस इस सीट पर खुद चुनाव लड़ेगी या गठबंधन की स्थिति में इसे सपा के लिए छोड़ देगी। इसके बाद दूसरा सवाल उम्मीदवार का होगा।
यदि कांग्रेस कैंट सीट अपने हिस्से में रखती है और पुराने नेताओं को प्राथमिकता देने की नीति अपनाती है तो नवाब मुजाहिद हसन की दावेदारी निश्चित रूप से मजबूत मानी जाएगी। दिल्ली में उनकी सक्रियता, स्थानीय कार्यक्रमों में बढ़ती मौजूदगी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क इस दिशा में उनकी गंभीर तैयारी का संकेत देते हैं।
फिलहाल चुनाव में काफी समय बाकी है और राजनीतिक समीकरण कई बार बदल सकते हैं। कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति, सपा के साथ संभावित गठबंधन और हाईकमान की उम्मीदवार चयन नीति आने वाले समय में बरेली कैंट की तस्वीर स्पष्ट करेगी। इतना जरूर है कि नवाब मुजाहिद हसन ने अपनी सक्रियता बढ़ाकर यह संकेत दे दिया है कि वह 2027 की चुनावी दौड़ में खुद को मजबूत दावेदार के रूप में पेश करने की पूरी तैयारी कर रहे हैं।




